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सपा नेता आैर पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद का निधन

Deoria Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
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सलेमपुर। सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद (72) का पीजीआई लखनऊ में उपचार के दौरान शनिवार की सुबह निधन हो गया। वह आईसीयू में भर्ती थे और सांस की तकलीफ से पीड़ित थे। उनके निधन की खबर सुनते ही जनपद समेत पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। उनके आवास पर सुबह से ही लोगों का तांता लग गया। देर शाम करीब पौने सात बजे उनका शव उनके गांव महथापार पहुंचा। आज रविवार को सुबह 11 बजे से उनकी शव यात्रा सलेमपुर से भागलपुर के लिए रवाना होगी।
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निधन की खबर सुनकर समाजवादी पार्टी की रामपुर कारखाना विधायक गजाला लारी एवं सयुस के राष्ट्रीय महासचिव ओपी यादव आवास पर पहुंचे। पार्टी, अन्य दलों के कार्यकर्ता और उनके करीबी सुबह से पहुंचने लगे। आवास पर भारी संख्या में मौजूद लोग शव आने का इंतजार कर रहे थे और मोबाइल से पल पल की लोकेशन ले रहे थे। विधायक गजाला ने उनके निधन को समाजवादी पार्टी के लिए अपूर्णनीय क्षति बताया। प्रधान संघ अध्यक्ष राम सूरत कुशवाहा, भीम सिंह, सूरज यादव, जंग बहादुर पाल, अशोक यादव, बलवीर सिंह दादा समेत भारी संख्या में सपा कार्यकर्ताओं ने गहरा शोक प्रकट किया। बापू इंटर कालेज के प्रधानाचार्य हरिहरनाथ तिवारी की अध्यक्षता तो कांग्रेस कार्यालय पर ब्लाक डा. धर्मेंद्र पांडेय की अध्यक्षता में शोक प्रकट किया गया। नगर पंचायत कार्यालय में अध्यक्ष देवंती देवी, पूर्व चेयरमैन ओमप्रकाश यादव, पूर्व सभासद सुरेश गुप्ता समेत तमाम सभासदों ने शोक प्रकट किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र प्रसाद मिश्र की अध्यक्षता में शोक सभा में श्रद्धांजलि दी गई। लोहरौली के डीबीएम समाज कल्याण लघु माध्यमिक विद्यालय लोहरा बभनौली के प्रबंधक धवंतरी मिश्र की अध्यक्षता में शोक प्रकट किया गया। निधन की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव महथापार में उनके शुभ चिंतकों की भींड़ उमड़ गई। इस दौरान बांसगांव के सांसद व भाजपा नेता कमलेश पासवान, सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामाश्रय विश्वकर्मा, सपा महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष लीलावती कुशवाहा, वैरिया के विधायक जय प्रकाश अंचल, कोआपरेटिव बैंक के चेयर मैन ओम प्रकाश मौर्या, पूर्व चेयरमैन रमेश वर्मा, आनंद यादव आदि लोग पहुंचे। रुद्रपुर में सपा के पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद के निधन पर रुद्रपुर में सपाइयों ने शोकसभा आयोजित कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी। उनके निधन पर पूर्व विधायक मुक्तिनाथ यादव, हरेंद्र सिंह त्यागी, रामकेवल यादव, प्रदीप यादव, पूर्व शब्बीर अहमद, सुशील कुमार आदि ने शोक प्रकट किया।
अंतिम दर्शन को उमड़ा जन सैलाब
d अमर उजाला नेटवर्क
देवरिया। हरिकेवल प्रसाद के निधन की खबर लगते ही राजनीतिक दलों में शोक की लहर दौड़ गई। देर शाम को उनका पार्थिव शरीर कचहरी रोड स्थित सपा कार्यालय पर लाया गया। जहां अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। यहां से शव उनके गांव माथापार ले जाया गया। राज्यसभा सदस्य मोहन सिंह और कबीना मंत्री कामेश्वर उपाध्याय, ब्रम्हाशंकर त्रिपाठी ने भी शोक व्यक्त किया।
कार्यालय पर सपा जिलाध्यक्ष रामईकबाल यादव, पूर्व सांसद रामनरेश कुशवाहा, एमएलसी रामसुंदर दास निषाद, पूर्व विधायक रामछबिला मिश्र, दीनानाथ कुशवाहा, रुद्रप्रताप सिंह, सुरेश यादव, स्वामीनाथ भाई, रविन्द्र प्रताप मल्ल, स्वामीनाथ यादव, उमेश नारायण शाही, छेदीलाल यादव ने श्रद्धांजलि दी। उधर उनके निधन की खबर लगते ही पूर्व सांसद बालेश्वर यादव, दयाशंकर यादव, चंद्रभूषण सिंह यादव, विरेन्द्र कुमार यादव ने शोक व्यक्त किया है। सपा नेता संतोष सिंह लारी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। रामपुर कारखाना विधानसभा में बैठक कर व्यास यादव, इस्माइल अंसारी, मुन्ना अंसारी, लतीफ खां समेत सैकड़ों लोगों ने शोक व्यक्त किया। समाजवादी युवजन सभा के कार्यकर्ताओं ने दो मिनट मौन रखकर अपने नेता को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मनीष सिंह, राजन सिंह श्रीनेत समेत दर्जनों लोग उपस्थित रहे। दीवानी न्यायालय परिसर में सुभाष चंद्र राव, फैजान आलम, धर्मनाथ, शत्रुजीत राव, राधेश्याम पाठक ने श्रद्धांजलि दी। बसपा सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने भी हरिकेवल प्रसाद के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। बसपा एमएलसी संजीव द्विवेदी उर्फ रामू, जिला पंचायत अध्यक्ष बालेश्वरी देवी, नगरपालिका अध्यक्ष अलका सिंह, बसपा के पूर्व एमएलसी श्रीनाथ एडवोकेट, प्रधानाचार्य डा. अजय मणि त्रिपाठी, कृष्ण मोहन यादव, अमरजीत यादव, संजय सिंह, जनार्दन कुशवाहा, अंबिका यादव और नपा सभासद रमेश मल्ल ने दुख व्यक्त किया है। लोकतंत्र रक्षक सेनानी कल्याण समिति ने शोेक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसमें रमजान अली, विरेन्द्र चतुर्वेदी, रज्जन तिवारी, प्रेमनारायण लाल सुभाष चंद्र उपाध्याय, भुटेला प्रसाद शामिल रहे। जिपस कमलेश पांडेय, अशोक यादव, ओमप्रकाश गौतम, अजय राय समेत सभी सदस्यों ने शोक व्यक्त किया है।
पैतृक गांव में रो पड़े लोग
बरहज/मरकड़ा। पूर्व सांसद व सपा के वरिष्ठ नेता हरिकेवल प्रसाद के पैतृक गांव माथापार में उनके निधन का समाचार मिलते ही सन्नाटा फैल गया। गांव के लोग उनकी घर की ओर चल पड़े । इसी गांव की माटी में पले बढ़े पूर्व सांसद को गांव के लोगों ने पहली बार निर्विरोध अपना प्रधान चुना। गांव के बीस सालों तक प्रधान रहे। इस दौरान सलेमपुर के विधायक चुने गए। उनके छोटे भाई रामनरेश कुशवाहा उनकी यादों को ताजा करते हुए रो पड़े। बताते हैं कि बचपन से ही समाजसेवा की ललक रही। करौंता प्राथमिक विद्यालय से कक्षा पांच की पढ़ाई करने के बाद बाबा शोभामणि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चेरो बरठी में पढ़ने गए पर मन नहीं लगा। पढ़ाई छोड़ उग्रसेन सिंह और मोहर भाई के साथ लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़ गये। लोकनायक और उग्रसेन सिंह को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। दोनों के आदर्श को समाज में पहुंचाने के ध्येय से माथापार और लार रोड में उनके नाम से विद्यालय की स्थापना की। प्रत्येक साल 11 अक्टूबर को लोकनायक जयंती समारोह पूर्व अपने गांव मनाते थे।
आज भी याद है चारपाई आंदोलन
d अमर उजाला नेटवर्क
सलेमपुर। 70 के दशक में जमींदारों का समाज में दबदबा था। उस समय गांवों में कमजोर वर्ग के लोग जमींदारों के सामने चारपाई पर बैठने की साहस नहीं कर पाते थे। यदि कोई साहस करता था तो उसे जमींदारों के जुल्म का शिकार बनना पड़ता था। ऐसा ही वाकया सलेमपुर क्षेत्र के बरडीहा परशुराम गांव में हुआ।
उरदौली के आजाद चौहान बताते हैं कि बरडीहा परशुराम गांव के प्रभुनाथ चौरसिया के दरवाजे पर कुछ रिश्तेदार आए थे, जो चारपाई पर बैठे थे। उस समय गांव के जमींदार उधर से गुजरे तो उन्हें वह नागवार लगा और प्रभुनाथ के रिश्तेदारों से दुर्व्यवहार किया। इसकी जानकारी जब हरिकेवल प्रसाद को हुई तो उन्होंने अपने राजनैतिक गुरु उग्रसेन को बताया। अपने गुरू के साथ मिलकर मंत्रणा की और चारपाई आंदोलन की रणनीति बनाई। इलाके के कमजोर वर्ग के लोगों को चारपाई के साथ लेकर बरडीहा परशुराम गांव पहुंचे और पूरे गांव में चारपाई डालकर आंदोलन चलाया। उस समय यह आंदोलन का तरीका काफी मशहूर हुआ। ऐसी कई घटनाएं हैं जो आज भी लोगों के जेहन में हैं।
और धोती-कुर्ते में गए जिम
सलेमपुर। वर्ष 1991-92 की बात है। नई दिल्ली के जिम खाना क्लब में अंग्रेजों के जमाने का बना ड्रेस कोड का नियम लागू था। उस क्लब में बिना पैंट शर्ट के किसी भी व्यक्ति का आना प्रतिबंधित था। हरिकेवल प्रसाद बतौर सांसद उस क्लब में धोती कुर्ता पहनकर गए तो क्लब संचालक ने रोक दिया। यह बात उन्हें नागवार लगी। उन्होंने दस अन्य सांसदों को लेकर क्लब में जबरन प्रवेश कर ड्रेस कोड के नियम को तोड़ा। अंतत: वह ड्रेस कोड के नियम को बदलवाने में कामयाब रहे। उनका कहना था कि गांधी और डा. लोहिया के देश में धोती कुर्ता प्रतिबंधित कैसे हो सकता है?
गरीबों के पुरोधा थे हरिकेवल
भाटपाररानी। सपा कैंप कार्यालय पर सत्यदेव यादव की अध्यक्षता में सपाइयों ने शोक प्रकट किया। नगर पंचायत कार्यालय पर अध्यक्ष सोनमती कुशवाहा की अध्यक्षता में शोक सभा की गई। बसपा के पूर्व सांसद हरिवंश सहाय ने कहा कि हरिकेवल प्रसाद गरीबों के पुरोधा थे। वह कमजोर वर्र्ग, दबे कुचलों की आवाज थे। उन्हाेंने सदा निडर होकर राजनीति की। अंतिम सांस तक लड़ते रहे। बसपा के सभा कुंवर, लोकमंच के अध्यक्ष अभय यादव, जदयू के प्रदेश सचिव गिरीश तिवारी, प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डा. टीपी सिंह, विनय आदि ने शोक प्रकट किया।

विधायक बनने के बाद बने ग्राम प्रधान
सलेमपुर। भागलपुर विकास खंड के महथापार गांव निवासी हरिकेवल प्रसाद किशोरावस्था से सामाजिक रूप से सक्रिय हुए थे। वर्ष 1954 में समाजवादी नेता राजनारायण के नेतृत्व में वाराणसी जेल गए। उस समय वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में हरिजनों के प्रवेश पर पाबंदी थी। इस आंदोलन के बाद वह राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हो गये। 60 के दशक में फर्रूखाबाद जिला जेल में बंद डा. राम मनोहर लोहिया के समर्थन में जेल गए। जेल में ही किसान, मजदूर और दबे कुचले वर्ग की लड़ाई लड़ने की प्रेरणा मिली। आपातकाल में 19 बार जेल गए। वर्ष 1974 और 1977 में लगातार विधायक चुने गए। 1980 में विस चुनाव हारे तो 1983 में ग्राम महथापार के प्रधान का चुनाव लड़ा और जीत गए।

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