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पीडब्लूडी की जमीन से हटाया गया कब्जा
Updated Mon, 19 Nov 2018 10:47 PM IST
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डीएम आवास के पीछे पीडब्लूडी की जमीन से प्रशासन ने अतिक्रमण हटवाया ।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। बसपा सरकार में अफसरों की उदासीनता से डीएम आवास के पीछे पीडब्लूडी के करीब तीन बीघे जमीन पर लोगों का कब्जा हो गया। राजनीतिक दखलंदाजी के कारण प्रशासन चाह कर भी अतिक्रमण खाली नहीं करा पा रहा था और लोग अपना आशियाना बना लिए थे। सोमवार को पूरी तैयारी के साथ प्रशासन ने अतिक्रमण खाली कराया गया।
अल सुबह डीएम आवास के पीछे अतिक्रमण स्थल पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। इसमें रहने वाले लोगों की आंख खुली तो झोपड़ पट्टी पुलिस से घिरी हुई थी। अभी अतिक्रमणकारी कुछ समझ पाते कि जेसीबी से प्रशासन अतिक्रमण खाली कराना शुरू कर दिया। उधर से आने-जाने वाले लोगों को बैरिकेडिंग कर रोक दिया गया। प्रशासन का तेवर देखकर अतिक्रमणकारी अपनी झोपड़ियों और पक्के मकानों से सामान सुरक्षित करने करने लगे। मौके पर डीएम और एसपी भी मुस्तैद रहे। अतिक्रमण खाली करने की खबर मिलते ही एपवा नेता गीता पांडेय पहुंची और इसका विरोध करने लगीं। हरकत में आई पुलिस ने एपवा नेता को हिरासत में लेकर कोतवाली भेज दिया। इस दौरान एसडीएम रामकेश यादव, पीडब्लूडी प्रांतीय खंड एक्सईएन डीके चौधरी, सीओ सिटी वरुण मिश्र, कोतवाल विजय नारायण प्रसाद और पीएसी बल तैनात रहे।
दो एकड़ से अधिक जमीन पीडब्लूडी के नाम से जमीन थी। इस पर अवैध तरीके से करीब 60 लोगों का कब्जा था। नोटिस देने के बावजूद नहीं खाली कर रहे थे। इस जमीन से अतिक्रमण खाली कराया गया है। इससे बचाव के लिए कुछ लोग खुद अपनी खाली झोपड़ी में आग लगा दी, लेकिन तत्काल आग पर काबू पा लिया गया।
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- अमित किशोर डीएम
नहीं ली गई होतीं गीता हिरासत में तो बढ़ता बवाल
गीता पांडेय के पहुंचते ही वहां का माहौल गरमा गया। झोपड़पट्टी की सभी महिलाएं व बच्चे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध करने लगे। मामला बढ़ता देख डीएम सक्रिय हुए और पुलिस ने एपवा नेता को हिरासत में लेने को कहा। पूर्व में भी एपवा नेता के विरोध की वजह से अतिक्रमण खाली नहीं हो रहा था। गौरतलब है कि सरकारी जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराना प्रशासन के लिए चुनौती था। लेकिन गोपनीय तरीके से प्रशासन की ओर से बनाए गया प्लान सोमवार को सफल रहा। अगर जरा सी चूक हुई होती तो यह बड़ा बवाल का रूप ले सकता था। अधिकारियों और सफाईकर्मियों को जरूरी मीटिंग की बात कह सुबह बुलाया गया था। इसकी जानकारी किसी को नहीं थी।
अचानक झोपड़ियों में लगी आग
अतिक्रमण खाली करने के दौरान अचानक एक झोपड़ी से आग की लपटे निकलने लगी। यह देख अफसर घबरा गए। लेेकिन वहां मौजूद फायर सर्विस के कर्मचारियों ने आग पर काबू पा लिया। तीन झोपड़ियों में संदिग्ध हालत में आग लग गई थी।
सभी झोपड़ियों में थे बिजली कनेक्शन
अवैध तरीके से बनाए गए घरों में बिजली का कनेक्शन भी थे। अतिक्रमण खाली कराने के दौरान बिजली की आपूर्ति बंद करानी पड़ी। इस कारण आसपास के मोहल्लों की आपूर्ति पांच घंटे तक ठप रही। शाम तक अफसर और पुलिस मौके पर जमी रही। कटीले तार से इस जमीन को प्रशासन ने घेराबंदी करा दी।
पांच घंटे प्रयास के बाद ध्वस्त हुए मकान
कई थानों की पुलिस के अलावा चार जेसीबी मशीन और चार ट्रैक्टर को लगाया था। डीएम के अलावा सदर एसडीएम एक्शन में दिखे। इस झोपड़ी में निवास करने वाले कई युवक आपराधिक किस्म के थे। पूर्व में पुलिस ने यहां से गिरफ्तार कर जेल भेज चुके हैं। जुआ खेलने और अवैध रूप से शराब बिक्री भी यहां पर की जाती थी। पांच घंटे के प्रयास के बाद मकान और झोपड़ी ध्वस्त हुए।
भाजपा नेता का भी था कब्जा
एक भाजपा नेता का भी पीडब्लूडी की जमीन पर कब्जा था। इसमें फोटोकॉपी की दुकान भी चल रही थी। अतिक्रमण खाली होने के दौरान वह अफसरों के पास पहुंचे और अपना भाजपा नेता रूप में परिचय दिए। लेकिन अफसरों ने इनकी एक नहीं सुनी और इनका भी अतिक्रमण खाली कराया।
अतिक्रमणकारियों का टूटा भ्रम
लंबे अर्से से झोपड़ी और मकान बनाकर अवैध रूप से रहने वाले अपना आशियाना उजड़ता देखकर रोने लगे। सड़क किनारे घरेलू सामानों को रखकर बच्चे, बूढे़ और महिलाएं उजड़ते हुए घरों को देख रहे थे। यह देखकर लोग भावुक दिखे। लेकिन अवैध कब्जा होने के कारण किसी ने इनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। हालांकि प्रशासन का दावा है कि इसमें रहने वाले करीब 60 परिवार के लोगों का कांशीराम आवासीय योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया है। अतिक्रमण हटाने से पूर्व कई बार इन लोगों को नोटिस दिया गया था। बावजूद नहीं खाली कर रहे थे।
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अल सुबह डीएम आवास के पीछे अतिक्रमण स्थल पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। इसमें रहने वाले लोगों की आंख खुली तो झोपड़ पट्टी पुलिस से घिरी हुई थी। अभी अतिक्रमणकारी कुछ समझ पाते कि जेसीबी से प्रशासन अतिक्रमण खाली कराना शुरू कर दिया। उधर से आने-जाने वाले लोगों को बैरिकेडिंग कर रोक दिया गया। प्रशासन का तेवर देखकर अतिक्रमणकारी अपनी झोपड़ियों और पक्के मकानों से सामान सुरक्षित करने करने लगे। मौके पर डीएम और एसपी भी मुस्तैद रहे। अतिक्रमण खाली करने की खबर मिलते ही एपवा नेता गीता पांडेय पहुंची और इसका विरोध करने लगीं। हरकत में आई पुलिस ने एपवा नेता को हिरासत में लेकर कोतवाली भेज दिया। इस दौरान एसडीएम रामकेश यादव, पीडब्लूडी प्रांतीय खंड एक्सईएन डीके चौधरी, सीओ सिटी वरुण मिश्र, कोतवाल विजय नारायण प्रसाद और पीएसी बल तैनात रहे।
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दो एकड़ से अधिक जमीन पीडब्लूडी के नाम से जमीन थी। इस पर अवैध तरीके से करीब 60 लोगों का कब्जा था। नोटिस देने के बावजूद नहीं खाली कर रहे थे। इस जमीन से अतिक्रमण खाली कराया गया है। इससे बचाव के लिए कुछ लोग खुद अपनी खाली झोपड़ी में आग लगा दी, लेकिन तत्काल आग पर काबू पा लिया गया।
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- अमित किशोर डीएम
नहीं ली गई होतीं गीता हिरासत में तो बढ़ता बवाल
गीता पांडेय के पहुंचते ही वहां का माहौल गरमा गया। झोपड़पट्टी की सभी महिलाएं व बच्चे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध करने लगे। मामला बढ़ता देख डीएम सक्रिय हुए और पुलिस ने एपवा नेता को हिरासत में लेने को कहा। पूर्व में भी एपवा नेता के विरोध की वजह से अतिक्रमण खाली नहीं हो रहा था। गौरतलब है कि सरकारी जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराना प्रशासन के लिए चुनौती था। लेकिन गोपनीय तरीके से प्रशासन की ओर से बनाए गया प्लान सोमवार को सफल रहा। अगर जरा सी चूक हुई होती तो यह बड़ा बवाल का रूप ले सकता था। अधिकारियों और सफाईकर्मियों को जरूरी मीटिंग की बात कह सुबह बुलाया गया था। इसकी जानकारी किसी को नहीं थी।
अचानक झोपड़ियों में लगी आग
अतिक्रमण खाली करने के दौरान अचानक एक झोपड़ी से आग की लपटे निकलने लगी। यह देख अफसर घबरा गए। लेेकिन वहां मौजूद फायर सर्विस के कर्मचारियों ने आग पर काबू पा लिया। तीन झोपड़ियों में संदिग्ध हालत में आग लग गई थी।
सभी झोपड़ियों में थे बिजली कनेक्शन
अवैध तरीके से बनाए गए घरों में बिजली का कनेक्शन भी थे। अतिक्रमण खाली कराने के दौरान बिजली की आपूर्ति बंद करानी पड़ी। इस कारण आसपास के मोहल्लों की आपूर्ति पांच घंटे तक ठप रही। शाम तक अफसर और पुलिस मौके पर जमी रही। कटीले तार से इस जमीन को प्रशासन ने घेराबंदी करा दी।
पांच घंटे प्रयास के बाद ध्वस्त हुए मकान
कई थानों की पुलिस के अलावा चार जेसीबी मशीन और चार ट्रैक्टर को लगाया था। डीएम के अलावा सदर एसडीएम एक्शन में दिखे। इस झोपड़ी में निवास करने वाले कई युवक आपराधिक किस्म के थे। पूर्व में पुलिस ने यहां से गिरफ्तार कर जेल भेज चुके हैं। जुआ खेलने और अवैध रूप से शराब बिक्री भी यहां पर की जाती थी। पांच घंटे के प्रयास के बाद मकान और झोपड़ी ध्वस्त हुए।
भाजपा नेता का भी था कब्जा
एक भाजपा नेता का भी पीडब्लूडी की जमीन पर कब्जा था। इसमें फोटोकॉपी की दुकान भी चल रही थी। अतिक्रमण खाली होने के दौरान वह अफसरों के पास पहुंचे और अपना भाजपा नेता रूप में परिचय दिए। लेकिन अफसरों ने इनकी एक नहीं सुनी और इनका भी अतिक्रमण खाली कराया।
अतिक्रमणकारियों का टूटा भ्रम
लंबे अर्से से झोपड़ी और मकान बनाकर अवैध रूप से रहने वाले अपना आशियाना उजड़ता देखकर रोने लगे। सड़क किनारे घरेलू सामानों को रखकर बच्चे, बूढे़ और महिलाएं उजड़ते हुए घरों को देख रहे थे। यह देखकर लोग भावुक दिखे। लेकिन अवैध कब्जा होने के कारण किसी ने इनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। हालांकि प्रशासन का दावा है कि इसमें रहने वाले करीब 60 परिवार के लोगों का कांशीराम आवासीय योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया है। अतिक्रमण हटाने से पूर्व कई बार इन लोगों को नोटिस दिया गया था। बावजूद नहीं खाली कर रहे थे।