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सही से सूची बने तो जिले में निकलेंगे सौ से अधिक भू-माफिया
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सही से सूची बने तो जिले में निकलेंगे सौ से अधिक भू-माफिया
विनोद कुमार तिवारी
देवरिया। बहुत पहले जिले में तकरीबन 26 भू-माफिया की सूची बनाई गई थी। शासन से जब भी भू-माफिया के संबंध में जानकारी मांगी जाती है तो इसी सूची को थमा दिया जाता है, जबकि इसके बाद से जिले में कई भू-माफिया या तो पनप गए या पहली वाली सूची में छूट गए थे। जानकार बताते हैं कि यदि सही से सूची बनाई जाए तो जिले में भू-माफिया की संख्या सौ से अधिक हो सकती है। यही नहीं कई तो भू-माफिया की सूची से बाहर भी हो सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, यदि जिले में असली भू-माफिया की सूची तैयार की जाए तो उसमें कई चिकित्सक, कई सफेदपोश, कुछ कथित समाजसेवी, प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के कुछ अध्यापक, कई लेखपाल और अपराधी प्रवृत्ति के कई युवकों के नाम शामिल हो सकते हैं। सीएम की सख्ती के बाद शुक्रवार को डीएम आशुतोष निरंजन ने भू-माफिया की पत्रावली तलब की तो प्रशासनिक अफसरों की बेचैनी बढ़ गई।
बता दें कि शुक्रवार को गोरखपुर में जन सुनवाई के दौरान जमीन कब्जे की शिकायत पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने तल्खी से अधिकारियों से सवाल किया कि क्या अब भी भू-माफिया बचे हैं? आप लोग कार्रवाई क्यों नहीं करते? उन्होंने भू-माफिया पर शिकंजा कसने का आदेश दिया। अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा कि भू माफिया ही नहीं उनके संरक्षण दाताओं को भी शासन का डर हर हाल में होना चाहिए।
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सवाल यह है कि सत्ता के संरक्षण में फल फूल रहे भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा? शहर में कुछ ऐसे भू-माफिया हैं, जो जिसकी सरकार होती है, उसी के पाले में चले जाते हैं। पुलिस रिकार्ड में दर्ज केस एवं शिकायतों पर गौर करें तो ऐसे भू-माफिया की श्रेणी में टॉप टेन नहीं, बल्कि 100 के करीब नाम हो सकते हैं। एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की कार्य प्रणाली कागजी कोरम तक सिमट कर रह गई है। जिन लोगों को भू-माफिया चिह्नित किया गया है, कुछ को छोड़ दें तो कई ऐसे हैं, जिनका नाम सुनकर लोग विश्वास नहीं करते, जबकि जो वास्तव में भू-माफिया हैं उन्हें छोड़ दिया गया है।
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केस एक
सरयू नदी के उस पार जिले के छह राजस्व हैं। यहां गोरखपुर, देवरिया, मऊ जिले के तीन हजार किसानों की तकरीबन 4650 एकड़ भूमि पर भू-माफिया का कब्जा है। 21 वर्ष से किसान अपनी ही भूमि पर खेती नहीं कर पाते हैं। अगर बुवाई कर भी दिए तो फसल काट नहीं पाते हैं। इसमें 1650 एकड़ भूमि सरकारी है। प्रशासन इस भूमि पर कब्जा नहीं कर पाया है। इसमें लिप्त किसी का नाम भू-माफिया की सूची में नहीं है।
केस दो
बरहज तहसील में सैकड़ों एकड़ ऐसी भूमि है जिस पर भू-माफिया ने फर्जी खाता बनाकर अपना नाम चढ़वा लिया है। जुलाई 2019 में तत्कालीन एसडीएम ने 42 एकड़ भूमि से नाम भू-माफिया का कटवाकर मूल किसान का नाम दर्ज कराया, लेकिन कब्जे में अवरोध भू-माफिया पैदा किये हैं। यही नहीं गौरा बरहज की उर्मिला तिवारी पत्नी मदन तिवारी की 50 बीघा भूमि है। वर्ष 2009 से इस भूमि पर हर साल मदन तिवारी का परिवार फसल की बुवाई कराता है और भू माफिया फसल काट लेते हैं। जबकि बरहज थाने में केस चोरी का दर्ज है। बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। इसमें भी लिप्त कोई भू-माफिया चिह्नित नहीं किया गया।
केस तीन
शहर में तकरीबन 20 ऐसे भू-माफिया हैं, जिन्होंने शहर की सूरत बिगाड़ दी है। बिना नक्शा पास कराए बहुमंजिली इमारतें खड़ी कर दीं, दुकानें बेच दीं। इसमें कथित समाजसेवी, डाक्टर, सफेदपोश, अध्यापक, आपराधिक प्रवृत्ति के युवक, लेखपाल के नाम शामिल हैं। महंगे दामों पर जमीनों को दूसरे के नामों पर खरीद कर उसे मुंहमांगी रकम लेकर बेचना इनका धंधा हैं। इसमें राजस्व एवं रजिस्ट्री विभाग के अफसर भी लिप्त हैं। कई केस दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है।
क्या कहते है लोग
- मेडिकल कारोबारी अशोक मणि त्रिपाठी का कहना है कि भू माफिया को संरक्षण प्रशासनिक अफसर एवं कुछ नेताओं का है। सैकड़ों लोग प्रापर्टी खरीदकर फंसे हैं। समाजसेवी अजय प्रताप सिंह का कहना है कि सरयू नदी के उस पार 20 से अधिक भू-माफिया हैं। जो तीन हजार से अधिक किसानों एवं सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। मुख्यमंत्री से मिलकर जानकारी देने के बावजूद कोई भू-माफिया में चिह्नित नहीं किया गया। कुछ सफेदपोशों का ऐसे लोगों को संरक्षण है। सामाजिक कार्यकर्त्ता मानवेंद्र तिवारी का कहना है कि उनकी खुद की 50 बीघे जमीन पर भू-माफिया ने कब्जा जमा लिया है। केस दर्ज होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। संत विनोवा छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष बाल मुकुंद यादव ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए सभी तहसीलों में एंटी भू माफिया टास्क फोर्स गठित किया गया है। भू-माफिया की सूची की समीक्षा की जाएगी। साक्ष्यों के आधार पर अन्य लोगों को भी चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
- आशुतोष निरंजन, डीएम
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विनोद कुमार तिवारी
देवरिया। बहुत पहले जिले में तकरीबन 26 भू-माफिया की सूची बनाई गई थी। शासन से जब भी भू-माफिया के संबंध में जानकारी मांगी जाती है तो इसी सूची को थमा दिया जाता है, जबकि इसके बाद से जिले में कई भू-माफिया या तो पनप गए या पहली वाली सूची में छूट गए थे। जानकार बताते हैं कि यदि सही से सूची बनाई जाए तो जिले में भू-माफिया की संख्या सौ से अधिक हो सकती है। यही नहीं कई तो भू-माफिया की सूची से बाहर भी हो सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, यदि जिले में असली भू-माफिया की सूची तैयार की जाए तो उसमें कई चिकित्सक, कई सफेदपोश, कुछ कथित समाजसेवी, प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के कुछ अध्यापक, कई लेखपाल और अपराधी प्रवृत्ति के कई युवकों के नाम शामिल हो सकते हैं। सीएम की सख्ती के बाद शुक्रवार को डीएम आशुतोष निरंजन ने भू-माफिया की पत्रावली तलब की तो प्रशासनिक अफसरों की बेचैनी बढ़ गई।
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बता दें कि शुक्रवार को गोरखपुर में जन सुनवाई के दौरान जमीन कब्जे की शिकायत पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने तल्खी से अधिकारियों से सवाल किया कि क्या अब भी भू-माफिया बचे हैं? आप लोग कार्रवाई क्यों नहीं करते? उन्होंने भू-माफिया पर शिकंजा कसने का आदेश दिया। अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा कि भू माफिया ही नहीं उनके संरक्षण दाताओं को भी शासन का डर हर हाल में होना चाहिए।
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सवाल यह है कि सत्ता के संरक्षण में फल फूल रहे भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा? शहर में कुछ ऐसे भू-माफिया हैं, जो जिसकी सरकार होती है, उसी के पाले में चले जाते हैं। पुलिस रिकार्ड में दर्ज केस एवं शिकायतों पर गौर करें तो ऐसे भू-माफिया की श्रेणी में टॉप टेन नहीं, बल्कि 100 के करीब नाम हो सकते हैं। एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की कार्य प्रणाली कागजी कोरम तक सिमट कर रह गई है। जिन लोगों को भू-माफिया चिह्नित किया गया है, कुछ को छोड़ दें तो कई ऐसे हैं, जिनका नाम सुनकर लोग विश्वास नहीं करते, जबकि जो वास्तव में भू-माफिया हैं उन्हें छोड़ दिया गया है।
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केस एक
सरयू नदी के उस पार जिले के छह राजस्व हैं। यहां गोरखपुर, देवरिया, मऊ जिले के तीन हजार किसानों की तकरीबन 4650 एकड़ भूमि पर भू-माफिया का कब्जा है। 21 वर्ष से किसान अपनी ही भूमि पर खेती नहीं कर पाते हैं। अगर बुवाई कर भी दिए तो फसल काट नहीं पाते हैं। इसमें 1650 एकड़ भूमि सरकारी है। प्रशासन इस भूमि पर कब्जा नहीं कर पाया है। इसमें लिप्त किसी का नाम भू-माफिया की सूची में नहीं है।
केस दो
बरहज तहसील में सैकड़ों एकड़ ऐसी भूमि है जिस पर भू-माफिया ने फर्जी खाता बनाकर अपना नाम चढ़वा लिया है। जुलाई 2019 में तत्कालीन एसडीएम ने 42 एकड़ भूमि से नाम भू-माफिया का कटवाकर मूल किसान का नाम दर्ज कराया, लेकिन कब्जे में अवरोध भू-माफिया पैदा किये हैं। यही नहीं गौरा बरहज की उर्मिला तिवारी पत्नी मदन तिवारी की 50 बीघा भूमि है। वर्ष 2009 से इस भूमि पर हर साल मदन तिवारी का परिवार फसल की बुवाई कराता है और भू माफिया फसल काट लेते हैं। जबकि बरहज थाने में केस चोरी का दर्ज है। बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। इसमें भी लिप्त कोई भू-माफिया चिह्नित नहीं किया गया।
केस तीन
शहर में तकरीबन 20 ऐसे भू-माफिया हैं, जिन्होंने शहर की सूरत बिगाड़ दी है। बिना नक्शा पास कराए बहुमंजिली इमारतें खड़ी कर दीं, दुकानें बेच दीं। इसमें कथित समाजसेवी, डाक्टर, सफेदपोश, अध्यापक, आपराधिक प्रवृत्ति के युवक, लेखपाल के नाम शामिल हैं। महंगे दामों पर जमीनों को दूसरे के नामों पर खरीद कर उसे मुंहमांगी रकम लेकर बेचना इनका धंधा हैं। इसमें राजस्व एवं रजिस्ट्री विभाग के अफसर भी लिप्त हैं। कई केस दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है।
क्या कहते है लोग
- मेडिकल कारोबारी अशोक मणि त्रिपाठी का कहना है कि भू माफिया को संरक्षण प्रशासनिक अफसर एवं कुछ नेताओं का है। सैकड़ों लोग प्रापर्टी खरीदकर फंसे हैं। समाजसेवी अजय प्रताप सिंह का कहना है कि सरयू नदी के उस पार 20 से अधिक भू-माफिया हैं। जो तीन हजार से अधिक किसानों एवं सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। मुख्यमंत्री से मिलकर जानकारी देने के बावजूद कोई भू-माफिया में चिह्नित नहीं किया गया। कुछ सफेदपोशों का ऐसे लोगों को संरक्षण है। सामाजिक कार्यकर्त्ता मानवेंद्र तिवारी का कहना है कि उनकी खुद की 50 बीघे जमीन पर भू-माफिया ने कब्जा जमा लिया है। केस दर्ज होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। संत विनोवा छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष बाल मुकुंद यादव ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए सभी तहसीलों में एंटी भू माफिया टास्क फोर्स गठित किया गया है। भू-माफिया की सूची की समीक्षा की जाएगी। साक्ष्यों के आधार पर अन्य लोगों को भी चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
- आशुतोष निरंजन, डीएम