फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   कारा की साइट पर आज भी मौजूद है मां विंध्यवासिनी संस्था का नाम

कारा की साइट पर आज भी मौजूद है मां विंध्यवासिनी संस्था का नाम

Mon, 13 Aug 2018 11:48 PM IST
Updated Mon, 13 Aug 2018 11:48 PM IST
विज्ञापन
कारा की साइट पर आज भी मौजूद है मां विंध्यवासिनी संस्था का नाम
इंटरनेट सेवा - फोटो : ie
देवरिया। बालगृह बालिका कांड में फंसी जिस संस्था की मान्यता एक साल पहले स्थगित कर दी गई थी, वह ‘कारा’ की वेबसाइट पर अब भी मौजूद है। केंद्र सरकार की ‘चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स अथारिटी (कारा)’ की अधिकृत वेबसाइट पर स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी के रूप में मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान का नाम दूसरे नंबर पर है।
विज्ञापन

वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से यह भी दर्शाया गया है कि इस एडॉप्शन सेंटर में कुल सात बच्चे हैं, जिनमें चार एडॉप्टेबल (गोद लेने योग्य) हैं। बता दें कि बच्चों को गोद लेने की कोई भी प्रक्रिया ‘कारा’ के माध्यम से ही पूरी होती है। पिछले एक साल में ‘कारा’ ने ही इस संस्था के जरिए तीन बच्चों को फ्रांस और स्पेन भेजवाया है।
विज्ञापन

मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के अंतर्गत स्टेशन रोड पर चार केंद्रों का संचालन होता रहा। इनमें एक विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई भी शामिल है। 17 जुलाई, 2017 को महिला कल्याण निदेशालय की ओर से जारी पत्र संख्या 1047-51 में उल्लेख है कि सीबीआई जांच के लिए चिह्नित होने के कारण संस्था के अंतर्गत संचालित विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई की मान्यता स्थगित कर दी गई है। नियमानुसार मान्यता स्थगित होने के बाद ही इस संस्था का नाम ‘कारा’ की वेबसाइट से हट जाना चाहिए था, मगर एक साल बीतने के बाद भी संस्था का नाम ‘कारा’ की वेबसाइट पर मौजूद है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दरअसल, ‘कारा’ को इस बारे में न तो महिला कल्याण निदेशालय ने कोई सूचना दी और न ही स्टेट चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सारा) ने उन्हें अवगत कराया। लिहाजा बच्चों के एडॉप्शन का सिलसिला जारी रहा। यही नहीं कोर्ट के आदेश पर जब दो बहनों व एक अन्य बालक को फ्रांस और स्पेन भेजा गया, तब भी विधिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए कई बार शासन में पत्राचार हुआ। पुलिस-प्रशासन की निगरानी में मेडिकल हुआ। जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए और पासपोर्ट भी दे दिया गया। बावजूद किसी ने भी संस्था के अवैध होने पर मुंह नहीं खोला। इसी लापरवाही का आलम रहा कि तीनों बच्चे आसानी से विदेश भेज दिए गए। ऐसा क्यों और किन परिस्थितियों में हुआ, इस पर जिम्मेदार अब भी चुप्पी साधे हुए हैं। पूरे मामले में कुछ बड़े अफसरों की संलिप्तता भी जाहिर हो रही है।

------------
कोट
देवरिया के बालगृह बालिका का मामला अब संज्ञान में आया है। फिलहाल ‘कारा’ अपने स्तर से इसकी जांच करा रही है। पूरी पड़ताल के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। किसी भी स्तर पर चूक हुई होगी तो कार्रवाई भी तय है।
- डॉ. डीडी पांडेय, संयुक्त निदेशक, चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी, दिल्ली।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed