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Deoria News: राम-भरत मिलाप देख निहाल हुए श्रद्धालु
Sat, 11 Oct 2025 12:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 11 Oct 2025 12:41 AM IST
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रामलीला मंचन में संवाद प्रस्तुत करते कलाकार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रहे रामायण मंचन के तीसरे दिन बृहस्पतिवार की रात राम-भरत मिलाप का मंचन हुआ। भावपूर्ण मंचन देख श्रद्धालुओं की आंखें नम हो आईं। भक्तिभाव में विभोर लोग राम-भरत के जयकारे लगाने लगे। चहुंओर श्रद्धा भक्ति की बयार बहने लगी।
श्री रामलीला का मंचन गणेश वंदना व हनुमान चालीसा के साथ शुरू हुआ। सांस्कृतिक संगम सलेमपुर के कलाकारों द्वारा मंचन के प्रथम दृश्य में राम, लक्ष्मण, भरत संवाद होता है। जहां प्रभु श्रीराम भरत को चरण पादुका देकर उनसे विदा लेते हैं और पंचवटी पहुंचते हैं।
अगले दृश्य में पंचवटी में शूर्पणखा का राम-लक्ष्मण को देखकर मोहित होती हैं, जहां वह दोनों भाइयों से विवाह का प्रस्ताव करती हैं, जहां पर बार-बार मना करने पर भी शूर्पणखा का मानती नहीं है जिस पर लक्ष्मण क्रोधित होकर उनका नाक और कान काट देते हैं। इससे वह वहां से खर दूषण के पास जाती हैं और दोनों भाइयों के बारे में बताती हैं।
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खरदूषण बदलने के भाव से आते हैं प्रभु श्रीराम हाथों उनका वध हो जाता है। अगले दृश्य में शूर्पणखा लंका पहुंचती है जहां पर रावण को भड़काती है। इससे क्रोधित होकर रावण वहां से पंचवटी की ओर आता है और मरीज को स्वर्ण मृग बनाकर सीता के समक्ष जाने को कहता है। सीता आकर्षित होती हैं। श्रीराम से कहती हैं मुझे वह स्वर्ण मृग चाहिए।
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देवरिया। श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रहे रामायण मंचन के तीसरे दिन बृहस्पतिवार की रात राम-भरत मिलाप का मंचन हुआ। भावपूर्ण मंचन देख श्रद्धालुओं की आंखें नम हो आईं। भक्तिभाव में विभोर लोग राम-भरत के जयकारे लगाने लगे। चहुंओर श्रद्धा भक्ति की बयार बहने लगी।
श्री रामलीला का मंचन गणेश वंदना व हनुमान चालीसा के साथ शुरू हुआ। सांस्कृतिक संगम सलेमपुर के कलाकारों द्वारा मंचन के प्रथम दृश्य में राम, लक्ष्मण, भरत संवाद होता है। जहां प्रभु श्रीराम भरत को चरण पादुका देकर उनसे विदा लेते हैं और पंचवटी पहुंचते हैं।
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अगले दृश्य में पंचवटी में शूर्पणखा का राम-लक्ष्मण को देखकर मोहित होती हैं, जहां वह दोनों भाइयों से विवाह का प्रस्ताव करती हैं, जहां पर बार-बार मना करने पर भी शूर्पणखा का मानती नहीं है जिस पर लक्ष्मण क्रोधित होकर उनका नाक और कान काट देते हैं। इससे वह वहां से खर दूषण के पास जाती हैं और दोनों भाइयों के बारे में बताती हैं।
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खरदूषण बदलने के भाव से आते हैं प्रभु श्रीराम हाथों उनका वध हो जाता है। अगले दृश्य में शूर्पणखा लंका पहुंचती है जहां पर रावण को भड़काती है। इससे क्रोधित होकर रावण वहां से पंचवटी की ओर आता है और मरीज को स्वर्ण मृग बनाकर सीता के समक्ष जाने को कहता है। सीता आकर्षित होती हैं। श्रीराम से कहती हैं मुझे वह स्वर्ण मृग चाहिए।