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तेजी से बढ़ रहा जिले में साइबर ठगों का जाल

Fri, 26 Oct 2018 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया
ब्यूरो/अमर उजाला देवरिया Updated Fri, 26 Oct 2018 10:41 PM IST
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तेजी से बढ़ रहा जिले में साइबर ठगों का जाल
cyber crime
देवरिया। जिले में साइबर ठगों का जाल तेजी से पांव पसार रहा है। पिछले एक साल में पुलिस की साइबर सेल में साढ़े पांच सौ से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। इसमें 1.61 करोड़ से अधिक की ऑनलाइन खरीद का मामला भी शामिल है। तरह-तरह के प्रलोभन देकर फोन कॉल पर उपभोक्ताओं को अपने जाल में फंसाने वाले ठग चंद मिनटों में मेहनत की गाढ़ी कमाई को साफ कर दे रहे हैं। साइबर ठगों की बढ़ती सक्रियता आम जन के लिए मुसीबत बनती जा रही है तो पुलिस के लिए भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। हर तरीका अख्तियार करने के बावजूद पुलिस उनका नेटवर्क तोड़ने में नाकाम है।
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साइबर ठग कभी बैंक का नाम बताकर जानकारी ले रहे हैं तो कभी किसी कंपनी का इनाम देने के नाम पर गुप्त जानकारी हासिल कर रहे हैं। महत्वपूर्ण सूचनाएं मिलने के बाद वह अपना काम कर ले रहे हैं। दूर-दराज से संचालित हो रहे इस कार्य तक पुलिस को पहुंच पाना कठिन है। सबसे अधिक मामले ऑनलाइन खरीदारी के हो रहे हैं। हाल के दिनों में हुई घटनाएं पुलिस के जागरुकता अभियान की भी पोल खोल रही हैं। हालांकि इसके बाद भी पुलिस सिर्फ सतर्क रहने की दलील दे रही है।
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केबीसी के नाम पर छात्रा से उड़ाए 25 हजार रुपये
नगर पालिका परिषद बरहज के टीचर कॉलोनी की रहने वाली एमकॉम की एक छात्रा के पास कुछ दिन पहले साइबर ठगों ने फोन कर बताया कि वे केबीसी से बोल रहे हैं। उसका इसमें चयन हुुआ है। कुछ जानकारी देकर वह लाखों रुपये का इनाम जीत सकती है। छात्रा उनके झांसे में आ गई और पूर्वांचल बैंक के अकाउंट से संबंधित गुप्त जानकारी दे दी। कुछ देर बाद उसके खाते से 25 हजार रुपये कट गए। ठगी का शिकार होने के बाद छात्रा ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। वहीं, गौरीबाजार इलाके की रहने वाली एक महिला भी इसी तरह के झांसे में आकर रुपये गंवा चुकी है। उसे एक कंपनी के नाम पर इनाम देने की बात कह ठगी का शिकार बनाया गया।
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साइबर सेल ने अब तक 28 ठग पकड़े
साइबर सेल ने दो साल में ठगी करने वाले 28 लोगों को पकड़ा है। इसमें से कुछ ही देवरिया के रहने वाले हैं। बाकी बिहार, झारखंड और बंगलुरू के रहने वाले हैं। साइबर सेल में तैनात पुलिसकर्मियों ने मुखबिरों का जाल और सर्विलांस के जरिए इनकी गिरफ्तारी की। गिरफ्तार जालसाजों ने बताया था कि खातों की जानकारी लेने के बाद ऑनलाइन खरीदारी करते हैं। सामान लेकर कम दाम पर बेंचकर रुपये बना लेते हैं। बिहार के गोपालगंज जिले के तीन लोगों को वाराणसी से सामान की डिलीवरी लेते पकड़ा गया था।


1.61 करोड़ की हुई ऑनलाइन खरीदारी
साइबर सेल के पास एक साल में 500 से अधिक मामले आए हैं। इन लोगों के खातों से 1.61 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी हुई। साइबर सेल की टीम ने इसमें से 38 करोड़ रुपये वापस करा दिए हैं। बाकी रकम को वापस कराने के लिए साइबर सेल की टीम काम कर रही है।



साइबर ठगी से बचने के लिए एक्सर्ट की राय
- कार्ड नंबर, पिन, ओटीपी, सीवीवी नंबर किसी को न बताएं।
- डेट ऑफ बर्थ, मोबाइल नंबर को पिन न बनाएं। यह जटिल हो और मोबाइल में सुरक्षित न हो।
- कोई बैंक या बीमा कंपनी के नाम पर फोन कर पूरा ब्योरा भी बताएं तो भी कोई जानकारी न दें।
- एटीएम के अंदर विशेष सावधारी बरतें। एक समय में एक ही लोग अंदर रहें।
- एटीएम कार्ड का पिन कोड 15 दिन पर जरूर बदलें।
- एसएमएस अलर्ट कराकर मैसेज बॉक्स में आने वाले हर मैसेज को जरूर पढ़ें।
- ऑनलाइन पेमेंट कर रहे हैं तो बैंक की अधिकृत वेबसाइट पर ही लॉगिन करें।
- बैंक के नाम से मिलते-जुटते नाम की भरमार है। सिक्योर्ड वेबसाइट का लिंक जरूर देख लें।
- ऑनलाइन पेमेंट करने के बाद लॉग आउट करना न भूलें।

थोड़ी सी सावधानी बरत कर साइबर ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है। जरूरी यह है कि अपने खाता से संबंधित गुप्त जानकारी, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड की जानकारी किसी को न दें। सावधानी ही साइबर ठगी से बचने का उपाय है। - आलोक सोनी, प्रभारी साइबर सेल।
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