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Deoria News: आंधी-बारिश में खेतों में बिछ गई केले की फसल, किसानों की उम्मीदें डूबीं
Tue, 29 Sep 2026 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 29 Sep 2026 12:23 AM IST
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बरियारपुर। तेज आंधी और बारिश ने देवरिया सदर विकासखंड के सरौरा गांव में केले की खेती करने वाले किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज हवा के झोंकों से खेतों में खड़ी केले की फसल देखते ही देखते जमीन पर गिर गई। फसल तैयार होकर बाजार में पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
गांव निवासी किसान विजय कुमार ने करीब तीन एकड़ में केले की खेती की थी। फसल इस बार अच्छी होने की उम्मीद थी। उन्हें भरोसा था कि केले की बिक्री से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन आंधी-बारिश ने पूरी फसल को धराशायी कर दिया। विजय कुमार के अनुसार, फसल बर्बाद होने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
श्रीराम यादव ने एक एकड़, सत्येंद्र शाही ने दो एकड़ और श्रीराम भगत ने तीन एकड़ में केले की खेती की थी। इन किसानों के खेतों में भी अधिकांश पेड़ तेज हवा के कारण गिर गए। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में खाद, पानी, मजदूरी और अन्य संसाधनों पर पहले ही बड़ी रकम खर्च हो चुकी थी।
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फसल नष्ट होने से लागत निकलना तो दूर, खेती के लिए लिया गया कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो गया है।
किसानों ने बताया कि महीनों तक फसल की देखभाल करने के बाद जब केले तैयार होने की स्थिति में पहुंचे तो प्राकृतिक आपदा ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।
खेतों में जमीन पर पड़े केले के पेड़ किसानों की बर्बादी का मंजर बयां कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि समय रहते सरकारी मदद नहीं मिली तो आंधी-बारिश से हुए नुकसान की भरपाई करना उनके लिए बेहद मुश्किल होगा।
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गांव निवासी किसान विजय कुमार ने करीब तीन एकड़ में केले की खेती की थी। फसल इस बार अच्छी होने की उम्मीद थी। उन्हें भरोसा था कि केले की बिक्री से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन आंधी-बारिश ने पूरी फसल को धराशायी कर दिया। विजय कुमार के अनुसार, फसल बर्बाद होने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
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श्रीराम यादव ने एक एकड़, सत्येंद्र शाही ने दो एकड़ और श्रीराम भगत ने तीन एकड़ में केले की खेती की थी। इन किसानों के खेतों में भी अधिकांश पेड़ तेज हवा के कारण गिर गए। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में खाद, पानी, मजदूरी और अन्य संसाधनों पर पहले ही बड़ी रकम खर्च हो चुकी थी।
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फसल नष्ट होने से लागत निकलना तो दूर, खेती के लिए लिया गया कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो गया है।
किसानों ने बताया कि महीनों तक फसल की देखभाल करने के बाद जब केले तैयार होने की स्थिति में पहुंचे तो प्राकृतिक आपदा ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।
खेतों में जमीन पर पड़े केले के पेड़ किसानों की बर्बादी का मंजर बयां कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि समय रहते सरकारी मदद नहीं मिली तो आंधी-बारिश से हुए नुकसान की भरपाई करना उनके लिए बेहद मुश्किल होगा।