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Deoria News: जमीन के अभाव में नहीं बन पाए किफायती आवास, कागजों में सिमट गई योजना

Fri, 04 Aug 2023 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Fri, 04 Aug 2023 11:40 PM IST
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Affordable housing could not be built due to lack of land, the plan was reduced to paper
देवरिया। प्रधानमंत्री आवास के अफोर्डेबल आवास (जी प्लस थ्री) योजना को जिला प्रशासन ने भले ही ठंडे बस्ते में डाल दिया हो, लेकिन आवेदन कर चुके ढाई हजार लोगों की आस अब भी बाकी है। सस्ते दाम पर शहर में फ्लैट का सपना संजोए लोग डूडा कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जानकारी बस इतनी मिल रही कि जमीन उपलब्ध होने पर आवास बनेगा।
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आठ साल पहले वर्ष 2015 में जब प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत हुई तो इसमें मध्यम वर्ग के लोगों का भी ख्याल रखा गया। जो लोग किराए के भवन में रहकर गुजर बसर कर रहे थे उनके लिए केंद्र सरकार अफोर्डेबल आवास (जी प्लस थ्री) ले आई। जिला प्रशासन को जमीन मुहैया करानी थी और आवास विकास परिषद को उसपर पांच सौ फ्लैट का अपार्टमेंट तैयार करना था। उस दौरान प्रति फ्लैट की लागत 4.50 लाख बताई जा रही थी। जिसमें 50 प्रतिशत केंद्र सरकार की ओर से अनुदान था। सिर्फ ढाई लाख रुपये ही लाभार्थी को जमा करने थे। शुरुआत में कुछ जगहों पर जमीन चिह्रित भी की गई, लेकिन विवादों के कारण अपार्टमेंट के निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया। इधर ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यमों से करीब ढाई हजार लोगों ने आवेदन कर दिया। सबको उम्मीद थी आज नहीं तो कल जिला प्रशासन जमीन मुहैया करा ही देगा। समय बीतने के साथ योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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बोले आवेदक :
वर्ष 2019 में मैंने अफोर्डेबल आवास (जी प्लस थ्री) के लिए आवेदन किया। एक साल तक उसके बारे में पता करती रही। डूडा के कर्मचारी बता रहे थे भुजौली कालोनी में आपार्टमेंट बनने जा रहा है। बाद में सब कहने लगे जमीन नहीं मिल रही है। - नीलम पांडेय, आवेदक
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किराए के मकान में रहकर प्राइवेट जॉब करता था। अफोर्डेबल आवास योजना की जानकारी मिली तो लगा कि मेरा भी अपना फ्लैट हो जाएगा। इसके लिए मैंने ढाई लाख रुपये भी इकट्ठा कर लिए थे। आवेदन किए चार साल से अधिक गुजर गए हैं। अबतक लाभ नहीं मिल पाया। - रितेश कुमार मिश्र, आवेदक।
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2020 तक की जमीन की तलाश फिर छोड़ दी आस
वर्ष 2020 तक जिला प्रशासन ने आवास अपार्टमेंट बनाने के लिए जमीन की तलाश की। जहां भी जमीन मिली कुछ न कुछ पेच फंसता गया। चार साल पूर्व अमेठी में जमीन चिह्नित की गई थी। ग्रामसभा की आपत्ति के बाद मामला ठंडा पड़ गया। तत्कालीन डीएम अमित किशोर ने बीआरडीपीजी के पास खाली पड़ी जमीन पर आवास निर्माण का प्रस्ताव रखा तो कॉलेज प्रशासन और छात्र विरोध में उतर आए। फिर सोंदा स्थित कुष्ठ आश्रम की जमीन आवास विकास परिषद के नाम हस्तांतरित किए जाने की चर्चा चली, लेकिन शीघ्र ही अटकलों पर विराम लग गया।
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इनसेट

ऐसा बनना है अपार्टमेंट

पांच सौ फ्लैट निर्माण के लिए आवास विकास परिषद को करीब एक एकड़ जमीन की दरकार है। इसमें तीन अपार्टमेंट बनाए जाने हैं। इसमें एक कमरा और लॉबी के अलावा शौचालय, स्नानघर और कीचन अटैच होगा। परिसर में बच्चों के खेलने के लिए मैदान, पार्क और वाहन पार्किंग की सुविधा भी दी जाएगी। अपार्टमेंट का रखरखाव सोसाइटी के माध्यम से किया जाना है।
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ये लोग हैं पात्र
आवेदक नगर पालिका परिषद देवरिया का स्थायी निवासी हो या लंबे समय से शहर में निवास करता हो। सालाना आय तीन लाख रुपये तक हो। आवेदक के पास देश में कहीं पक्का मकान नहीं हो। किराए के मकान में रहकर जीवन यापन करता हो।

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पीएम आवास योजना शहरी के अफोर्डेबल (जी प्लस थ्री) के तहत पांच सौ फ्लैट निर्माण के लिए नगर पालिका से जमीन मांगी गई थी। उन्होंने जमीन देने से इन्कार कर दिया। नगर का सीमा विस्तार होने के बाद जमीन मिलने की उम्मीद है।

- विनोद कुमार मिश्र, पीओ डूडा
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