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Deoria News: जांच टीम के सवालों का जवाब नहीं दे पाए सीएमओ और बाबू

Thu, 23 Nov 2023 02:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 23 Nov 2023 02:13 AM IST
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CMO and Babu could not answer the questions of the investigation team
देवरिया। सीएमओ कार्यालय में भ्रष्टाचार की यह कोई पहली जांच नहीं हैं। इसके पूर्व भी कई गंभीर मामले सामने आए, लेकिन विभागीय गठजोड़ की वजह से जांच ठंडे बस्ते में चली गई और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुआ। लेकिन अचानक चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशालय से पहुंची टीम के सवालों में अफसर उलझते नजर आए। जांच के दौरान सभी के चेहरे उड़े रहे।
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सीएमओ कार्यालय में भ्रष्टाचार और लूट खसोट की शिकायत पूर्व में भी हुई थी। तत्कालीन डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह और सीडीओ रविंद्र कुमार के स्तर से जांच की गई। लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके अलावा भी कई लोगों ने उच्चाधिकारियों और शासन में शिकायत कर चुके हैं। शिकायतों पर जांच तो होती है, लेकिन आधी अधूरी जांच पूरी कर खानापूर्ति कर ली जाती है। तत्कालीन सीएमओ डॉ. आलोक कुमार पांडेय भी खूब मनमानी किए और आते समय जांच के घेरे में आ गए। उन पर भी चहेते ठेकेदारों को कागजों में हेराफेरी कर ठेका देने और सामानों की खरीदारी करने का आरोप लगा था। सीएमओ कार्यालय के सामने चाय की दुकान पर कुछ स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे और चाय की चुस्कियों के बीच हो रहे भ्रष्टाचार की जांच की चर्चा करते रहे।
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विधायक ने यह की है शिकायत

स्कूलों में सप्लाई के सेनेटरीनैपकिन खरीदने के लिए प्रत्येक साल स्टेट बजट स्वास्थ्य विभाग को मिलता है, लेकिन पांच साल से सेनेटरीनैपकिन की खरीदारी नहीं हुई है। बीच में टेंडर निकाला गया, लेकिन चहेते फर्म के छट जाने से टेंडर को निरस्त कर दिया गया। हेल्थ वेलनेस सेंटर पर तैनात सीएचएस को लाखों रुपये मैनुअल भुगतान कर दिया गया। इनकी ऑनलाइन हाजिर भी नहीं लगती है और प्रति दिन 15 मरीज से कम भी देखते हैं जो नियम विरूद्ध है। निर्माण, मरम्मत के लिए छह साल बाद टेंडर हुआ, जिसका पूर्व में ठेकेदार था, उसी ठेकेदार को कागजों में हेराफेरी कर दे दिया गया। एक ही फर्म को बार-बार उपकरणों की खरीदारी करने के लिए टेंडर दिया गया है। अस्पतालों में भोजन देने और सफाईकर्मियों के लिए तय समय बीतने के बाद टेंडर नहीं किया जा रहा है। कमीशन के चक्कर में एक ही फर्म को लाभ पहुंचाया जा रहा है। ऐसे 10 बिंदु शामिल हैं।
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...जब एसीएमओ लेकर पहुंचे भोजन
-जांच टीम जब सीएमओ से मीटिंग हॉल में पूछताछ कर रही थी तो एसीएमओ एक कर्मचारी के साथ स्कूटी से निकले। कुछ देर बाद भोजन का पैकेट लेकर सीएमओ कार्यालय पर पहुंचे। यह देख वहां मौजूद कर्मचारी और अन्य लोग दंग रह गए। आखिर सीएमओ कार्यालय में कई कर्मचारी हैं, लेकिन एसीएमओ क्यों भोजन लेकर आए हैं। चर्चा है कि जिस होटल में लखनऊ से जांच के लिए आई टीम रूकी थी। वहां पर एसीएमओ और एक बाबू मैनेज करने के लिए पहुंचे थे। लेकिन इनकी दाल नहीं गली।
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