{"_id":"68-53106","slug":"Deoria-53106-68","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुकदमों के बोझ तले तहसील कोर्ट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुकदमों के बोझ तले तहसील कोर्ट
Deoria
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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सलेमपुर। आम आदमी को त्वरित न्याय देने की शासन की मंशा पर तहसील के अधिकारी पानी फेर रहे हैं। अधिकारियों के पास न्यायालय में बैठने की फुर्सत नहीं होने से न्याय की आस टूटती नजर आ रही है। चार माह से एएसडीएम कोर्ट और डेढ़ माह से तहसीलदार न्यायिक कोर्ट खाली चल रही है। इससे न्यायालयों में मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। तहसील न्यायालयों में 2,631 मामले लंबित चल रहे हैं।
तहसील में एसडीएम, तहसीलदार, तहसीलदार न्यायिक, अपर उप जिलाधिकारी, नायब तहसीलदार भटनी और सलेमपुर छह न्यायालय चलते हैं। इसमें नायब तहसीलदार सलेमपुर, तहसीलदार न्यायिक, अपर उपजिलाधिकारी कोर्ट में अधिकारियों की तैनाती नहीं है। एएसडीएम कोर्ट में भू राजस्व के 69 और जमींदारी विनाश अधिनियम के 191, अपर तहसीलदार कोर्ट में नामांतरण के 855, 122 बी (ग्राम सभा की भूमि पर कब्जा का वाद) के 250 मामले लंबित हैं। एएसडीएम पद पर पूनम निगम की तैनाती तो की गई है लेकिन प्रशिक्षु होने के कारण न्यायालय में नहीं बैठ सकतीं। वहीं एसडीएम राजित राम प्रजापति एवं तहसीलदार सर्वेंद्र कृष्ण तिवारी को न्यायालयों में बैठने का समय नहीं मिल पा रहा है। एसडीएम कोर्ट में भू राजस्व के 140 और जमींदारी विनाश अधिनियम के 197 मामले और तहसीलदार कोर्ट में नामांतरण के 367 एवं भू राजस्व के 558 मामले लंबित हैं। प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता, वीआईपी ड्यूटी और तीज त्यौहार के चलते ये अधिकारी कोर्ट में नहीं बैठ पाते हैं। नतीजतन, न्यायिक कार्य बुरी तरफ प्रभावित हो रहा है। जिन मामलों में सुनवाई हो चुकी है, उनमें भी निर्णय नहीं हो पा रहा है। कोर्ट में आए रामसुख आैर शंभू निषाद ने बताया कि पिछले महीने भर से वह कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन हर बार उसे खाली हाथ लौटना पड़ता है। अब नहीं लगता कि न्याय मिलेगा।
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तहसील में एसडीएम, तहसीलदार, तहसीलदार न्यायिक, अपर उप जिलाधिकारी, नायब तहसीलदार भटनी और सलेमपुर छह न्यायालय चलते हैं। इसमें नायब तहसीलदार सलेमपुर, तहसीलदार न्यायिक, अपर उपजिलाधिकारी कोर्ट में अधिकारियों की तैनाती नहीं है। एएसडीएम कोर्ट में भू राजस्व के 69 और जमींदारी विनाश अधिनियम के 191, अपर तहसीलदार कोर्ट में नामांतरण के 855, 122 बी (ग्राम सभा की भूमि पर कब्जा का वाद) के 250 मामले लंबित हैं। एएसडीएम पद पर पूनम निगम की तैनाती तो की गई है लेकिन प्रशिक्षु होने के कारण न्यायालय में नहीं बैठ सकतीं। वहीं एसडीएम राजित राम प्रजापति एवं तहसीलदार सर्वेंद्र कृष्ण तिवारी को न्यायालयों में बैठने का समय नहीं मिल पा रहा है। एसडीएम कोर्ट में भू राजस्व के 140 और जमींदारी विनाश अधिनियम के 197 मामले और तहसीलदार कोर्ट में नामांतरण के 367 एवं भू राजस्व के 558 मामले लंबित हैं। प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता, वीआईपी ड्यूटी और तीज त्यौहार के चलते ये अधिकारी कोर्ट में नहीं बैठ पाते हैं। नतीजतन, न्यायिक कार्य बुरी तरफ प्रभावित हो रहा है। जिन मामलों में सुनवाई हो चुकी है, उनमें भी निर्णय नहीं हो पा रहा है। कोर्ट में आए रामसुख आैर शंभू निषाद ने बताया कि पिछले महीने भर से वह कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन हर बार उसे खाली हाथ लौटना पड़ता है। अब नहीं लगता कि न्याय मिलेगा।
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