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लाइसेंस मिल गया, दुकान रखने को नहीं पदी जगह
Updated Tue, 06 Nov 2018 10:17 PM IST
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दुकान पर पटाखें देखते बच्चें
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। पटाखा की दुकान का लाइसेंस बनवाने के बाद भी विद्यालय के प्रबंधक ने दुकान नहीं रखने दिया। पीड़ित दुकानदार मंगलवार को सदर कोतवाल से शिकायत किए। सदर कोतवाल ने कॉलेज के प्रधानाचार्य से ही बात करने की सलाह दिया। निराश होकर दुकान रखने वाले लोग लौट गए।
सदर कोतवाली क्षेत्र के सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज में पटाखे की दुकान खोलने के लिए लाइसेंस दिया गया है। मंगलवार को लाइसेंसी सूरज गुप्त, बृजेश गुप्त, रामजी, दिलीप, सन्नी, हरेराम, प्रमोद समेत तमाम दुकानदार कॉलेज में पहुंचे तो प्रधानाचार्य ने दुकान रखने से मना कर दिया। उनका कहना था कि विद्यालय की जमीन में पटाखे की बिक्री नहीं होगी। लाइसेंसी दुकानदार निराश होकर सदर कोतवाल विजय नारायण के पास पहुंचे और अपनी पीड़ा सुनाई। सदर कोतवाल विजय नारायण प्रसाद ने उनको बताया कि वह जाकर विद्यालय के प्रधानाचार्य से ही बात करें। वह इसमें क्या कर सकते हैं। दुकानदारों के लाख कहने के बाद भी कोतवाल ने कोई कार्रवाई करने से मना कर दिया। निराश होकर लौट रहे दुकानदारों ने बताया कि लाइसेंस बनवाने में काफी रुपये खर्च हुए हैं। दुकान नहीं रखने पर काफी नुकसान हुआ है। सदर कोतवाल विजय नारायण प्रसाद का कहना है कि इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य दुकान नहीं रखने दे रहे हैं तो उसमें क्या किया जा सकता है।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज में पटाखे की दुकान खोलने के लिए लाइसेंस दिया गया है। मंगलवार को लाइसेंसी सूरज गुप्त, बृजेश गुप्त, रामजी, दिलीप, सन्नी, हरेराम, प्रमोद समेत तमाम दुकानदार कॉलेज में पहुंचे तो प्रधानाचार्य ने दुकान रखने से मना कर दिया। उनका कहना था कि विद्यालय की जमीन में पटाखे की बिक्री नहीं होगी। लाइसेंसी दुकानदार निराश होकर सदर कोतवाल विजय नारायण के पास पहुंचे और अपनी पीड़ा सुनाई। सदर कोतवाल विजय नारायण प्रसाद ने उनको बताया कि वह जाकर विद्यालय के प्रधानाचार्य से ही बात करें। वह इसमें क्या कर सकते हैं। दुकानदारों के लाख कहने के बाद भी कोतवाल ने कोई कार्रवाई करने से मना कर दिया। निराश होकर लौट रहे दुकानदारों ने बताया कि लाइसेंस बनवाने में काफी रुपये खर्च हुए हैं। दुकान नहीं रखने पर काफी नुकसान हुआ है। सदर कोतवाल विजय नारायण प्रसाद का कहना है कि इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य दुकान नहीं रखने दे रहे हैं तो उसमें क्या किया जा सकता है।
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