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न नियमों की चिंता थी और न कार्रवाई का भय

Fri, 17 Aug 2018 10:49 PM IST
Updated Fri, 17 Aug 2018 10:49 PM IST
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न नियमों की चिंता थी और न कार्रवाई का भय
न नियमों की चिंता, न कार्रवाई का भय
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प्वाइंटर
अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने जांच में पाईं कई खामियां
मनमाने ढंग से संस्था चला रही थी गिरिजा और कंचनलता
मानव तस्करी की आशंका से भी नहीं किया है इन्कार

अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। मान्यता खत्म होने के बाद भी बालगृह बालिका, नारी संरक्षण केंद्र सहित अन्य संस्थाओं का संचालन कर रही गिरिजा त्रिपाठी को न तो नियमों की चिंता थी और न ही किसी कार्रवाई का भय। ऊंची पहुंच और अफसरों से नजदीकियों का ही असर था कि वह निरीक्षण पर आने वालों को भी तवज्जो नहीं देती थी। संस्था का संचालन मनमाने ढंग से किया जा रहा था। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने शासन को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में खुद इसका उल्लेख किया है। रिपोर्ट में उन्होंने मानव तस्करी की आशंका से भी इन्कार नहीं किया है।
पांच अगस्त को बालगृह बालिका कांड उजागर के होने के बाद शासन ने अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और एडीजी अंजू गुप्ता की दो सदस्यीय कमेटी को जांच के लिए भेजा था। टीम ने विभिन्न बिंदुओं पर पड़ताल के बाद शासन को अपनी रिपोर्ट दी है। इसमें संस्था में चल रही मनमानी और नियमों की अनदेखी का जिक्र किया गया है। अपने प्रभाव और दबंगई के बल पर गैरकानूनी ढंग से संस्थाओं के संचालन की भी बात कही गई है। रिपोर्ट में रेणुका कुमार ने स्पष्ट लिखा है कि संस्थाध्यक्ष व अधीक्षिका अफसरों को धमकाती भी थी। निरीक्षण के वक्त न कागजात दिखाती और न ही सवालों के जवाब देती थी।
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23 जून 2017 को मान्यता स्थगित किए जाने के बाद बच्चों को अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए कई पत्र लिखे गए, मगर सभी को नजरअंदाज किया जाता रहा। 12 जुलाई, 2018 को डीएम के निर्देश पर डीपीओ के नेतृत्व में गठित समिति बालगृह बालिका का निरीक्षण करने पहुंची तो मौजूद अधीक्षिका ने कोई भी रिकॉर्ड दिखाने इन्कार कर दिया। मौके पर मदनपुर थाने की दो महिला आरक्षी मिलीं, जो अलग-अलग दो लड़कियों के मेडिकल परीक्षण व कोर्ट में बयान के लिए एसआई के निर्देश पर वहां पहुंची थीं। जांच टीम ने जब संस्था में नियम विरुद्ध ढंग से संस्था में बच्चों को रखने के बारे में पूछताछ की तो अधीक्षिका ने कहा कि वह चाहे केस दर्ज कराएं या संस्था को बंद करा दें। वह बच्चों को रखती रहेगी। निरीक्षण में संस्था में जेजे एक्ट का उल्लंघन करते हुए गतिविधियां संचालित पाई गई। बच्चों के हित में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी नहीं संचालित था और न ही आवासीय भवन मानक के अनुकूल था।
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सीडब्ल्यूसी ने बरती घोर लापरवाही
रेणुका कुमार के नेतृत्व वाली जांच समिति ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की ओर से घोर लापरवाही बरते जाने की पुष्टि की है। कहा है कि सीडब्ल्यूसी को यह भली-भांति पता था कि संस्था की मान्यता स्थगित होने के बाद भी आसपास के जिलों की सीडब्ल्यूसी और जिले की पुलिस बच्चों-लड़कियों को यहां रख रही है। इसके बावजूद सीडब्ल्यूसी ने न कोई मॉनिटरिंग की और न ही कोई रिपोर्ट दी। सिर्फ कुछ पत्र लिखने की कोरमपूर्ति की गई।
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