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Deoria News: अधिक तनाव लेने से मनोविरादिता रोग से ग्रसित हो रहे लोग
Tue, 27 Aug 2024 02:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 27 Aug 2024 02:14 AM IST
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देवरिया। ज्यादा काम और तनाव से लोग मानसिक रोग से ग्रसित हो रहे हैं। ब्रेन में न्यूरोट्रांसमीटर के असंतुलित होने से लोग मनोविरादिता रोग से पीड़ित हो रहे हैं। इस बीमारी में शक व भ्रम होता है। दूसरे पर अविश्वास और सबकुछ मैं ही कर रहा हूं जैसे भाव मन में आने लगता है। मेडिकल कॉलेज में इस बीमारी पीड़ित रोजाना करीब पांच मरीज आ रहे हैं। जल्द इलाज कराने पर बीमारी नियंत्रित हो सकती है।
अनियमित दिनचर्या का लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। अतिव्यस्त जीवन शैली और तनाव की वजह से लोग मानसिक रोग के शिकार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में मनोविरादिता के मरीज भी इलाज के लिए आ रहे हैं। इसमें मरीज में भ्रम और संदेह होता है। ऐसी बातों को मानता है जो वास्तविक नहीं होता है। इसके साथ ही अलग अनुभूतियां होने लगती हैं। वह अपने व्यवहार से दूसरों को नुकसान भी पहुंचा देता है। यह बीमारी लड़कों में कम उम्र में होती है, जबकि महिलाओं में देर से होती है। इस तरह के मरीज अपने को बीमार नहीं समझते हैं, वह दवा लेना बंद कर देते हैं, जो नुकसानदेय होता है। इस पर ध्यान देने की जरूरत होती है। इस तरह के मरीज हीनभावना से ग्रसित महसूस न करें। इसपर ध्यान देने के साथ अच्छा वातावरण बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।
ऐसी बातों को मानता है व्यक्ति जो नहीं होता वास्तविक
मानसिक रोग विशेषज्ञ डाॅ. अंबू पांडेय का कहना है कि दिमाग में केमिकल होता है। न्यूरो ट्रांसमीटर का असंतुलन होने से दिक्कत होती है। इससे मनोविरादिता होती है। ब्रेन के अलग-अलग हिस्से से अलग-अलग लक्षण उत्पन्न होते हैं। व्यक्ति को भ्रम और संदेह होता है। ऐसी बातों को मानता है जो वास्तविक नहीं होता है, इसे डिल्यूजन डिसऑर्डर कहते हैं। व्यक्ति को विशेष प्रकार की अनुभूतियां होती हैं, जो वास्तविक नहीं होती है। उसे आवाज सुनाई व चीजें दिखाई देती हैं जो दूसरे किसी को न सुनाई देती और न दिखाई देती है। शरीर में विचित्र अनुभूतियां होती है जैसे गला दबाना, व्यवहार अनियंत्रित हो जाता है, जो दूसरे को नुकसान पहुंचा देता है। इस तरह का व्यक्ति कभी-कभी कई दिन तक बोलना बंद कर देता है। उसकी दिनचर्या गलत होती जाती है। कई दिन स्नान व भोजन नहीं करता है, गंदगी से रहता है। बात करने से कतराता है, एकांत में रहता है और बात करने पर रिस्पांस नहीं देता है। इसकी वजह से संबंध बिगड़ता है। लक्षण मिलने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जल्द इलाज शुरू कराने से नियंत्रित हो सकती है। मरीज अपना कार्य करता है। मरीज को अच्छा माहौल देना चाहिए, ताकि उसके अंदर हीनभावना न आए।
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लक्षण
- अनियमित दिनचर्या होना
- कई दिन तक न बोलना
- भोजन, स्नान नहीं करना
- साफ सुथरा नहीं रहना, गंदगी करना
- बात करने से कतराना, एकांत में रहना
- बात करने पर जवाब न देना
यह बरतें सावधानी
- दिनचर्या नियमित रखें
- तनावग्रस्त न रहे
- योग, हल्का व्यायाम करें
- पौष्टिक व सुपाच्य भोजन करें
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अनियमित दिनचर्या का लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। अतिव्यस्त जीवन शैली और तनाव की वजह से लोग मानसिक रोग के शिकार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में मनोविरादिता के मरीज भी इलाज के लिए आ रहे हैं। इसमें मरीज में भ्रम और संदेह होता है। ऐसी बातों को मानता है जो वास्तविक नहीं होता है। इसके साथ ही अलग अनुभूतियां होने लगती हैं। वह अपने व्यवहार से दूसरों को नुकसान भी पहुंचा देता है। यह बीमारी लड़कों में कम उम्र में होती है, जबकि महिलाओं में देर से होती है। इस तरह के मरीज अपने को बीमार नहीं समझते हैं, वह दवा लेना बंद कर देते हैं, जो नुकसानदेय होता है। इस पर ध्यान देने की जरूरत होती है। इस तरह के मरीज हीनभावना से ग्रसित महसूस न करें। इसपर ध्यान देने के साथ अच्छा वातावरण बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।
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ऐसी बातों को मानता है व्यक्ति जो नहीं होता वास्तविक
मानसिक रोग विशेषज्ञ डाॅ. अंबू पांडेय का कहना है कि दिमाग में केमिकल होता है। न्यूरो ट्रांसमीटर का असंतुलन होने से दिक्कत होती है। इससे मनोविरादिता होती है। ब्रेन के अलग-अलग हिस्से से अलग-अलग लक्षण उत्पन्न होते हैं। व्यक्ति को भ्रम और संदेह होता है। ऐसी बातों को मानता है जो वास्तविक नहीं होता है, इसे डिल्यूजन डिसऑर्डर कहते हैं। व्यक्ति को विशेष प्रकार की अनुभूतियां होती हैं, जो वास्तविक नहीं होती है। उसे आवाज सुनाई व चीजें दिखाई देती हैं जो दूसरे किसी को न सुनाई देती और न दिखाई देती है। शरीर में विचित्र अनुभूतियां होती है जैसे गला दबाना, व्यवहार अनियंत्रित हो जाता है, जो दूसरे को नुकसान पहुंचा देता है। इस तरह का व्यक्ति कभी-कभी कई दिन तक बोलना बंद कर देता है। उसकी दिनचर्या गलत होती जाती है। कई दिन स्नान व भोजन नहीं करता है, गंदगी से रहता है। बात करने से कतराता है, एकांत में रहता है और बात करने पर रिस्पांस नहीं देता है। इसकी वजह से संबंध बिगड़ता है। लक्षण मिलने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जल्द इलाज शुरू कराने से नियंत्रित हो सकती है। मरीज अपना कार्य करता है। मरीज को अच्छा माहौल देना चाहिए, ताकि उसके अंदर हीनभावना न आए।
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लक्षण
- अनियमित दिनचर्या होना
- कई दिन तक न बोलना
- भोजन, स्नान नहीं करना
- साफ सुथरा नहीं रहना, गंदगी करना
- बात करने से कतराना, एकांत में रहना
- बात करने पर जवाब न देना
यह बरतें सावधानी
- दिनचर्या नियमित रखें
- तनावग्रस्त न रहे
- योग, हल्का व्यायाम करें
- पौष्टिक व सुपाच्य भोजन करें