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जिंदगी अनमोल है इसे खतरे में न डालें
deoria
Updated Sun, 11 Feb 2018 10:40 PM IST
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एक बाइक पर सवार तीन लोग।
- फोटो : amar ujala
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देवरिया। आए दिन हो रहे हादसों के आंकड़े अपने आप में किसी को भी सड़क पर सजग होकर चलने और यातायात नियमों का पालन करने की सीख देने के लिए काफी हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। हादसों की संख्या में बढ़ोतरी होने के बावजूद लोग सबक नहीं ले रहे। बगैर हेलमेट बाइक चलाना और मोटरसाइकिल पर तीन लोगों का बैठना (ट्रिपल राइडिंग) आम हो गया है। ऐसे में हादसा होता है और पूरे परिवार को दे जाता है जिंदगी भर का गम।
हादसों के कारण की बात करें तो पहला नंबर आता है यातायात नियमों की अनदेखी का। बाइक चालकों का हेलमेट न लगाना और तीन सवारी के साथ चलना आए दिन जानलेवा साबित हो रहा है। दुर्घटना होने पर सिर में चोट लगने की वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही कार चालकों का सीट बेल्ट न लगाना और रफ्तार का जुनून भी जानलेवा साबित हो रहा है। आए दिन बिना लाइसेंस वाले लोग भी वाहन लेकर सड़क पर निकल पड़ते हैं और हादसे को अंजाम दे देते हैं, जो किसी की जान ले लेता है और पूरे परिवार को गम में डुबो देता है। वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातें करना भी नियमों का उल्लंघन हैं, लेकिन सड़क पर ऐसा करने वाले लोग आसानी से दिख जाते हैं। यातायात विभाग की ओर से हर साल नवंबर को सड़क सुरक्षा माह के रूप में मनाया जाता है। लोगों को यातायात के नियमों की जानकारी देते हुए जागरूक किया जाता है, लेकिन महीना बीतने के बाद हालात जस के तस हो जाते हैं।
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ध्यान रखें, कोई आपकी राह देखता होगा
- ‘दुर्घटना से देर भली’, ‘आपकी यात्रा मंगलमय हो’, ‘सुरक्षित चलिए’, ‘यातायात नियमों का पालन करें’। जरा सोचिए! ये स्लोगन आपकी जान बचा सकते हैं। ये हैं भी आपके और आपके परिवार के लिए। ये स्लोगन उन नन्हे-मुन्नों के लिए हैं, जो पापा के घर आने के इंतजार में दरवाजे पर टकटकी लगाए रहते हैं। यह उनके लिए भी है जिनकी जिंदगी आपसे है, जिसकी खुशी आप हैं। तो आएं हम सब यातायात नियमों का पालन करने का संकल्प लें। बगैर हेलमेट के बाइक न चलाएं, रेड लाइट का ध्यान रखें, रफ्तार पर नियंत्रण रखें और सबसे मुख्य बात कि बाइक पर तीन लोग न बैठें। जिंदगी खूबसूरत है इसे और खूबसूरत बनाएं।
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सिर की चोट होती है सबसे खतरनाक
- सड़क हादसों में सिर में लगने वाली चोट सबसे खतरनाक होती है। अधिकांश मामलों में मौत सिर में गंभीर चोट लगने की वजह से होती है। यातायात पुलिस की ओर से भी हादसों में कमी लाने के लिए बार-बार अभियान चलाया जाता है। इस दौरान इस बात पर खासा ध्यान दिया जाता है कि बाइक चालक ने हेलमेट पहना है या नहीं। नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और उन्हें आगे से ऐसा न करने की चेतावनी दी जाती है। पुलिस का कहना है कि अगर लोग नियमों का पालन करें तो सड़क हादसों की संख्या में कमी आ सकती है।
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शराब पीकर गाड़ी न चलाए, यह जानलेवा है
- शराब पीकर वाहन चलाना शौक बनता जा रहा है, जो हादसों का बड़ा कारण है। अक्सर देखा जाता है कि हादसे के बात खबर आती है कि चालक ने शराब पी रखी थी। ऐसा करना अपनी जिंदगी के साथ ही दूसरों की जिंदगी को भी खतरे में डालना है। पुलिस कई बात ऐसे लोगों का चालान करती है। ओवरस्पीड भी हादसे का बड़ा कारण हैं। स्पीड अधिक होने पर चालक का वाहन पर नियंत्रण नहीं रहता और एक हादसा कई लोगों की जिंदगी तबाह कर देता है।
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न करें ट्रिपल राइडिंग
- ट्रिपल राइडिंग अर्थात बाइक पर तीन लोगों का बैठना। यातायात नियम के अनुसार बाइक पर तीन सवारी ले जाना गैर कानूनी है। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी करती है, लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। बाइक राइडिंग के दौरान मोबाइल पर बातें करना भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह है। ऐसे में चालक का ध्यान बातों में लगा रहता है और कब सामने से कोई गाड़ी आ गई उसे पता ही नहीं चलता। पुलिस बार-बार कहती है कि बात करना जरूरी हो तो वाहन रोक लें। गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करना नियमों का भी उल्लंघन है।
लाडले को दुलार करें, टीनएज में बाइक न दें
- आपका लाडला आपके लिए सबसे प्यारा है। उसे खूब दुलार करें, लेकिन टीनएज में उसे बाइक न दें। यह जानलेवा हो सकता है। उसे सही उम्र और बाइक चलाने के प्रशिक्षण के बाद ही मोटरसाइकिल चलाने की इजाजत दें। ऐसे में उम्र में बच्चों को यातायात नियम की भी पूरी जानकारी नहीं होती और वे हादसे के शिकार हो जाते हैं और पीछे रह जाता है एक पछतावा, जो जिंदगी भर मां-बाप को सालता रहता है।
रोज छीने जाते हैं बाइक सवारों से ईयरफोन
- यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आए दिन अभियान चलाया जाता है। वाहन सीज किए जाते हैं और ईयरफोन लगाकर मोबाइल पर बात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों डीएम और एसपी ने खुद वाहन चेकिंग की कमान संभाली थी। इसके बाद शहर के हर नाके पर चेकिंग शुरू हो गई थी। वकीलों के भी वाहनों के चालान किए गए थे। इस बात को लेकर विवाद बढ़ा और पुलिस का अभियान सुस्त पड़ गया।
मुस्तैद रहती है पुलिस : एसपी
एसपी राकेश शंकर ने कहा कि यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस प्रशासन हमेशा मुस्तैद रहता है। पुलिस गाड़ी चलाने वाले कम उम्र के बच्चों को रोकती है और परिवार वालों को मौके पर बुलाती है। इसके बाद चेतावनी देकर इन्हें छोड़ा जाता है।
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हादसों के कारण की बात करें तो पहला नंबर आता है यातायात नियमों की अनदेखी का। बाइक चालकों का हेलमेट न लगाना और तीन सवारी के साथ चलना आए दिन जानलेवा साबित हो रहा है। दुर्घटना होने पर सिर में चोट लगने की वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही कार चालकों का सीट बेल्ट न लगाना और रफ्तार का जुनून भी जानलेवा साबित हो रहा है। आए दिन बिना लाइसेंस वाले लोग भी वाहन लेकर सड़क पर निकल पड़ते हैं और हादसे को अंजाम दे देते हैं, जो किसी की जान ले लेता है और पूरे परिवार को गम में डुबो देता है। वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातें करना भी नियमों का उल्लंघन हैं, लेकिन सड़क पर ऐसा करने वाले लोग आसानी से दिख जाते हैं। यातायात विभाग की ओर से हर साल नवंबर को सड़क सुरक्षा माह के रूप में मनाया जाता है। लोगों को यातायात के नियमों की जानकारी देते हुए जागरूक किया जाता है, लेकिन महीना बीतने के बाद हालात जस के तस हो जाते हैं।
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ध्यान रखें, कोई आपकी राह देखता होगा
- ‘दुर्घटना से देर भली’, ‘आपकी यात्रा मंगलमय हो’, ‘सुरक्षित चलिए’, ‘यातायात नियमों का पालन करें’। जरा सोचिए! ये स्लोगन आपकी जान बचा सकते हैं। ये हैं भी आपके और आपके परिवार के लिए। ये स्लोगन उन नन्हे-मुन्नों के लिए हैं, जो पापा के घर आने के इंतजार में दरवाजे पर टकटकी लगाए रहते हैं। यह उनके लिए भी है जिनकी जिंदगी आपसे है, जिसकी खुशी आप हैं। तो आएं हम सब यातायात नियमों का पालन करने का संकल्प लें। बगैर हेलमेट के बाइक न चलाएं, रेड लाइट का ध्यान रखें, रफ्तार पर नियंत्रण रखें और सबसे मुख्य बात कि बाइक पर तीन लोग न बैठें। जिंदगी खूबसूरत है इसे और खूबसूरत बनाएं।
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सिर की चोट होती है सबसे खतरनाक
- सड़क हादसों में सिर में लगने वाली चोट सबसे खतरनाक होती है। अधिकांश मामलों में मौत सिर में गंभीर चोट लगने की वजह से होती है। यातायात पुलिस की ओर से भी हादसों में कमी लाने के लिए बार-बार अभियान चलाया जाता है। इस दौरान इस बात पर खासा ध्यान दिया जाता है कि बाइक चालक ने हेलमेट पहना है या नहीं। नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और उन्हें आगे से ऐसा न करने की चेतावनी दी जाती है। पुलिस का कहना है कि अगर लोग नियमों का पालन करें तो सड़क हादसों की संख्या में कमी आ सकती है।
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शराब पीकर गाड़ी न चलाए, यह जानलेवा है
- शराब पीकर वाहन चलाना शौक बनता जा रहा है, जो हादसों का बड़ा कारण है। अक्सर देखा जाता है कि हादसे के बात खबर आती है कि चालक ने शराब पी रखी थी। ऐसा करना अपनी जिंदगी के साथ ही दूसरों की जिंदगी को भी खतरे में डालना है। पुलिस कई बात ऐसे लोगों का चालान करती है। ओवरस्पीड भी हादसे का बड़ा कारण हैं। स्पीड अधिक होने पर चालक का वाहन पर नियंत्रण नहीं रहता और एक हादसा कई लोगों की जिंदगी तबाह कर देता है।
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न करें ट्रिपल राइडिंग
- ट्रिपल राइडिंग अर्थात बाइक पर तीन लोगों का बैठना। यातायात नियम के अनुसार बाइक पर तीन सवारी ले जाना गैर कानूनी है। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी करती है, लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। बाइक राइडिंग के दौरान मोबाइल पर बातें करना भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह है। ऐसे में चालक का ध्यान बातों में लगा रहता है और कब सामने से कोई गाड़ी आ गई उसे पता ही नहीं चलता। पुलिस बार-बार कहती है कि बात करना जरूरी हो तो वाहन रोक लें। गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करना नियमों का भी उल्लंघन है।
लाडले को दुलार करें, टीनएज में बाइक न दें
- आपका लाडला आपके लिए सबसे प्यारा है। उसे खूब दुलार करें, लेकिन टीनएज में उसे बाइक न दें। यह जानलेवा हो सकता है। उसे सही उम्र और बाइक चलाने के प्रशिक्षण के बाद ही मोटरसाइकिल चलाने की इजाजत दें। ऐसे में उम्र में बच्चों को यातायात नियम की भी पूरी जानकारी नहीं होती और वे हादसे के शिकार हो जाते हैं और पीछे रह जाता है एक पछतावा, जो जिंदगी भर मां-बाप को सालता रहता है।
रोज छीने जाते हैं बाइक सवारों से ईयरफोन
- यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आए दिन अभियान चलाया जाता है। वाहन सीज किए जाते हैं और ईयरफोन लगाकर मोबाइल पर बात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों डीएम और एसपी ने खुद वाहन चेकिंग की कमान संभाली थी। इसके बाद शहर के हर नाके पर चेकिंग शुरू हो गई थी। वकीलों के भी वाहनों के चालान किए गए थे। इस बात को लेकर विवाद बढ़ा और पुलिस का अभियान सुस्त पड़ गया।
मुस्तैद रहती है पुलिस : एसपी
एसपी राकेश शंकर ने कहा कि यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस प्रशासन हमेशा मुस्तैद रहता है। पुलिस गाड़ी चलाने वाले कम उम्र के बच्चों को रोकती है और परिवार वालों को मौके पर बुलाती है। इसके बाद चेतावनी देकर इन्हें छोड़ा जाता है।