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घाघरा नदी में डूबने से युवक की मौत
Updated Tue, 05 Jun 2018 11:25 PM IST
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बरहज के जयनगर-मईलौटा के सरयू नदी में डूबे किशन चौहान के बैठे परिजन
- फोटो : अमर उजाला
बरहज। नगर स्थित घाघरा नदी में डूबने से एक युवक की मौत हो गई। वह अपने साथियों के साथ नदी में नहा रहा था। इसी बीच वह गहरे पानी में चला गया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से घंटों के जद्दोजहद के बाद शव बरामद किया।
जयनगर के मइलौटा गांव निवासी फूलचंद चौहान के तीसरे नंबर का बेटे किशन सोमवार को नदी पार नानी के गांव दसरसरिया देवार गया था। परिजनों का कहना है कि वह वापस गांव आ रहा था। इसी बीच रास्ते में पलिया गांव के तीन अन्य साथी मिल गये सभी नदी में नहाने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो दो दिनों में जलस्तर में काफी बढ़ा है। नहाने के दौरान सभी साथी पानी में बहने लगे। जिसे देख मछुआरों ने तीन को किसी तरह बचा लिया। लेकिन किशन चौहान नदी में डूूब गया। काफी तलाश के करीब तीन घंटे बाद लगे पीपा पुल के 50 मीटर पूरब उसका शव फंसा मिला। उसका शव देख घरवालों में कोहराम मच गया। मां चानमती बेहोश हो जा रही थीं। किशन चौहान दिल्ली में मैकेनिक था। वह बाइक आदि बनाने का काम करता था। जो तीन दिन पूर्व गांव आया था। उसे क्या पता था कि यह सफर उसके जीवन का आखिरी सफर होगा। फूलचंद चौहान जो मजदूरी कर किसी तरह परिवार का गुजर-बसर करता है। उसके आठ संतानों में तीसरे नम्बर का परिवारी की मुफलिसी देख किशन पढ़ाई छोड़कर दिल्ली चला गया। बताया जाता है कि वह वहां गैराज में काम सीखकर खुद की दुकान खोल लिया था।
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जयनगर के मइलौटा गांव निवासी फूलचंद चौहान के तीसरे नंबर का बेटे किशन सोमवार को नदी पार नानी के गांव दसरसरिया देवार गया था। परिजनों का कहना है कि वह वापस गांव आ रहा था। इसी बीच रास्ते में पलिया गांव के तीन अन्य साथी मिल गये सभी नदी में नहाने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो दो दिनों में जलस्तर में काफी बढ़ा है। नहाने के दौरान सभी साथी पानी में बहने लगे। जिसे देख मछुआरों ने तीन को किसी तरह बचा लिया। लेकिन किशन चौहान नदी में डूूब गया। काफी तलाश के करीब तीन घंटे बाद लगे पीपा पुल के 50 मीटर पूरब उसका शव फंसा मिला। उसका शव देख घरवालों में कोहराम मच गया। मां चानमती बेहोश हो जा रही थीं। किशन चौहान दिल्ली में मैकेनिक था। वह बाइक आदि बनाने का काम करता था। जो तीन दिन पूर्व गांव आया था। उसे क्या पता था कि यह सफर उसके जीवन का आखिरी सफर होगा। फूलचंद चौहान जो मजदूरी कर किसी तरह परिवार का गुजर-बसर करता है। उसके आठ संतानों में तीसरे नम्बर का परिवारी की मुफलिसी देख किशन पढ़ाई छोड़कर दिल्ली चला गया। बताया जाता है कि वह वहां गैराज में काम सीखकर खुद की दुकान खोल लिया था।
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