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गिरजा की संस्था से छिन गई सामूहिक विवाह की जिम्मेदारी
Updated Sat, 13 Oct 2018 10:29 PM IST
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देवरिया। गरीब परिवार की कन्याओं की शादी के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में कार्यक्रम स्थल की सभी तैयारी अब जिला नगरीय विकास अभिकरण करेगा। डीएम अमित किशोर ने पूर्व में नामित संस्था मां विंध्यवासिनी सेवा संस्थान को आयोजन की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की शुरुआत अक्तूबर 2017 में की गई थी। तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार ने विवाह कार्यक्रम के आयोजन के लिए गिरिजा त्रिपाठी की संस्था मां विंध्यवासिनी सेवा संस्थान को नामित किया था। गिरिजा के नेतृत्व में सामूहिक विवाह का पहला आयोजन पुलिस लाइंस में किया गया, जिसमें एक साथ 56 जोड़ों की शादी हुई। कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में गठित विवाह समिति ने तमाम आयोजन गिरिजा की देखरेख में संपन्न कराए। हालांकि योजना की शुुुरुआत काफी देर से होने के चलते 475 लक्ष्य के सापेक्ष करीब 175 जोड़ों की शादी संपन्न हो पाई। वित्तीय वर्ष 2018-19 में शासन ने जिले को 534 जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को 1.86 लाख 90 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। पांच अगस्त को गिरिजा पर लड़कियों से देह व्यापार कराने का आरोप लगते ही एक-एक कर सभी संस्थाओं को निलंबित कर दिया गया है। अब सामूहिक विवाह के आयोजन की जिम्मेदारी से भी मुक्त कर दिया गया।
डीएम के निर्देश पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कार्यक्रम आयोजित कराने की जिम्मेदारी जिला नगरीय विकास अभिकरण को सौंप दिया गया है। अब इस योजना में मां विंध्यवासिनी सेवा संस्थान सहभागी नहीं है।
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-दीनानाथ शुक्ल, समाज कल्याण अधिकारी।
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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की शुरुआत अक्तूबर 2017 में की गई थी। तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार ने विवाह कार्यक्रम के आयोजन के लिए गिरिजा त्रिपाठी की संस्था मां विंध्यवासिनी सेवा संस्थान को नामित किया था। गिरिजा के नेतृत्व में सामूहिक विवाह का पहला आयोजन पुलिस लाइंस में किया गया, जिसमें एक साथ 56 जोड़ों की शादी हुई। कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में गठित विवाह समिति ने तमाम आयोजन गिरिजा की देखरेख में संपन्न कराए। हालांकि योजना की शुुुरुआत काफी देर से होने के चलते 475 लक्ष्य के सापेक्ष करीब 175 जोड़ों की शादी संपन्न हो पाई। वित्तीय वर्ष 2018-19 में शासन ने जिले को 534 जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को 1.86 लाख 90 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। पांच अगस्त को गिरिजा पर लड़कियों से देह व्यापार कराने का आरोप लगते ही एक-एक कर सभी संस्थाओं को निलंबित कर दिया गया है। अब सामूहिक विवाह के आयोजन की जिम्मेदारी से भी मुक्त कर दिया गया।
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डीएम के निर्देश पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कार्यक्रम आयोजित कराने की जिम्मेदारी जिला नगरीय विकास अभिकरण को सौंप दिया गया है। अब इस योजना में मां विंध्यवासिनी सेवा संस्थान सहभागी नहीं है।
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-दीनानाथ शुक्ल, समाज कल्याण अधिकारी।