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इस STF सीओ को मिल चुका है दो बार राष्ट्रपति से सम्मान, 50 खूंखारों को कर चुकें है मुठभेड़ में ढेर

विनोद कुमार तिवारी, देवरिया। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 25 Feb 2020 09:58 AM IST
एसटीएफ गोरखपुर प्रभारी डीके शाही।
एसटीएफ गोरखपुर प्रभारी डीके शाही। - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर के एसटीएफ सीओ धर्मेश कुमार शाही (डीके शाही) के नेतृत्व में टीम ने बस्ती में डेढ़ लाख के इनामी बदमाश को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया है। इससे एक बार फिर चर्चा में डीके शाही का नाम आ गया है। वह लोगों के अमन-चैन में खलल डालने वाले तकरीबन 50 बदमाशों, आतंकवादियों, डकैतों को मुठभेड़ के दौरान ठिकाने लगा चुके हैं। इस वजह से जहां प्रदेश सरकार ने दो बार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया, वहीं, दो बार राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार से नवाजे गए।



देवरिया जिले के नौतन गांव के रहने वाले धर्मेश कुमार शाही (डीके शाही) ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए और लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की। वर्ष 2001 में पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर की नौकरी की शुरुआत की तो गोंडा जिले में तैनाती हुई। वहां से लखनऊ आए। पहली बार वर्ष 2004 में दो सिपाहियों की हत्या कर फरार चल रहे एक लाख के इनामी बदमाश देवेंद्र उर्फ सुल्तान को अमरोहा से गिरफ्तार कर चर्चा में आए।


वर्ष 2005 में जौनपुर के बदमाश राकेश प्रधान को हजरतगंज में सुभाष ठाकुर के गुर्गे धीरज सिंह, वर्ष 2006 में हरदोई के इनामी अपराधी चमन सिद्दीकी को लखनऊ में मार गिराया। इसके अलावा ग्वालियर के बदमाश सोनू, मोनू चौहान को लखनऊ में ठिकाने लगाया। वर्ष 2007 में बिहार, यूपी, मध्य प्रदेश में आतंक का पर्याय बने पुष्पराज यादव को गोरखपुर में, दो सिपाहियों की हत्या करने के आरोपी संतोष पांडेय को रायबरेली, वर्ष 2008 में संतकबीर नगर में रामधनी शर्मा, वर्ष 2010 में मुंबई में आजमगढ़ के इनामी दिलीप यादव को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया।

बटलर राय को महराजगंज में, रिंकू सिंह और योगेंद्र को बाराबंकी में मार गिराया। प्रदेश सरकार ने जनवरी वर्ष 2010 में डीके शाही को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया तो उनका उत्साह और बढ़ गया। इसके बाद कुशीनगर जंगल पार्टी के डकैत रूदल यादव को मुठभेड़ के दौरान कुशीनगर जिले में उस समय मार गिराया जब वह डकैती डालने कहीं जा रहा था।

18 वर्ष में दो बार मिला प्रमोशन

डीके शाही बतौर इंस्पेक्टर नोएडा, लखनऊ, उन्नाव में कार्य कर चुके हैं। इंस्पेक्टर बनने के बाद सिवान के सुनील शर्मा, सलीम गैंग के शूटर रुस्तम, नरेश भाटी, शमीम आदि बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान ठिकाने लगाए तो प्रदेश सरकार ने प्रमोशन का उन्हें दूसरा इनाम दिया।

वर्ष 2001 से नौकरी की शुरुआत करने वाले डीके शाही बीस वर्ष की नौकरी के दौरान 50 बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान मार गिराने का गौरव हासिल कर चुके हैं। वर्ष 2010 में सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर और वर्ष 2018 में इंस्पेक्टर से डिप्टी एसपी बनने का गौरव प्राप्त हुआ। सीओ बनने के बाद पहली तैनाती प्रतापगढ़ में हुई।

वहां से लखनऊ एसटीएफ में दो माह पहले स्थानांतरण होने के बाद एक माह पूर्व ही गोरखपुर एसटीएफ यूनिट के प्रभारी बनाए गए हैं। जहां उन्होंने बस्ती जिले के सुहेला गांव में बैंक लूटकांड के आरोपी फिरोज पठान को मुठभेड़ के दौरान सोमवार को ठिकाने लगाने के बाद अपना जज्बा फिर दिखाया है।

धर्मेश कुमार शाही, एसटीएफ गोरखपुर यूनिट प्रभारी ने कहा कि पुलिस की बीस वर्ष की नौकरी में अभी तक तकरीबन 50 बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान मार गिराए जाने और आतंकवादियों, शातिर बदमाशों की गिरफ्तारी की वजह से प्रदेश सरकार से दो बार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन एवं दो बार राष्ट्रपति का वीरता पदक पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
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