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देवरिया की बेटी को यूक्रेन में ट्रेन से धक्का देकर उतारा
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यूक्रेन के खारकीव में बंकर में शरण लिए भारतीय विद्यार्थियों में देवरिया की उपासना पांडेय भी शाम?
- फोटो : DEORIA
देवरिया की बेटी को यूक्रेन में ट्रेन से धक्का देकर उतारा
देवरिया। मेडिकल की पढ़ाई करने गई जिले की बेटी उपासना यूक्रेन के खारकीव में फंस गई हैं। बुधवार को रेलवे स्टेशन पर इस छात्रा को ट्रेन से धक्का देकर उतार दिया गया। उसके बाद उन्हें वहीं बंकर में अपनी तरह फंसे अन्य भारतीय विद्यार्थियों के बीच शरण लेनी पड़ी है। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को बताया कि केवल यूक्रेनियन को ही ट्रेन में घुसने दिया गया। छात्रा का कहना है कि विदेश मंत्रालय एवं अन्य कहीं से विद्यार्थियों को कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
बीआरडी इंटर कॉलेज की शिक्षक अन्नपूर्णा पांडेय की बेटी उपासना यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। उन्हें पता लगा कि युद्ध के आसार हैं तो उन्होंने एंबेसी में और अपने प्रोफेसर से बात की। वापस आने का हवाई टिकट 26 फरवरी का कराया, लेकिन 24 फरवरी को ही विश्वविद्यालय पर बमबारी होने लगी। इस कारण मेडिकल विश्वविद्यालय के हास्टल के बंकर में सभी 700 भारतीय छात्र एकत्रित हो गए। खाने का संकट भी पैदा हो गया है। किसी तरह दो मार्च तक विद्यार्थी बंकर में छिपे रहे।
विश्वविद्यालय के ऊपर दोबारा बम गिरने के बाद बमबारी के बीच ही किसी तरह दस किमी दूर रेलवे स्टेशन तक पैदल छिप-छिप कर कई विद्यार्थी पहुंचे, लेकिन वहां ट्रेनों में भारतीय छात्रों को धक्का देकर उतार दिया गया। ऐसे में छात्र रेलवे स्टेशन पर फंस गए हैं। उपासना ने संवाददाता को बताया कि समझ में नहीं आ रहा है कि हम लोग क्या करें। भय और दहशत में सभी छात्र और उनके परिवार के सदस्य हैं। दो मार्च को एंबेसी की एडवाइजरी में कहा गया है कि तुरंत आप लोग खारकीव छोड़ दें। ऐसे में छात्र क्या करें, न ट्रेन है, न यातायात का कोई साधन ही मुहैया हो पा रहा है। खारकीव से किसी भी बार्डर की दूरी एक हजार किमी से अधिक है। बाहर बमबारी एवं बर्फवारी भी हो रहीं है। तापमान शून्य है। विदेश मंत्रालय कह रहा है कि अपने से व्यवस्था करें। उधर, इस छात्रा की मां के आंसू नहीं थम रहे हैं।
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देवरिया। मेडिकल की पढ़ाई करने गई जिले की बेटी उपासना यूक्रेन के खारकीव में फंस गई हैं। बुधवार को रेलवे स्टेशन पर इस छात्रा को ट्रेन से धक्का देकर उतार दिया गया। उसके बाद उन्हें वहीं बंकर में अपनी तरह फंसे अन्य भारतीय विद्यार्थियों के बीच शरण लेनी पड़ी है। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को बताया कि केवल यूक्रेनियन को ही ट्रेन में घुसने दिया गया। छात्रा का कहना है कि विदेश मंत्रालय एवं अन्य कहीं से विद्यार्थियों को कोई मदद नहीं मिल पा रही है।
बीआरडी इंटर कॉलेज की शिक्षक अन्नपूर्णा पांडेय की बेटी उपासना यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। उन्हें पता लगा कि युद्ध के आसार हैं तो उन्होंने एंबेसी में और अपने प्रोफेसर से बात की। वापस आने का हवाई टिकट 26 फरवरी का कराया, लेकिन 24 फरवरी को ही विश्वविद्यालय पर बमबारी होने लगी। इस कारण मेडिकल विश्वविद्यालय के हास्टल के बंकर में सभी 700 भारतीय छात्र एकत्रित हो गए। खाने का संकट भी पैदा हो गया है। किसी तरह दो मार्च तक विद्यार्थी बंकर में छिपे रहे।
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विश्वविद्यालय के ऊपर दोबारा बम गिरने के बाद बमबारी के बीच ही किसी तरह दस किमी दूर रेलवे स्टेशन तक पैदल छिप-छिप कर कई विद्यार्थी पहुंचे, लेकिन वहां ट्रेनों में भारतीय छात्रों को धक्का देकर उतार दिया गया। ऐसे में छात्र रेलवे स्टेशन पर फंस गए हैं। उपासना ने संवाददाता को बताया कि समझ में नहीं आ रहा है कि हम लोग क्या करें। भय और दहशत में सभी छात्र और उनके परिवार के सदस्य हैं। दो मार्च को एंबेसी की एडवाइजरी में कहा गया है कि तुरंत आप लोग खारकीव छोड़ दें। ऐसे में छात्र क्या करें, न ट्रेन है, न यातायात का कोई साधन ही मुहैया हो पा रहा है। खारकीव से किसी भी बार्डर की दूरी एक हजार किमी से अधिक है। बाहर बमबारी एवं बर्फवारी भी हो रहीं है। तापमान शून्य है। विदेश मंत्रालय कह रहा है कि अपने से व्यवस्था करें। उधर, इस छात्रा की मां के आंसू नहीं थम रहे हैं।
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