{"_id":"68-53027","slug":"Deoria-53027-68","type":"story","status":"publish","title_hn":"वेदी उजाड़ने के विरोध्ा में धरना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वेदी उजाड़ने के विरोध्ा में धरना
Deoria
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
देवरिया। रुद्रपुर तहसील के सतुआभार की दर्जनों महिलाएं शुक्रवार को डीएम कार्यालय पर धरना दीं। वे छठ वेदी को उजाड़कर वहां गंदगी फैलाए जाने से नाराज थीं। महिलाओं का कहना था कि जिला प्रशासन जानबूझकर वेदी को हर साल उजड़वा देता है। पिछले करीब छह वर्ष से हर साल छठ पूजा को लेकर तनाव की स्थिति बनी रहती है।
धरने पर बैठी सरस्वती देवी, प्रभावती, विंदू, ज्ञांती, कुसुम आदि ने बताई कि ग्राम सभा की पोखरी के पास भीटा की जमीन है। उस जमीन पर गांव की सैकड़ों महिलाएं हर साल छठ की वेदी बनाकर पूजा पाठ करतीं हैं। पूजा के दूसरे दिन ही वेदी को उजाड़कर फेंक दिया जाता है। इसके बाद वहां फिर नटों और कुछ एक विशेष संप्रदाय के लोग बस्ती बना लेते हैं। जब छठ का पर्व आता है तो फिर उजाड़ने बसाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। पोखरी के कुछ अंश पर गांव के अजीज, नजई, घुरहू, अलाउद्दीन आदि पोखरी पर जबरन कब्जा कर लिए हैं। पिछले छह साल से जिला प्रशासन के अधिकारी इस जमीन को खाली करने के लिए आदेश तो देते हैं लेकिन इस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं होती है। यह सब संबंधित लेखपाल और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से होता है। इस अतिक्रमण के चलते पोखरी के पास छठ पूजा संभव नहीं है। वहां गंदगी इतनी है कि पूजा करने के लिए कोई खड़ा तक नहीं हो सकता। धरना पर प्रमुख रूप से बासमती सिंह, लीलावती, उमरावती, इंदू देवी, बासमती आदि शामिल रहीं। महिलाओं ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि आसपास का अन्य अतिक्रमण नहीं हटा तो वह छठ पूजा न कर प्रशासन का घेराव करने को बाध्य होंगी। महिलाओं का ज्ञापन लेने के बाद उप जिलाधिकारी ने बताया कि पोखरी के पास हुए अतिक्रमण को कल ही हटा दिया गया है। इसके बाद यदि कोई कब्जा करता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
धरने पर बैठी सरस्वती देवी, प्रभावती, विंदू, ज्ञांती, कुसुम आदि ने बताई कि ग्राम सभा की पोखरी के पास भीटा की जमीन है। उस जमीन पर गांव की सैकड़ों महिलाएं हर साल छठ की वेदी बनाकर पूजा पाठ करतीं हैं। पूजा के दूसरे दिन ही वेदी को उजाड़कर फेंक दिया जाता है। इसके बाद वहां फिर नटों और कुछ एक विशेष संप्रदाय के लोग बस्ती बना लेते हैं। जब छठ का पर्व आता है तो फिर उजाड़ने बसाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। पोखरी के कुछ अंश पर गांव के अजीज, नजई, घुरहू, अलाउद्दीन आदि पोखरी पर जबरन कब्जा कर लिए हैं। पिछले छह साल से जिला प्रशासन के अधिकारी इस जमीन को खाली करने के लिए आदेश तो देते हैं लेकिन इस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं होती है। यह सब संबंधित लेखपाल और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से होता है। इस अतिक्रमण के चलते पोखरी के पास छठ पूजा संभव नहीं है। वहां गंदगी इतनी है कि पूजा करने के लिए कोई खड़ा तक नहीं हो सकता। धरना पर प्रमुख रूप से बासमती सिंह, लीलावती, उमरावती, इंदू देवी, बासमती आदि शामिल रहीं। महिलाओं ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि आसपास का अन्य अतिक्रमण नहीं हटा तो वह छठ पूजा न कर प्रशासन का घेराव करने को बाध्य होंगी। महिलाओं का ज्ञापन लेने के बाद उप जिलाधिकारी ने बताया कि पोखरी के पास हुए अतिक्रमण को कल ही हटा दिया गया है। इसके बाद यदि कोई कब्जा करता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन