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पिता ने पुलिस से मांगा बेटी की मौत का इंसाफ
Updated Mon, 18 Sep 2017 11:39 PM IST
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नीलांबुज मिश्र
देवरिया। गुरुग्राम में हुए हादसे के बावजूद निजी स्कूल संचालक सुरक्षा के संदर्भ में कोई सीख नहीं ले रहे हैं। प्रशासन भी इसको लेकर गंभीर नहीं है। इस लापरवाही का नतीजा रहा कि सोमवार को नीतू चौहान को भी जान गंवानी पड़ी। दरवाजे पर पहुंची पुलिस से पिता ने बेटी की मौत का इंसाफ मांगा। दरवाजे पर पहुंची सहेलियों ने जब नीतू का ढका हुआ लाश देखी तो रोते हुए चलीं गईं।
नेहरू नगर में आद्या प्रसाद तिवारी स्कूल के प्रिंसिपल हैं। दोपहर में लंच हुआ था। नौवीं की छात्रा नीतू एक टीचर से उस समय बाथरूम जाने की बात कह स्कूल के तीसरी मंजिल पर गई। कुछ देर बाद स्कूल की पीछे वाली सड़क पर उसे लोगों ने बेहोशी की हालत में देखा और स्कूल प्रशासन को जानकारी दी। खून से लथपथ छात्रा को स्कूल के लोग जिला अस्पताल ले गए। वहां पर खेलते वक्त गिरकर घायल होने की वजह डॉक्टर को बताई। छत से गिरने की सच्चाई शुरू से स्कूल प्रशासन छिपाता रहा। इससे कई सवाल उठ रहा है। लाश लेकर रास्ते से लौट रहे घरवालों को स्कूल प्रशासन ने रोका और मैनेज करने के लिए दबाव बनाया, लेकिन नीतू के पिता परमहंस चौहान स्कूल प्रशासन की एक नहीं सुनीं और पुलिस को फोनकर शिकायत की। सहेली की मौत की जानकारी हुई तो क्लास की छात्राएं उसके घर पहुंचीं। बरामदे में सफेद कपड़े से ढके शव को देखकर बिलखते हुए चली गईं। शुरू से घटना की हकीकत बताने के बजाए स्कूल प्रशासन झूठ बोल रहा था। घटना के बाद शाम को कोतवाल नीतिश श्रीवास्तव सिविल ड्रेस में सिपाहियों के साथ स्कूल पर पहुंचे। स्कूल कर्मचारियों से घटना के बारे में जानकारी ली और छत पर जाकर मुआयना किया।
घर और स्कूल की चहेती थी नीतू
पिता परमहंस एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। उनकी दो बेटियां और तीन बेटे हैं। बड़ी बेटी निधि बीए तृतीय वर्ष में पढ़ती है। दूसरी बेटी नीतू नौ की छात्रा थी। बेटा राजेश, आकाश और छोटा बेटा आदित्य है। पढ़ने में नीतू काफी होनहार थी। इसकी वजह से स्कूल में भी लोगों की चहेती थी। सुबह हंसती खेलती रोज की तरह स्कूल गई थी, लेकिन घर पर उसकी लाश आई। उसकी मौत से पूरा परिवार सन्न रह गया है। मां दुर्गा देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। छोटा बेटा आदित्य मां को सांत्वना देते हुए चुप करा रहा था।
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देवरिया। गुरुग्राम में हुए हादसे के बावजूद निजी स्कूल संचालक सुरक्षा के संदर्भ में कोई सीख नहीं ले रहे हैं। प्रशासन भी इसको लेकर गंभीर नहीं है। इस लापरवाही का नतीजा रहा कि सोमवार को नीतू चौहान को भी जान गंवानी पड़ी। दरवाजे पर पहुंची पुलिस से पिता ने बेटी की मौत का इंसाफ मांगा। दरवाजे पर पहुंची सहेलियों ने जब नीतू का ढका हुआ लाश देखी तो रोते हुए चलीं गईं।
नेहरू नगर में आद्या प्रसाद तिवारी स्कूल के प्रिंसिपल हैं। दोपहर में लंच हुआ था। नौवीं की छात्रा नीतू एक टीचर से उस समय बाथरूम जाने की बात कह स्कूल के तीसरी मंजिल पर गई। कुछ देर बाद स्कूल की पीछे वाली सड़क पर उसे लोगों ने बेहोशी की हालत में देखा और स्कूल प्रशासन को जानकारी दी। खून से लथपथ छात्रा को स्कूल के लोग जिला अस्पताल ले गए। वहां पर खेलते वक्त गिरकर घायल होने की वजह डॉक्टर को बताई। छत से गिरने की सच्चाई शुरू से स्कूल प्रशासन छिपाता रहा। इससे कई सवाल उठ रहा है। लाश लेकर रास्ते से लौट रहे घरवालों को स्कूल प्रशासन ने रोका और मैनेज करने के लिए दबाव बनाया, लेकिन नीतू के पिता परमहंस चौहान स्कूल प्रशासन की एक नहीं सुनीं और पुलिस को फोनकर शिकायत की। सहेली की मौत की जानकारी हुई तो क्लास की छात्राएं उसके घर पहुंचीं। बरामदे में सफेद कपड़े से ढके शव को देखकर बिलखते हुए चली गईं। शुरू से घटना की हकीकत बताने के बजाए स्कूल प्रशासन झूठ बोल रहा था। घटना के बाद शाम को कोतवाल नीतिश श्रीवास्तव सिविल ड्रेस में सिपाहियों के साथ स्कूल पर पहुंचे। स्कूल कर्मचारियों से घटना के बारे में जानकारी ली और छत पर जाकर मुआयना किया।
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घर और स्कूल की चहेती थी नीतू
पिता परमहंस एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। उनकी दो बेटियां और तीन बेटे हैं। बड़ी बेटी निधि बीए तृतीय वर्ष में पढ़ती है। दूसरी बेटी नीतू नौ की छात्रा थी। बेटा राजेश, आकाश और छोटा बेटा आदित्य है। पढ़ने में नीतू काफी होनहार थी। इसकी वजह से स्कूल में भी लोगों की चहेती थी। सुबह हंसती खेलती रोज की तरह स्कूल गई थी, लेकिन घर पर उसकी लाश आई। उसकी मौत से पूरा परिवार सन्न रह गया है। मां दुर्गा देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। छोटा बेटा आदित्य मां को सांत्वना देते हुए चुप करा रहा था।
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