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पूछताछ के बाद गिरिजा को गोरखपुर की ओर ले गई टीम
Updated Tue, 21 Aug 2018 10:32 PM IST
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पूछताछ के बाद गिरिजा को गोरखपुर ले गई एसआईटी
- लग्जरी गाड़ियों की तलाश में जुटी जांच टीम को मिले अहम सुराग
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका कांड में रिमांड पर ली गई गिरिजा से पूछताछ के बाद एसआईटी मंगलवार को उसे गोरखपुर ले गई। वहां गिरिजा की संस्था के माध्यम से लंबे समय तक वृद्धाश्रम का संचालन होता रहा है। यहां गिरिजा से कुछ लग्जरी गाड़ियों और कुछ संदिग्ध लोगों की भी पहचान कराई जानी है। गिरिजा का रिमांड रात नौ बजे तक है। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया जाना है।
पिछले 12 दिनों से मामले की छानबीन में जुटी एसआईटी ने 18 अगस्त को एडीजे प्रथम की कोर्ट में संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, पति मोहन त्रिपाठी व अधीक्षिका कंचनलता त्रिपाठी को रिमांड पर लेने की अर्जी दी थी। कोर्ट ने 72 घंटे के रिमांड की मंजूरी दी थी। इसके बाद से एसआईटी तीनों से अलग-अलग पूछताछ में जुटी हुई है। सोमवार को कंचनलता को साथ लेकर बालगृह बालिका भवन में साक्ष्य एकत्रित किए, जबकि मंगलवार को मोहन त्रिपाठी को लेकर टीम पहुंची थी। दोपहर बाद एसआईटी की एक टीम गिरिजा त्रिपाठी को लेकर गोरखपुर रवाना हुई। टीम के साथ एसटीएफ के जवान भी मौजूद रहे। पुलिस सूत्रों की माने तो एसआईटी को लग्जरी गाड़ियों की तलाश है। बालगृह बालिका से बरामद एलबम में कई संदिग्ध चिह्नित किए गए हैं, जिनका संबंध गोरखपुर से है। एसआईटी गिरिजा के माध्यम से उनकी पहचान में जुटी है। इसके अलावा गोरखपुर में संचालित वृद्धाश्रम से भी कुछ अभिलेख कब्जे में लिए जाने हैं।
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बैंक खाते भी खंगाल रही एसआईटी
देवरिया। मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के अंतर्गत गिरिजा त्रिपाठी चार संस्थाओं का संचालन करती थी। इनके खाते भी अलग-अलग हैं। एसआईटी इन बैंक खातों को भी खंगाल रही है। आशंका जताई जा रही है कि संस्था में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की गई है। अब तक की छानबीन में पता चला है कि करीब एक साल पहले संस्था के खाते में आठ लाख रुपये जमा हुए, जिसे उसी दिन मोहन त्रिपाठी के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। एसआईटी मोहन त्रिपाठी के बैंक खातों का विवरण खंगाल रही है। इसके अलावा गिरिजा त्रिपाठी, बेटी कंचनलता व कनकलता त्रिपाठी के खातों का भी ब्योरा खंगाला जा रहा है। बैंक से इस बारे में जानकारी मांगी गई है।
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महराजगंज की सीडब्ल्यूसी की टीम नहीं आई देवरिया
जिलाधिकारी ने महराजगंज के डीएम को लिखा पत्र
देवरिया की सीडब्ल्यूसी भंग होने के बाद महराजगंज की टीम को दी गई है जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। लापरवाही के आरोप में सीडब्ल्यूसी के भेग होने के बाद देवरिया की जिम्मेदारी महराजगंज को दी गई थी, लेकिन एक हफ्ते बाद भी महराजगंज की टीम नहीं पहुंची। इस वजह से बरामद बच्चों की काउंसलिंग में दिक्कत आ रही है। देवरिया के डीएम ने महराजगंज के जिलाधिकारी को इसके लिए पत्र भेजा है।
बालगृह बालिका की संचालिका और उसके पति व बेटी पर कार्रवाई के बाद देवरिया की सीडब्ल्यूसी को भंग कर दिया गया। मान्यता स्थगित होने के बावजूद सीडब्ल्यूसी के सदस्य और अध्यक्ष इस बालिका गृह में बच्चों को रखते थे। जेल गई संचालिका के करीबी प्रतिभा श्रीवास्तव और कनकलता द्विवेदी बच्चों की काउंसलिंग भी करती थीं। जांच में दायरे में आई टीम को भंग कर दिया गया है। टीम के सदस्यों की ओर से एसआईटी को दिए गए बयान और अभिलेखों में भी अंतर मिला है। तत्काल प्रभाव से महराजगंज की सीडब्ल्यूसी को देवरिया का कार्य देखने को जिम्मेदारी दी गई है। एक सप्ताह पूर्व प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुुमार ने इसके लिए पत्र भेजा था, लेकिन कोई आया नहीं। डीएम अमित किशोर ने मंगलवार को महराजगंज के डीएम को सीडब्ल्यूसी टीम को देवरिया का भी कार्यों देखने के लिए पत्र भेजा है। जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार ने बताया कि अभी तक महराजगंज की सीडब्ल्यूसी की टीम नहीं आई है। इससे कार्य प्रभावित हो रहा है। इसके लिए पुन: डीएम के स्तर से पत्र भेजा गया है।
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- लग्जरी गाड़ियों की तलाश में जुटी जांच टीम को मिले अहम सुराग
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका कांड में रिमांड पर ली गई गिरिजा से पूछताछ के बाद एसआईटी मंगलवार को उसे गोरखपुर ले गई। वहां गिरिजा की संस्था के माध्यम से लंबे समय तक वृद्धाश्रम का संचालन होता रहा है। यहां गिरिजा से कुछ लग्जरी गाड़ियों और कुछ संदिग्ध लोगों की भी पहचान कराई जानी है। गिरिजा का रिमांड रात नौ बजे तक है। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया जाना है।
पिछले 12 दिनों से मामले की छानबीन में जुटी एसआईटी ने 18 अगस्त को एडीजे प्रथम की कोर्ट में संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, पति मोहन त्रिपाठी व अधीक्षिका कंचनलता त्रिपाठी को रिमांड पर लेने की अर्जी दी थी। कोर्ट ने 72 घंटे के रिमांड की मंजूरी दी थी। इसके बाद से एसआईटी तीनों से अलग-अलग पूछताछ में जुटी हुई है। सोमवार को कंचनलता को साथ लेकर बालगृह बालिका भवन में साक्ष्य एकत्रित किए, जबकि मंगलवार को मोहन त्रिपाठी को लेकर टीम पहुंची थी। दोपहर बाद एसआईटी की एक टीम गिरिजा त्रिपाठी को लेकर गोरखपुर रवाना हुई। टीम के साथ एसटीएफ के जवान भी मौजूद रहे। पुलिस सूत्रों की माने तो एसआईटी को लग्जरी गाड़ियों की तलाश है। बालगृह बालिका से बरामद एलबम में कई संदिग्ध चिह्नित किए गए हैं, जिनका संबंध गोरखपुर से है। एसआईटी गिरिजा के माध्यम से उनकी पहचान में जुटी है। इसके अलावा गोरखपुर में संचालित वृद्धाश्रम से भी कुछ अभिलेख कब्जे में लिए जाने हैं।
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बैंक खाते भी खंगाल रही एसआईटी
देवरिया। मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के अंतर्गत गिरिजा त्रिपाठी चार संस्थाओं का संचालन करती थी। इनके खाते भी अलग-अलग हैं। एसआईटी इन बैंक खातों को भी खंगाल रही है। आशंका जताई जा रही है कि संस्था में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की गई है। अब तक की छानबीन में पता चला है कि करीब एक साल पहले संस्था के खाते में आठ लाख रुपये जमा हुए, जिसे उसी दिन मोहन त्रिपाठी के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। एसआईटी मोहन त्रिपाठी के बैंक खातों का विवरण खंगाल रही है। इसके अलावा गिरिजा त्रिपाठी, बेटी कंचनलता व कनकलता त्रिपाठी के खातों का भी ब्योरा खंगाला जा रहा है। बैंक से इस बारे में जानकारी मांगी गई है।
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महराजगंज की सीडब्ल्यूसी की टीम नहीं आई देवरिया
जिलाधिकारी ने महराजगंज के डीएम को लिखा पत्र
देवरिया की सीडब्ल्यूसी भंग होने के बाद महराजगंज की टीम को दी गई है जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। लापरवाही के आरोप में सीडब्ल्यूसी के भेग होने के बाद देवरिया की जिम्मेदारी महराजगंज को दी गई थी, लेकिन एक हफ्ते बाद भी महराजगंज की टीम नहीं पहुंची। इस वजह से बरामद बच्चों की काउंसलिंग में दिक्कत आ रही है। देवरिया के डीएम ने महराजगंज के जिलाधिकारी को इसके लिए पत्र भेजा है।
बालगृह बालिका की संचालिका और उसके पति व बेटी पर कार्रवाई के बाद देवरिया की सीडब्ल्यूसी को भंग कर दिया गया। मान्यता स्थगित होने के बावजूद सीडब्ल्यूसी के सदस्य और अध्यक्ष इस बालिका गृह में बच्चों को रखते थे। जेल गई संचालिका के करीबी प्रतिभा श्रीवास्तव और कनकलता द्विवेदी बच्चों की काउंसलिंग भी करती थीं। जांच में दायरे में आई टीम को भंग कर दिया गया है। टीम के सदस्यों की ओर से एसआईटी को दिए गए बयान और अभिलेखों में भी अंतर मिला है। तत्काल प्रभाव से महराजगंज की सीडब्ल्यूसी को देवरिया का कार्य देखने को जिम्मेदारी दी गई है। एक सप्ताह पूर्व प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुुमार ने इसके लिए पत्र भेजा था, लेकिन कोई आया नहीं। डीएम अमित किशोर ने मंगलवार को महराजगंज के डीएम को सीडब्ल्यूसी टीम को देवरिया का भी कार्यों देखने के लिए पत्र भेजा है। जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार ने बताया कि अभी तक महराजगंज की सीडब्ल्यूसी की टीम नहीं आई है। इससे कार्य प्रभावित हो रहा है। इसके लिए पुन: डीएम के स्तर से पत्र भेजा गया है।