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Deoria News: आभा, आरती और अमृता ने मिलकर बदल दी स्कूल की सूरत
Sun, 08 Mar 2026 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 08 Mar 2026 12:48 AM IST
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गौरीबाजार। तीन शिक्षिकाओं की मेहनत ने विकास खंड गौरीबाजार के प्राथमिक विद्यालय भिटौली बुजुर्ग नंबर-2 की तस्वीर बदल दी है। प्रधानाध्यापक आभा त्रिपाठी और सहायक अध्यापिकाएं आरती सिंह व अमृता श्रीवास्तव ने मिलकर विद्यालय को वॉल पेंटिंग और टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) से इतना आकर्षक बना दिया है कि अब यह स्कूल बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ आकर्षण का केंद्र बन गया है।
देवरिया-गोरखपुर मुख्य मार्ग पर स्थित इस विद्यालय की दीवारों पर शिक्षिकाओं ने खुद ब्रश और रंग लेकर चित्रकारी की है। कक्षा एक से पांच तक के कक्षों की दीवारों पर गिनती, पहाड़ा, फलों और सब्जियों के नाम, जानवरों के चित्र, स्वच्छता से जुड़े संदेश, हाथ धोने के तरीके सहित कई शैक्षिक चित्र बनाए गए हैं। इससे बच्चे पढ़ाई को चित्रों के माध्यम से आसानी से समझ पा रहे हैं। विद्यालय की बाहरी दीवारों और चहारदीवारी पर भी महापुरुषों के चित्र, प्रेरक स्लोगन और बच्चों से जुड़े चित्र बनाए गए हैं।
इन रंग-बिरंगी पेंटिंग ने स्कूल के माहौल को जीवंत बना दिया है। सजी हुई दीवारें अब बच्चों के लिए सीखने का माध्यम बन गई हैं और पढ़ाई को रोचक बना रही हैं।
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प्रधानाध्यापक आभा त्रिपाठी ने बताया कि इन पेंटिंग को बनाने के लिए किसी पेंटर की मदद नहीं ली गई। पेंटर द्वारा इसके लिए काफी अधिक रकम मांगी जा रही थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सहकर्मी शिक्षिकाओं आरती सिंह और अमृता श्रीवास्तव के साथ मिलकर विद्यालय बंद होने के बाद अतिरिक्त समय निकालकर खुद ही पूरी पेंटिंग तैयार की। उन्होंने बताया कि स्कूल में स्मार्ट क्लास भी संचालित की जा रही है और कार्यालय व कक्षाओं में सैकड़ों टीएलएम भी तैयार किए गए हैं, जो बच्चों को पढ़ाने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी विनयशील मिश्र ने कहा कि प्रधानाध्यापक के नेतृत्व में शिक्षिकाओं ने स्वयं वॉल पेंटिंग कर विद्यालय को बेहतर बनाया है। यह विद्यालय न केवल ब्लॉक बल्कि जिले के अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
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देवरिया-गोरखपुर मुख्य मार्ग पर स्थित इस विद्यालय की दीवारों पर शिक्षिकाओं ने खुद ब्रश और रंग लेकर चित्रकारी की है। कक्षा एक से पांच तक के कक्षों की दीवारों पर गिनती, पहाड़ा, फलों और सब्जियों के नाम, जानवरों के चित्र, स्वच्छता से जुड़े संदेश, हाथ धोने के तरीके सहित कई शैक्षिक चित्र बनाए गए हैं। इससे बच्चे पढ़ाई को चित्रों के माध्यम से आसानी से समझ पा रहे हैं। विद्यालय की बाहरी दीवारों और चहारदीवारी पर भी महापुरुषों के चित्र, प्रेरक स्लोगन और बच्चों से जुड़े चित्र बनाए गए हैं।
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इन रंग-बिरंगी पेंटिंग ने स्कूल के माहौल को जीवंत बना दिया है। सजी हुई दीवारें अब बच्चों के लिए सीखने का माध्यम बन गई हैं और पढ़ाई को रोचक बना रही हैं।
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प्रधानाध्यापक आभा त्रिपाठी ने बताया कि इन पेंटिंग को बनाने के लिए किसी पेंटर की मदद नहीं ली गई। पेंटर द्वारा इसके लिए काफी अधिक रकम मांगी जा रही थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सहकर्मी शिक्षिकाओं आरती सिंह और अमृता श्रीवास्तव के साथ मिलकर विद्यालय बंद होने के बाद अतिरिक्त समय निकालकर खुद ही पूरी पेंटिंग तैयार की। उन्होंने बताया कि स्कूल में स्मार्ट क्लास भी संचालित की जा रही है और कार्यालय व कक्षाओं में सैकड़ों टीएलएम भी तैयार किए गए हैं, जो बच्चों को पढ़ाने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी विनयशील मिश्र ने कहा कि प्रधानाध्यापक के नेतृत्व में शिक्षिकाओं ने स्वयं वॉल पेंटिंग कर विद्यालय को बेहतर बनाया है। यह विद्यालय न केवल ब्लॉक बल्कि जिले के अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।