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Deoria News: बदले मौसम में रहे अलर्ट...हृदय, रक्तचाप और मधुमेह के मरीजाें पर बढ़ा खतरा
Wed, 17 Dec 2025 11:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 17 Dec 2025 11:28 PM IST
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महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज की ओपीडी में लगी रोगियों की कतार, फोटो संवाद
देवरिया। जिले में अचानक बढ़े कोहरे, धुंध ने हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के रोगियों पर खतरा बढ़ गया है। चिकित्सकों ऐसे मरीजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी में इसको लेकर डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टॉफ को सजग रहने को कहा गया है।
ठंड में तेजी के चलते महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज में हार्ट, ब्लड प्रेशर और अस्थमा के रोगी बढ़ गए हैं। मेडिकल काॅलेज की ओपीडी में रोजाना करीब 400 मरीज आते हैं। इनमें से 15 प्रतिशत रोगियों में हार्ट, ब्लड प्रेशर की दिक्कत रहती है। वहीं टीबी व श्वास रोग विभाग में 60 से 70 मरीज अस्थमा के आ रहे हैं। मेडिकल काॅलेज के सीएमएस डॉ. निखिलेश मिश्र के अनुसार, सर्दी और धुंध का मौसम हृदय रोगियों के लिए कठिन साबित होता है।
ठंड के कारण शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि ठंड में अस्थमा और मधुमेह रोगियों की समस्या भी बढ़ जाती है।
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कोहरा और धुंध के चलते एक्यूआई का स्तर खराब हो जाता है। प्रदूषित हवा में सांस लेने से अस्थमा के दौरे पड़ना, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों में संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
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ठंड में तेजी के चलते महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज में हार्ट, ब्लड प्रेशर और अस्थमा के रोगी बढ़ गए हैं। मेडिकल काॅलेज की ओपीडी में रोजाना करीब 400 मरीज आते हैं। इनमें से 15 प्रतिशत रोगियों में हार्ट, ब्लड प्रेशर की दिक्कत रहती है। वहीं टीबी व श्वास रोग विभाग में 60 से 70 मरीज अस्थमा के आ रहे हैं। मेडिकल काॅलेज के सीएमएस डॉ. निखिलेश मिश्र के अनुसार, सर्दी और धुंध का मौसम हृदय रोगियों के लिए कठिन साबित होता है।
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ठंड के कारण शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि ठंड में अस्थमा और मधुमेह रोगियों की समस्या भी बढ़ जाती है।
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कोहरा और धुंध के चलते एक्यूआई का स्तर खराब हो जाता है। प्रदूषित हवा में सांस लेने से अस्थमा के दौरे पड़ना, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों में संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।