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Deoria News: देवरिया में बकरीद पर वृद्ध ने दी अपनी कुर्बानी

Sat, 07 Jun 2025 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Sat, 07 Jun 2025 11:55 PM IST
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An old man sacrificed his life on Bakrid in Deoria
नमाज अदा कर घर लौटा और चाकू से रेत लिया गला
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मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान वृद्ध ने दम तोड़ा


संवाद न्यूज एजेंसी

देवरिया। जिले के गौरीबाजार क्षेत्र में बकरीद पर खुद की कुर्बानी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उधोपुर गांव में ईश मोहम्मद (60 वर्ष) ने चिट्ठी लिखकर अपना गला रेत लिया। खून से लथपथ पति को देखकर पत्नी चीख सुनकर मौके पहुंचे लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। गंभीर हालत में ईश मोहम्मद को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

पत्नी हजरा खातून के मुताबिक ईश मोहम्मद हर साल की तरह इस बार भी बकरीद से पहले आंबेडकरनगर के किछौछा स्थित सुल्तान सैयद मकदुम अशरफ शाह मजार गए थे। वहां से शुक्रवार की दोपहर घर लौटे। शनिवार को बकरीद पर सुबह की नमाज अदा कर मस्जिद से लौटे और अपनी झोपड़ी में सोने चले गए। हजरा ने बताया कि करीब एक घंटे बाद झोपड़ी से कराहने की आवाज सुनाई दी। वह अंदर पहुंची तो वहां का दृश्य देख चीख पड़ी।
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शोर सुनकर गांव वाले दौड़ पड़े। ईश मोहम्मद अपने गले को बकरा हलाल करने वाले चाकू से काटकर तड़प रहे थे। लोगों ने तत्काल पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने ईश मोहम्मद को देवरिया मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। वहां हालत नाजुक देख प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान देर शाम ईश मोहम्मद की मौत हो गई।
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पुलिस के अनुसार, परिजनों को लिखी ईश मोहम्मद की चिट्ठी मिली है। इसमें लिखा है कि ‘इन्सान बकरे को अपने बच्चे की तरह पाल पोसकर बड़ा कर कुर्बानी देता है, वह भी जीव है। कुर्बानी करना चाहिए, मैं खुद अपनी कुर्बानी अल्लाह के रसूल के नाम से कर रहा हूं। मेरी मिट्टी या कब्र घबरा कर मत करना, कोई मुझको कत्ल नहीं किया है। सुकून से मिट्टी देना, किसी से डरना नहीं।’


ईश के परिवार में पत्नी हजरा खातून के अलावा तीन बेटे और बहुएं हैं। वहीं गांव के लोगों ने मानसिक विक्षिप्त होना कारण बताया है।

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मजहब की किसी किताब में यह नहीं है कि आस्था के प्रति विश्वास दिलाने के लिए इन्सान अपने आप की या परिवार के किसी व्यक्ति की कुर्बानी दे। इस तरह की किसी भी घटना को मजहब स्वीकार नहीं करता। -मौलवी हासीम रजा, बिशुनपुरा बैतालपुर
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