फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   पुलिस जागती तो नहीं जाती अशोक की जान

पुलिस जागती तो नहीं जाती अशोक की जान

Mon, 12 Nov 2018 10:46 PM IST
Updated Mon, 12 Nov 2018 10:46 PM IST
विज्ञापन
पुलिस जागती तो नहीं जाती अशोक की जान
लार के दोगारी मिश्र में अशोक मिश्रा की हत्या के बाद रोते परिजन - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन


शव को पुलिस को सौंपने से इंकार करते रहे परिजन, समझाने पर बनी बात
अमर उजाला ब्यूरो
लार। थानाक्षेत्र के दोगारी मिश्र गांव में एलआईसी एजेंट अशोक मिश्र की हत्या में परिजन पुलिस को भी जिम्मेदार मान रहे हैं। पिता के मौत पर विलाप करती बेटी अमृता चीख-चीख कर कह रही थी कि अगर पुलिस ने भूमि विवाद को गंभीरता से लेते हुए सक्रियता दिखाई होती तो पिता की जान नहीं जाती। उधर, घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। उसे तहरीर मिलने का इंतजार है। परिजनों का कहना है कि कश्मीर में कार्यरत बड़े पिता के लौटने पर ही वह तहरीर देंगे। थानाक्षेत्र के दोगारी मिश्र गांव निवासी अशोक मिश्र एलआईसी एजेंट थे। उनका अपने पट्टीदारों से डीह की एक कट्ठे जमीन को लेकर विवाद था। रविवार की देर शाम वह गांव के पश्चिम तरफ खेत की पंपिंग सेट से सिंचाई कर रहे थे। आरोप है कि तभी दूसरे पक्ष के लोग वहां पहुंचे और लाठी-डंडे से पीटकर अशोक की हत्या कर दी। रात करीब नौ बजे बेटा कार्तिकेय मिश्र पिता को ढूंढते हुए खेत में पहुंचा तो उन्हें अचेत देखकर शोर मचाने लगा। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस शव को अपने कब्जे में लेना चाह रही थी, लेकिन नाराज परिजनों ने शव देने से इन्कार कर दिया। घंटों बहस के बाद देर रात परिजन शव लेकर घर चले गए। सोमवार की सुबह मृतक के घर पहुंचे एसओ राजेश सिंह ने काफी समझाया, तब जाकर परिजनों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को सौंपा। तनाव को देखते हुए लार थाने की पुलिस पूरी रात गांव में जमी रही। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। पिता की मौत पर विलाप करती बेटी अमृता मिश्र बार-बार पुलिस की निष्क्रियता आरोप लगाती रही। उसका कहना था कि जमीन के विवाद को लेकर पिता कई बार थाने में गुहार लगा चुके थे, लेकिन पुलिस अनसुना करती रही। पत्नी अभिरंजन रोते-रोते गश खाकर गिर रही थी। बेटी काजल, विभा, कार्तिकेय, भारतेंदु का भी रो-रोकर बुरा हाल है। लोग उन्हें संभालने में जुटे रहे। इस बाबत एसओ राजेश कुमार का कहना था कि उनके कार्यकाल में विवाद थाने पर नहीं आया था। परिजनों की तहरीर का इंतजार है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

चार वर्षों से चल रहा था विवाद
अशोक के घर के बगल में डीह की जमीन है। उसी जमीन के लिए पट्टीदार श्रवण मिश्र से विवाद चल रहा था। इसे लेकर कई बार गांव स्तर पर दोनों पक्षों के बीच पंचायत हुई, मगर बात नहीं बन सकी। इसी विवाद में अशोक पर दो बार श्रवण ने जानलेवा हमला किया था।
विज्ञापन


तीन भाइयों में सबसे छोटे थे अशोक
अशोक तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। वह घर पर ही रह कर खेती व एलआईसी में एजेंट का काम करते थे। भाई शंभू की मौत तीन साल पूर्व सड़क दुर्घटना में हो गई। दूसरे भाई राधेश्याम कश्मीर में एक प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं। अशोक के पिता नथुनी मिश्र बेटे की मौत से काफी टूट गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed