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नियमित टीकाकरण में सीएचओ की होगी सक्रिय भागीदारी: सीएमओ
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सीएचओ को कार्यशाला में प्रशिक्षण देते सीएमओ डॉ राजेश झा।विज्ञप्ति
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कार्यशाला में सीएचओ को दिया गया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नियमित टीकाकरण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से शहर के स्टेशन रोड स्थित एक होटल में शनिवार को कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें भाटपाररानी, महेन, रुद्रपुर, पथरदेवा क्षेत्र स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण में बच्चों को बीमारियों से बचाने वाले टीकों के बारे में जानकारी दी गई।
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने कहा कि सीएचओ की स्वास्थ्य सेवाओं में भागीदारी बढ़ रही है। वह अब नियमित टीकाकरण एवं प्रिवेंटेबिल डिजीज में भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। इसके लिए दक्ष होना जरूरी है। इस तरह का प्रशिक्षण सीएचओ की क्षमता वृद्धि करेगा।
उन्होंने कहा कि पांच तरह की बीमारियों पर अध्ययन करना सभी सीएचओ के लिए जरूरी है। सीएचओ लकवा, खसरा, गलघोटू, काली खांसी और नवजात टिटनेस जैसी बीमारियों के बारे में बारीकी से जानकारी करें।
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एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह ने नियमित टीकाकरण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चा टीके से प्रतिरक्षित है तो उसे बीमारी जल्दी नहीं होगी। सही समय पर बच्चों का टीकाकरण कराना जरूरी है। अभी तक आशा और एएनएम के माध्यम से टीकाकरण किया जाता रहा है। अब सीएचओ की टीकाकरण में सहभागिता होगी। उन्होंने कहा कि जन्म से लेकर पांच साल उम्र तक सात बार नियमित टीकाकरण आवश्यक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एसएमओ डॉ. अंकुर सांगवांग ने गर्भावस्था से लेकर पांच साल तक के टीकाकरण के समय और अवधि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टीडी, हेपेटाइटिस बी, बीसीजी, पोलियो, पेंटा, रोटा, एफआईपीवी, पीसीवी, खसरा, विटामिन ए, डीपीटी जैसे टीके सरकारी अस्पतालों, एएनएम उपकेंद्रों पर लगाए जाते हैं।
इस दौरान अरबन के नोडल अधिकारी डॉ. आरपी यादव, यूनिसेफ के डीएमसी अरशद , एआरओ राकेश चंद, राजीव मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नियमित टीकाकरण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से शहर के स्टेशन रोड स्थित एक होटल में शनिवार को कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें भाटपाररानी, महेन, रुद्रपुर, पथरदेवा क्षेत्र स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण में बच्चों को बीमारियों से बचाने वाले टीकों के बारे में जानकारी दी गई।
सीएमओ डॉ. राजेश झा ने कहा कि सीएचओ की स्वास्थ्य सेवाओं में भागीदारी बढ़ रही है। वह अब नियमित टीकाकरण एवं प्रिवेंटेबिल डिजीज में भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। इसके लिए दक्ष होना जरूरी है। इस तरह का प्रशिक्षण सीएचओ की क्षमता वृद्धि करेगा।
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उन्होंने कहा कि पांच तरह की बीमारियों पर अध्ययन करना सभी सीएचओ के लिए जरूरी है। सीएचओ लकवा, खसरा, गलघोटू, काली खांसी और नवजात टिटनेस जैसी बीमारियों के बारे में बारीकी से जानकारी करें।
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एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह ने नियमित टीकाकरण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चा टीके से प्रतिरक्षित है तो उसे बीमारी जल्दी नहीं होगी। सही समय पर बच्चों का टीकाकरण कराना जरूरी है। अभी तक आशा और एएनएम के माध्यम से टीकाकरण किया जाता रहा है। अब सीएचओ की टीकाकरण में सहभागिता होगी। उन्होंने कहा कि जन्म से लेकर पांच साल उम्र तक सात बार नियमित टीकाकरण आवश्यक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एसएमओ डॉ. अंकुर सांगवांग ने गर्भावस्था से लेकर पांच साल तक के टीकाकरण के समय और अवधि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टीडी, हेपेटाइटिस बी, बीसीजी, पोलियो, पेंटा, रोटा, एफआईपीवी, पीसीवी, खसरा, विटामिन ए, डीपीटी जैसे टीके सरकारी अस्पतालों, एएनएम उपकेंद्रों पर लगाए जाते हैं।
इस दौरान अरबन के नोडल अधिकारी डॉ. आरपी यादव, यूनिसेफ के डीएमसी अरशद , एआरओ राकेश चंद, राजीव मिश्रा आदि मौजूद रहे।