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कहीं बीमा के पीछे तो नहीं जा रही पशुओं की जान

Sat, 03 Oct 2020 11:08 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2020 11:08 PM IST
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cow death matter in cow shed salempur
कहीं बीमा के पीछे तो नहीं जा रही पशुओं की जान
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सलेमपुर (सलेमपुर)। नगर के हरैंया पश्चिमी वार्ड में स्थित गोशाला में पशुओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक सप्ताह के अंदर पांच पशुओं की जान जा चुकी है। शनिवार को भी एक पशु की मौत हो गई। लगातार हो रही पशुओं की मौत को लेकर लोगों में अनेक प्रकार की चर्चा है। चर्चा है कि कहीं पशुओं के बीमा से मिलने वाली धनराशि को लेकर पशुओं के साथ नगर प्रशासन की तरफ से लापरवाही तो नहीं बरती जा रही है। अगर जिला प्रशासन इसकी जांच कराएं तो तहसील क्षेत्र के कई गोशालाओं में ऐसी घटनाएं सामने आएंगी।
छुट्टा पशुओं की संरक्षण को लेकर सरकार गोशालाओं में पशुओं के रखरखाव का खर्च वहन कर रही है। नगर पंचायत की तरफ से हरैया पश्चिमी वार्ड स्थित गोशाला का निर्माण कराया गया है। जिसमें चारा-पानी के अभाव में पिछले रविवार को तीन पशुओं की मौत हो गई। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। अमर उजाला ने 28 सितंबर को इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उसी दिन मामले का संज्ञान लेते हुए सीडीओ ने प्रकरण की जांच मुख्य पशु चिकित्साधिकारी विकास साठे को सौंपी।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की जांच में लापरवाही सामने आने पर उसमें काम कर रहे दो कर्मचारियों को दौरे पर आए सीआरओ ने हटा दिया था। शनिवार को भी एक पशु ने गोशाला में दम तोड़ दिया। इसकी खबर मिलते ही नगर प्रशासन में खलबली मच गई। आनन-फानन में कर्मचारियों ने पशु के शव को नदी में प्रवाहित कर दिया। लगातार पशुओं की मौत को लेकर नगर के सभासद संजीव वर्मा, अशोक सिंह, रामदेनी प्रसाद, हंसनाथ कन्नौजिया, श्रीराम यादव आदि ने नगर पंचायत प्रशासन आरोप लगाते हुए मामले की जांच की सिफारिश की है। इन पशुओं की मौत के पीछे बीमा की धनराशि को भी लोग चर्चा का विषय बना रहे हैं। अब इसकी गुत्थी जांच में ही सुलझेगी। इस संबंध में सीआरओ अमृतलाल बिंद ने बताया कि गोशाला में पशुओं की मौत की जांच कराई जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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400 में होता है 40 हजार का बीमा
पशु चिकित्साधिकारी विकास साठे ने बताया कि दुधारू पशुओं का बीमा उनके दूध के हिसाब से किया जाता है। करीब चार सौ रुपये में 40 हजार का बीमा किया जाता है। बीमा की धनराशि निर्धारित करने के लिए पशुओं का सर्वे किया जाता है।
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