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Deoria News: उत्साह में खूब की आतिशबाजी, एक्यूआई में 18 फीसदी की बढ़ोतरी
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सोमवार को शहर में फोडे गए पटाखा के कारण शहर का हवा हुआ खराब।संवाद
- अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उत्साह में जमकर हुई थी आतिशबाजी
- मेडिकल कॉलेज में रही सांस के रोगियों की अधिकता
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उत्साह में देवरिया जिले में लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। देर रात तक आतिशबाजी होती रही। मंगलवार को भी लोगों ने पटाखे फोड़े, जिसकी वजह से बुधवार को सुबह से ही एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ा रहा। यह बढ़कर 170 तक पहुंच गया, जो खतरनाक स्तर माना जाता है। इसका कुछ असर भी देखने को मिला। डॉक्टर की मानें तो मेडिकल कॉलेज में बुधवार को करीब 70 मरीज सांस रोग के पहुंचे थे। ऐसे लोगों को डॉक्टर ने भोर में मॉर्निंग और इवनिंग वॉक से अभी बचने की सलाह दी है।
22 जनवरी को दोपहर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के तुरंत बाद से ही जिले में आतिशबाजी शुरू हो गई थी। बच्चे और नौजवान आतिशबाजी खूब किए। यह क्रम मंगलवार को भी देर रात तक चला। इसके चलते जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स अर्थात वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ गया। बुधवार को यह 170 तक पहुंच गया, जो खतरनाक स्तर माना जाता है। हालांकि, रात को इसमें गिरावट देखी गई। यह घटकर 159 पर आ गया। सुबह यह 18 फीसदी की बढ़ोत्तरी पर था, जो रात आठ बजे 14.4 फीसदी अधिक था।
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ऐसे मापा जाता है एक्यूआई-
वायु गुणवत्ता सूचकांक हवा में मौजूद आठ प्रमुख प्रदूषकों के उत्सर्जन को मापकर प्राप्त किया जाता है: पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), ओजोन (O3), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) , सीसा (Pb) और अमोनिया (NH3) उत्सर्जन। हर घंटे रीडिंग नोट की जाती है। प्रत्येक देश के वायु गुणवत्ता मानकों के आधार पर उनके वायु गुणवत्ता सूचकांक होते हैं।
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यह है एक्यूआई स्तर-
एक्यूआई स्तर-
वर्ग-
स्वास्थ्य पर प्रभाव
0-50- अच्छा/सुरक्षित- न्यूनतम प्रभाव
51-100- संतोषजनक-
संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली परेशानी का अनुभव हो सकता है।
101-200- मध्यम- प्रदूषित फेफड़ों के रोग के रोगियों को सांस लेने में असुविधा हो सकती है और हृदय रोग के रोगियों, बच्चों और वृद्धों को असुविधा का अनुभव हो सकता है।
201-300- खतरनाक- लंबे समय तक रहने पर सांस लेने में परेशानी और हृदय रोग के रोगियों को परेशानी
301-400- बहुत खराब- लंबे समय तक संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारी हो सकती है। फेफड़े और हृदय रोग वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
401-500- चिंताजनक- स्वस्थ लोगों को श्वसन संबंधी समस्याओं का अनुभव हो सकता है। फेफड़े या हृदय रोग के रोगियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हल्की शारीरिक गतिविधि के दौरान भी लोगों को स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
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एक सप्ताह के वायु गुणवत्ता सूचकांक का पूर्वानुमान-
दिन- प्रदूषण का स्तर-
बुधवार- 159
बृहस्पतिवार- 160
शुक्रवार- 153
शनिवार- 154
रविवार- 159
सोमवार- 157
मंगलवार- 159
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मेडिकल कॉलेज में बुधवार को बढ़ गए सांस के रोगी-
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. अनुराग शुक्ला ने बताया कि एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ने का असर दिखा है। बुधवार को ओपीडी में 100 मरीज आए, जिसमें 70 से अधिक मरीज सांस रोग से संबंधित रहे। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। डॉ. अनुराग ने बताया कि इस समय एक्यूआई बढ़ा हुआ है। इसलिए भोर और शाम के वक्त लोग टहलने से बचें। सुबह उजाला हो जाने के बाद ही टहलें तो सेहत के लिए ठीक रहा है। इसके अलावा कपड़े पूरे शरीर के पहनकर घर से निकलें।
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- मेडिकल कॉलेज में रही सांस के रोगियों की अधिकता
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उत्साह में देवरिया जिले में लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। देर रात तक आतिशबाजी होती रही। मंगलवार को भी लोगों ने पटाखे फोड़े, जिसकी वजह से बुधवार को सुबह से ही एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ा रहा। यह बढ़कर 170 तक पहुंच गया, जो खतरनाक स्तर माना जाता है। इसका कुछ असर भी देखने को मिला। डॉक्टर की मानें तो मेडिकल कॉलेज में बुधवार को करीब 70 मरीज सांस रोग के पहुंचे थे। ऐसे लोगों को डॉक्टर ने भोर में मॉर्निंग और इवनिंग वॉक से अभी बचने की सलाह दी है।
22 जनवरी को दोपहर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के तुरंत बाद से ही जिले में आतिशबाजी शुरू हो गई थी। बच्चे और नौजवान आतिशबाजी खूब किए। यह क्रम मंगलवार को भी देर रात तक चला। इसके चलते जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स अर्थात वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ गया। बुधवार को यह 170 तक पहुंच गया, जो खतरनाक स्तर माना जाता है। हालांकि, रात को इसमें गिरावट देखी गई। यह घटकर 159 पर आ गया। सुबह यह 18 फीसदी की बढ़ोत्तरी पर था, जो रात आठ बजे 14.4 फीसदी अधिक था।
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ऐसे मापा जाता है एक्यूआई-
वायु गुणवत्ता सूचकांक हवा में मौजूद आठ प्रमुख प्रदूषकों के उत्सर्जन को मापकर प्राप्त किया जाता है: पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10), ओजोन (O3), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) , सीसा (Pb) और अमोनिया (NH3) उत्सर्जन। हर घंटे रीडिंग नोट की जाती है। प्रत्येक देश के वायु गुणवत्ता मानकों के आधार पर उनके वायु गुणवत्ता सूचकांक होते हैं।
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यह है एक्यूआई स्तर-
एक्यूआई स्तर-
वर्ग-
स्वास्थ्य पर प्रभाव
0-50- अच्छा/सुरक्षित- न्यूनतम प्रभाव
51-100- संतोषजनक-
संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली परेशानी का अनुभव हो सकता है।
101-200- मध्यम- प्रदूषित फेफड़ों के रोग के रोगियों को सांस लेने में असुविधा हो सकती है और हृदय रोग के रोगियों, बच्चों और वृद्धों को असुविधा का अनुभव हो सकता है।
201-300- खतरनाक- लंबे समय तक रहने पर सांस लेने में परेशानी और हृदय रोग के रोगियों को परेशानी
301-400- बहुत खराब- लंबे समय तक संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारी हो सकती है। फेफड़े और हृदय रोग वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
401-500- चिंताजनक- स्वस्थ लोगों को श्वसन संबंधी समस्याओं का अनुभव हो सकता है। फेफड़े या हृदय रोग के रोगियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हल्की शारीरिक गतिविधि के दौरान भी लोगों को स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
एक सप्ताह के वायु गुणवत्ता सूचकांक का पूर्वानुमान-
दिन- प्रदूषण का स्तर-
बुधवार- 159
बृहस्पतिवार- 160
शुक्रवार- 153
शनिवार- 154
रविवार- 159
सोमवार- 157
मंगलवार- 159
मेडिकल कॉलेज में बुधवार को बढ़ गए सांस के रोगी-
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. अनुराग शुक्ला ने बताया कि एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ने का असर दिखा है। बुधवार को ओपीडी में 100 मरीज आए, जिसमें 70 से अधिक मरीज सांस रोग से संबंधित रहे। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। डॉ. अनुराग ने बताया कि इस समय एक्यूआई बढ़ा हुआ है। इसलिए भोर और शाम के वक्त लोग टहलने से बचें। सुबह उजाला हो जाने के बाद ही टहलें तो सेहत के लिए ठीक रहा है। इसके अलावा कपड़े पूरे शरीर के पहनकर घर से निकलें।