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Deoria News: वरासत मामले में कानूनगो पर होगी कार्रवाई, निलंबन के लिए भेजा पत्र
Fri, 25 Oct 2024 02:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 25 Oct 2024 02:53 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। वरासत के मामले में लेखपाल पर कार्रवाई के बाद अब कानूनगो को निलंबित करने के लिए एसडीएम ने डीएम को पत्र लिखकर अपनी संस्तुति की है। इसे लेकर विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन इस तरह की जांच कराए तो अभी कई लेखपाल व कानूनगो पर गाज गिर सकती है।
नगर पंचायत भटनी क्षेत्र के केवड़ा वार्ड के रहने वाले विग्गू वर्मा पुत्र रघुनाथ वर्मा ने अपनी मां फूलसखी देवी की मृत्यु के बाद वरासत के लिए छह सितंबर को ऑनलाइन आवेदन किया था।
हल्का लेखपाल हरिश्चंद्र पांडेय द्वारा वरासत का फाॅर्म सही नहीं भरा गया था। जिसपर प्रभारी कानूनगो अशोक कुमार ने अपनी रिपोर्ट में खातेदार का नाम खतौनी में न होने का कारण दिखाते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया।
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लेखपाल के कहने पर आवेदक ने फिर 10 सितंबर को आवेदन किया। जिसको लेखपाल ने साक्ष्य का अभाव व कानूननो ने खातेदार का खतौनी में नाम न होने का कारण दिखा पुनः निरस्त कर दिया। पीड़ित ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी व राजस्व परिषद से की। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने इसकी जांच तहसीलदार अलका सिंह को सौंपी। तहसीलदार की जांच में लेखपाल व कानूनगो दोषी पाए गए।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने लेखपाल हरिश्चंद्र पांडेय को तत्काल निलंबित कर कानूनगो को निलंबित करने के लिए जिलाधिकारी को संस्तुति की है। हालांकि कानूनगो अशोक कुमार का कहना है कि लेखपाल ने गलती की है। मैंने तो उसका वरासत कर दिया है।
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सलेमपुर। वरासत के मामले में लेखपाल पर कार्रवाई के बाद अब कानूनगो को निलंबित करने के लिए एसडीएम ने डीएम को पत्र लिखकर अपनी संस्तुति की है। इसे लेकर विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन इस तरह की जांच कराए तो अभी कई लेखपाल व कानूनगो पर गाज गिर सकती है।
नगर पंचायत भटनी क्षेत्र के केवड़ा वार्ड के रहने वाले विग्गू वर्मा पुत्र रघुनाथ वर्मा ने अपनी मां फूलसखी देवी की मृत्यु के बाद वरासत के लिए छह सितंबर को ऑनलाइन आवेदन किया था।
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हल्का लेखपाल हरिश्चंद्र पांडेय द्वारा वरासत का फाॅर्म सही नहीं भरा गया था। जिसपर प्रभारी कानूनगो अशोक कुमार ने अपनी रिपोर्ट में खातेदार का नाम खतौनी में न होने का कारण दिखाते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया।
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लेखपाल के कहने पर आवेदक ने फिर 10 सितंबर को आवेदन किया। जिसको लेखपाल ने साक्ष्य का अभाव व कानूननो ने खातेदार का खतौनी में नाम न होने का कारण दिखा पुनः निरस्त कर दिया। पीड़ित ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी व राजस्व परिषद से की। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने इसकी जांच तहसीलदार अलका सिंह को सौंपी। तहसीलदार की जांच में लेखपाल व कानूनगो दोषी पाए गए।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने लेखपाल हरिश्चंद्र पांडेय को तत्काल निलंबित कर कानूनगो को निलंबित करने के लिए जिलाधिकारी को संस्तुति की है। हालांकि कानूनगो अशोक कुमार का कहना है कि लेखपाल ने गलती की है। मैंने तो उसका वरासत कर दिया है।