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रुपये के लिए सात घंटे तक रोका शव
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रुपये के लिए सात घंटे तक रोका शव
शहर के एक निजी अस्पताल का मामला
बेटा रुपये न होने की देता रहा दुहाई
देवरिया। शासन का आदेश है कि मौत के बाद किसी भी मरीज के शव को रुपये के लिए नहीं रोका जा सकता। इसकी अनदेखी करते हुए शहर के एक निजी अस्पताल के संचालक ने एक महिला की मौत के बाद 72 हजार रुपये के लिए सात घंटे तक शव को रोका रखा। किसी तरह कुछ रुपये का इंतजाम कर परिजन लाए और शव देने की गुहार लगाते रहे। काफी प्रयास के बाद शव परिजनों को दिया।
सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी 54 वर्षीय महिला को 28 अक्तूबर को दिल का दौरा पड़ा था। परिजनों ने उसे शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान बृहस्पतिवार रात करीब 2:30 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि करीब 1.25 लाख रुपये का इलाज का खर्च अस्पताल संचालक को दे चुके हैं। शव ले जाने के लिए कहा तो अस्पताल के काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने बकाया 72 हजार रुपये बिल थमा दिया।
महिला के पुत्र किसी तरह सुबह सात बजे तक पंद्रह हजार रुपये लेकर पहुंचे। बाकी रुपयों की व्यवस्था नहीं हो पाई। करीब 57 हजार रुपये चुकता करने के बाद ही शव ले जाने की जिद्द पर अस्पताल कर्मी अड़ गए। रुपये की व्यवस्था न होने पाने की दशा में पुत्र अस्पताल संचालक की गुहार लगाता रहा। करीब 10:15 बजे जब संचालक को लगा की मामला बढ़ सकता है तो वह शव देने के लिए राजी हुए।
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...
कोट
मुझे शिकायत नहीं मिली है। विभागीय स्तर से जानकारी हासिल की है। अस्पताल संचालक ने बताया है कि शव रुपये के लिए नहीं रोका गया था। अगर मरीज की मौत हो जाती है तो शव रोकना गलत है। इस तरह के अस्पताल पर सख्त कार्रवाई की जाती है।
डॉ. राजेश कुमार झा, सीएमओ
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शहर के एक निजी अस्पताल का मामला
बेटा रुपये न होने की देता रहा दुहाई
देवरिया। शासन का आदेश है कि मौत के बाद किसी भी मरीज के शव को रुपये के लिए नहीं रोका जा सकता। इसकी अनदेखी करते हुए शहर के एक निजी अस्पताल के संचालक ने एक महिला की मौत के बाद 72 हजार रुपये के लिए सात घंटे तक शव को रोका रखा। किसी तरह कुछ रुपये का इंतजाम कर परिजन लाए और शव देने की गुहार लगाते रहे। काफी प्रयास के बाद शव परिजनों को दिया।
सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी 54 वर्षीय महिला को 28 अक्तूबर को दिल का दौरा पड़ा था। परिजनों ने उसे शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान बृहस्पतिवार रात करीब 2:30 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि करीब 1.25 लाख रुपये का इलाज का खर्च अस्पताल संचालक को दे चुके हैं। शव ले जाने के लिए कहा तो अस्पताल के काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने बकाया 72 हजार रुपये बिल थमा दिया।
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महिला के पुत्र किसी तरह सुबह सात बजे तक पंद्रह हजार रुपये लेकर पहुंचे। बाकी रुपयों की व्यवस्था नहीं हो पाई। करीब 57 हजार रुपये चुकता करने के बाद ही शव ले जाने की जिद्द पर अस्पताल कर्मी अड़ गए। रुपये की व्यवस्था न होने पाने की दशा में पुत्र अस्पताल संचालक की गुहार लगाता रहा। करीब 10:15 बजे जब संचालक को लगा की मामला बढ़ सकता है तो वह शव देने के लिए राजी हुए।
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कोट
मुझे शिकायत नहीं मिली है। विभागीय स्तर से जानकारी हासिल की है। अस्पताल संचालक ने बताया है कि शव रुपये के लिए नहीं रोका गया था। अगर मरीज की मौत हो जाती है तो शव रोकना गलत है। इस तरह के अस्पताल पर सख्त कार्रवाई की जाती है।
डॉ. राजेश कुमार झा, सीएमओ