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Deoria News: बिना खेले ही खराब हो गया 50 लाख से बना बास्केटबाॅल कोर्ट
Sun, 28 May 2023 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 28 May 2023 02:00 AM IST
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रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम स्थित बास्केटबॉल कोर्ट
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देवरिया। रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में वर्ष 2012 में 50 लाख रुपये से बना बास्केटबाॅल कोर्ट बिना खेले ही खराब हो गया। यही नहीं इन वर्षों में खेले निदेशालय के अधिकारी यहां एक प्रशिक्षक की तैनाती तक नहीं कर पाए। आलम यह है कि इसका सिंथेटिक कोर्ट जगह-जगह टूट चुका है। खास बात यह है कि उच्चाधिकारियों की ओर से अब इसके मरम्मत की तैयारियां भी प्रारंभ हो गई हैं। इसके लिए शासन से धन भी जारी किया जा चुका है।
कोर्ट की मरम्मत के बाद भी प्रशिक्षक नहीं मिला तो इसकी उपयोगिता क्या होगी, खेल जगत से जुड़े लोग ही अब यह सवाल उठा रहे हैं। खिलाड़ियों के मन में भी यह बात खटक रही है कि जब प्रशिक्षक देना ही नहीं है तो फिर इसमें धन खपाने की जरूरत ही क्या है। स्पोर्ट्स स्टेडियम में जब यह कोर्ट बना तो संभावना जगी कि इससे जनपद में बास्केटबाॅल के खिलाड़ियों की नर्सरी तैयार होगी। इसके निर्माण के दौरान दक्षिण कोरिया से आए इंजीनियर ने इसमें रबर की गिटिट्यां सेट करने का कार्य किया था। खास बात यह है कि करीब 13 एकड़ में फैले स्टेडियम में इस कोर्ट के निर्माण के बाद ग्राउंड अन्य खेलों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं रह गया। अब तक दस से अधिक सत्र बीत चुके हैं, कोरोना काल के दो सत्र को छोड़ दें तो किसी भी सत्र में खेल निदेशालय यहां एक प्रशिक्षक की तैनाती नहीं कर पाया। इससे यहां नेशनल तो दूर, जिले स्तर के भी बास्केटबाॅल खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाए।
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बास्केटबाॅल कोर्ट की हालत देखकर दुख होता है। लाखों रुपये खर्च कर इसका निर्माण कराया गया। पिछले दस साल में एक भी प्रशिक्षक नहीं दे पाना खेल विभाग की लापरवाही का परिणाम है। खेल तभी आगेे बढ़ेगा या इसकी नर्सरी तैयार होगी, जब प्रशिक्षक और सुविधाएं होंगी।
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-अमन द्विवेदी, स्टेडियम के खिलाड़ी
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बास्केटबाॅल कोर्ट बनने के बाद स्टेडियम का ग्राउंड छोटा हो गया। सिंथेटिक की गिट्टियां जगह-जगह से टूट चुकी हैं। समझ में नहीं आता जब यहां प्रशिक्षक देना ही नहीं था तो यह कोर्ट क्यों यहां बनवाया गया। केवल धन खपाने के लिए यहां कोर्ट दे दिया गया, बाकी सुविधाएं क्यूू नहीं देते ऊपर के लोग।
-विशाल यादव, स्टेडियम के खिलाड़ी
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अभी नया छात्रावास भवन एवं तरणताल के बगल में स्टोर रूम का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके बाद बास्केटबाॅल कोर्ट की मरम्मत होगी। इसके लिए शासन की ओर से धन भी स्वीकृत कर लिया गया है। प्रशिक्षक भी यहां मिले, इसके लिए खेल निदेशालय से मांग की जाती है। प्रशिक्षक मिलेगा तभी यहां भी इस खेल के भी अच्छे खिलाड़ी निकलेंगे।
-राज नारायण पटेल, क्रीड़ाधिकारी
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कोर्ट की मरम्मत के बाद भी प्रशिक्षक नहीं मिला तो इसकी उपयोगिता क्या होगी, खेल जगत से जुड़े लोग ही अब यह सवाल उठा रहे हैं। खिलाड़ियों के मन में भी यह बात खटक रही है कि जब प्रशिक्षक देना ही नहीं है तो फिर इसमें धन खपाने की जरूरत ही क्या है। स्पोर्ट्स स्टेडियम में जब यह कोर्ट बना तो संभावना जगी कि इससे जनपद में बास्केटबाॅल के खिलाड़ियों की नर्सरी तैयार होगी। इसके निर्माण के दौरान दक्षिण कोरिया से आए इंजीनियर ने इसमें रबर की गिटिट्यां सेट करने का कार्य किया था। खास बात यह है कि करीब 13 एकड़ में फैले स्टेडियम में इस कोर्ट के निर्माण के बाद ग्राउंड अन्य खेलों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं रह गया। अब तक दस से अधिक सत्र बीत चुके हैं, कोरोना काल के दो सत्र को छोड़ दें तो किसी भी सत्र में खेल निदेशालय यहां एक प्रशिक्षक की तैनाती नहीं कर पाया। इससे यहां नेशनल तो दूर, जिले स्तर के भी बास्केटबाॅल खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाए।
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बास्केटबाॅल कोर्ट की हालत देखकर दुख होता है। लाखों रुपये खर्च कर इसका निर्माण कराया गया। पिछले दस साल में एक भी प्रशिक्षक नहीं दे पाना खेल विभाग की लापरवाही का परिणाम है। खेल तभी आगेे बढ़ेगा या इसकी नर्सरी तैयार होगी, जब प्रशिक्षक और सुविधाएं होंगी।
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-अमन द्विवेदी, स्टेडियम के खिलाड़ी
बास्केटबाॅल कोर्ट बनने के बाद स्टेडियम का ग्राउंड छोटा हो गया। सिंथेटिक की गिट्टियां जगह-जगह से टूट चुकी हैं। समझ में नहीं आता जब यहां प्रशिक्षक देना ही नहीं था तो यह कोर्ट क्यों यहां बनवाया गया। केवल धन खपाने के लिए यहां कोर्ट दे दिया गया, बाकी सुविधाएं क्यूू नहीं देते ऊपर के लोग।
-विशाल यादव, स्टेडियम के खिलाड़ी
अभी नया छात्रावास भवन एवं तरणताल के बगल में स्टोर रूम का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके बाद बास्केटबाॅल कोर्ट की मरम्मत होगी। इसके लिए शासन की ओर से धन भी स्वीकृत कर लिया गया है। प्रशिक्षक भी यहां मिले, इसके लिए खेल निदेशालय से मांग की जाती है। प्रशिक्षक मिलेगा तभी यहां भी इस खेल के भी अच्छे खिलाड़ी निकलेंगे।
-राज नारायण पटेल, क्रीड़ाधिकारी