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बताकर-जताकर दें वोट, तभी सुनी जाएगी बात
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:45 PM IST
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बताकर-जताकर रहें, तभी सुनी जाएगी बात
वैश्य महासम्मेलन में बोले कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी
कहा: बिना राजनीतिक मजबूती के नहीं हो सकता समाज का उत्थान
लोकतंत्र में उसी की पूछ, जिसमें ताकत होगी: अनुपमा
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सूबे के कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी ने सामाजिक और राजनीतिक उत्थान के लिए वैश्य समाज से एकजुटता का आह्वान किया है। अब किसी से डरने, संकोच करने का वक्त नहीं है। खुलकर, बताकर, जताकर और हल्ला करते हुए अपनी राजनीतिक निष्ठा को प्रदर्शित करें, तभी हमारी बात सुनी जाएगी। राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित वैश्य महासम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री ने स्वजातीय लोगों से अपने अतीत और समाज के महापुरुषों से प्रेरणा लेने की अपील की।
करीब एक घंटे के संबोधन में कैबिनेट मंत्री ने अपने जीवन संघर्षों के जरिए लोगों में राजनीतिक चेतना जागृत करने पर जोर दिया। कई उदाहरणों से व्यापारियों की सामाजिक व मानसिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए पुरानी धारणाओं को तोड़ने को प्रेरित किया। कहा कि समस्याओं से घबराएं नहीं, उसे चुनौती के रूप में लीजिए, तभी आगे बढ़ पाएंगे। यह जरूरी नहीं कि हमें विरासत में क्या मिला है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हम विरासत में क्या छोड़कर जाएंगे। मंत्री ने कहा कि समाज निर्माण में वैश्य का रोल अहम है, मगर राजनीतिक रूप से हम पिछड़े हुए हैं। इसका एकमात्र कारण अपनी राजनीतिक निष्ठा जाहिर करने में हिचकिचाहट है। हमें यह हिचकिचाहट खत्म करनी होगी। कहा कि बिना राजनीतिक रूप से सशक्त हुए समाज की मदद नहीं कर सकते और इसके लिए हमें एकजुट होना होगा। पीएम मोदी को देश का सबसे ताकतवर नेता बताते हुए कहा कि अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए माया-मुलायम एक हो रहे हैं। ममता, लालू भी पीएम बनने का सपना देख रहे हैं, लेकिन मोदी जैसी क्षमता और व्यक्तित्व किसी का नहीं है। हमें मोदी के हाथों को मजबूत करना है। बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि वैश्य जाति ने समाज को हमेशा देने का काम किया है। सदियों तक लुटकर भी उफ नहीं की। सबसे ज्यादा टैक्स देने और सामाजिक कार्यों में सक्रियता के बाद भी यह वर्ग राजनीतिक रूप से उपेक्षित है। इसका मूल कारण समाज में एकजुटता का अभाव है। लोकतंत्र में पूछ उसी की होती है, जिसमें ताकत होती है। इसके लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि अगर बंटोगे तो मिट जाओगे और अगर जुड़ोगे तो मिटा दोगे। गोरखपुर के महापौर सीताराम जायसवाल ने वैश्य समाज के उपवर्गों के बीच रोटी-बेटी के संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। कहा कि अधिकार चाहिए तो लड़ना होगा, भीख मांगने से कुछ नहीं मिलता। सम्मेलन की अध्यक्षता वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अजय केशरी व संचालन अरविंद गुप्ता ने किया। कार्यक्रम संयोजक प्रदेश उपाध्यक्ष हरेंद्र जायसवाल ने स्वागत उद्बोधन किया। इस मौके पर अमर केडिया, मोहन वर्मा, नंदलाल जायसवाल, संजय केडिया, सुभाष कबाडिय़ा, अमित मोदनवाल, बैरिस्टर जायसवाल, शक्ति गुप्ता, राजेंद्र जायसवाल, पवन जायसवाल, वेद प्रकाश, संजय केशरी, धर्मवीर गुप्ता, सरिता देवी, रामचंद्र जायसवाल, अरुण बरनवाल, विनोद जायसवाल, राजकुमार जायसवाल, राजू वर्मा, सुनील बरनवाल, सत्येंद्र, संतोष रौनियार, रोहित, मनोज, दिलीप, कैलाश, शिवजी, संपूर्णानंद आदि मौजूद रहे। पीडी एकेडमी की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
सम्मेलन का बहाना, गूंजा चुनावी तराना
भाषणों में भाजपा सरकार का गुणगान करते रहे मंत्री
2019 में मोदी के लिए मांगा वोट
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित महासम्मेलन वैसे तो कई उपवर्गों में बंटे वैश्य समाज की एकजुटता का माध्यम रहा, मगर इस सम्मेलन के बहाने चुनावी तराने भी साफ सुने गए। अपने उद्बोधनों में अतिथि वर्ष 2019 का चुनावी ताना-बाना बुनते नजर आए। मुख्य अतिथि ने तो बाकायदे मंच से ही वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट की भी अपील कर दी। उन्होंने अपने भाषण में मोदी को देश-विदेश का ताकतवर नेता बताया। उज्ज्वला, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों-मजलूमों का हितैषी ठहराया। प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति का दावा करते हुए भाजपा सरकार को व्यापारी हितैषी बताने से भी गुरेज नहीं की। कहा कि पीएम मोदी बिना थके-बिना रुके दुनिया में भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं, ऐसे में हमारा भी दायित्व है कि हम उनका गौरव बढ़ाएं। शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी यूपी में भयमुक्त माहौल बनाने की दलील देते हुए पीएम मोदी को पांच साल और देने की अपील की। महापौर सीताराम जायसवाल ने तो यहां तक कहा कि वह पार्टी नेतृत्व से देवरिया की सीट वैश्य समाज को देने की मांग करेंगे। सत्ताधारी दल से जुड़े इन बयानों के चलते मंच पर बैठे अन्य दलों से जुड़े नेता खुद को असहज महसूस करते दिखे। यही कारण रहा कि जब सरकार का गुणगान शुरू हुआ तो मंचासीन कई लोग धीरे-धीरे खिसकने लगे। कमोवेश यही हाल पंडाल में भी दिखा। विशिष्ट अतिथि के संबोधन से पूर्व ही लोग उठकर जाने लगे थे। इसे लेकर लोगों में चर्चाएं जोरों पर थी।
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आयोजक बोले: हुआ ऐतिहासिक सम्मेलन
वैश्य महासम्मेलन के संयोजक हरेंद्र जायसवाल ने सम्मेलन को ऐतिहासिक बताया। कहा कि देवरिया और कुशीनगर के अलावा बलिया, आजमगढ़, बिहार से भी लोगों ने बढ़-चढ़कर सम्मेलन में हिस्सा लिया। सारे मतभेद भुलाकर लोग एकजुट दिखे। जायसवाल, मद्धेशिया, साहू, रौनियार, अग्रवाल, बरनवाल सहित अन्य सभी उपवर्गों ने अपनी सहभागिता निभाई और साबित किया कि देवरिया में वैश्य समाज के लोग एकजुट हैं। सम्मेलन का विरोध कर रहे चंद लोगों को आईना भी दिखा दिया है।
दूसरा गुट बोला: खाली रहीं कुर्सियां, विरोध सफल
वैश्य महासम्मेलन को चंद लोगों की राजनीतिक और व्यापारिक स्वार्थ का आयोजन ठहराते हुए कई दिनों से इसका विरोध कर रहे गुट ने सम्मेलन को पूरी तरह विफल करार दिया। शिवकुमार गुप्ता, धनोज जायसवाल, अवधेश मद्धेशिया, अशोक मद्धेशिया, मोहन गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता आदि ने कहा कि आयोजकों ने 25 हजार की भीड़ उमड़ने का दावा किया था, जबकि ढाई हजार कुर्सियां भी नहीं भरीं। मुख्य अतिथि के संबोधन से पहले ही अधिकांश लोग चले गए। कांग्रेस नेता सदन अजय कुमार लल्लू, सपा नेता जयकिशन साहू जैसे नेता ने सम्मेलन से दूरी बनाई।
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बताकर-जताकर रहें, तभी सुनी जाएगी बात
वैश्य महासम्मेलन में बोले कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी
कहा: बिना राजनीतिक मजबूती के नहीं हो सकता समाज का उत्थान
लोकतंत्र में उसी की पूछ, जिसमें ताकत होगी: अनुपमा
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सूबे के कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी ने सामाजिक और राजनीतिक उत्थान के लिए वैश्य समाज से एकजुटता का आह्वान किया है। अब किसी से डरने, संकोच करने का वक्त नहीं है। खुलकर, बताकर, जताकर और हल्ला करते हुए अपनी राजनीतिक निष्ठा को प्रदर्शित करें, तभी हमारी बात सुनी जाएगी। राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित वैश्य महासम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री ने स्वजातीय लोगों से अपने अतीत और समाज के महापुरुषों से प्रेरणा लेने की अपील की।
करीब एक घंटे के संबोधन में कैबिनेट मंत्री ने अपने जीवन संघर्षों के जरिए लोगों में राजनीतिक चेतना जागृत करने पर जोर दिया। कई उदाहरणों से व्यापारियों की सामाजिक व मानसिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए पुरानी धारणाओं को तोड़ने को प्रेरित किया। कहा कि समस्याओं से घबराएं नहीं, उसे चुनौती के रूप में लीजिए, तभी आगे बढ़ पाएंगे। यह जरूरी नहीं कि हमें विरासत में क्या मिला है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हम विरासत में क्या छोड़कर जाएंगे। मंत्री ने कहा कि समाज निर्माण में वैश्य का रोल अहम है, मगर राजनीतिक रूप से हम पिछड़े हुए हैं। इसका एकमात्र कारण अपनी राजनीतिक निष्ठा जाहिर करने में हिचकिचाहट है। हमें यह हिचकिचाहट खत्म करनी होगी। कहा कि बिना राजनीतिक रूप से सशक्त हुए समाज की मदद नहीं कर सकते और इसके लिए हमें एकजुट होना होगा। पीएम मोदी को देश का सबसे ताकतवर नेता बताते हुए कहा कि अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए माया-मुलायम एक हो रहे हैं। ममता, लालू भी पीएम बनने का सपना देख रहे हैं, लेकिन मोदी जैसी क्षमता और व्यक्तित्व किसी का नहीं है। हमें मोदी के हाथों को मजबूत करना है। बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि वैश्य जाति ने समाज को हमेशा देने का काम किया है। सदियों तक लुटकर भी उफ नहीं की। सबसे ज्यादा टैक्स देने और सामाजिक कार्यों में सक्रियता के बाद भी यह वर्ग राजनीतिक रूप से उपेक्षित है। इसका मूल कारण समाज में एकजुटता का अभाव है। लोकतंत्र में पूछ उसी की होती है, जिसमें ताकत होती है। इसके लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि अगर बंटोगे तो मिट जाओगे और अगर जुड़ोगे तो मिटा दोगे। गोरखपुर के महापौर सीताराम जायसवाल ने वैश्य समाज के उपवर्गों के बीच रोटी-बेटी के संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। कहा कि अधिकार चाहिए तो लड़ना होगा, भीख मांगने से कुछ नहीं मिलता। सम्मेलन की अध्यक्षता वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अजय केशरी व संचालन अरविंद गुप्ता ने किया। कार्यक्रम संयोजक प्रदेश उपाध्यक्ष हरेंद्र जायसवाल ने स्वागत उद्बोधन किया। इस मौके पर अमर केडिया, मोहन वर्मा, नंदलाल जायसवाल, संजय केडिया, सुभाष कबाडिय़ा, अमित मोदनवाल, बैरिस्टर जायसवाल, शक्ति गुप्ता, राजेंद्र जायसवाल, पवन जायसवाल, वेद प्रकाश, संजय केशरी, धर्मवीर गुप्ता, सरिता देवी, रामचंद्र जायसवाल, अरुण बरनवाल, विनोद जायसवाल, राजकुमार जायसवाल, राजू वर्मा, सुनील बरनवाल, सत्येंद्र, संतोष रौनियार, रोहित, मनोज, दिलीप, कैलाश, शिवजी, संपूर्णानंद आदि मौजूद रहे। पीडी एकेडमी की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
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सम्मेलन का बहाना, गूंजा चुनावी तराना
भाषणों में भाजपा सरकार का गुणगान करते रहे मंत्री
2019 में मोदी के लिए मांगा वोट
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित महासम्मेलन वैसे तो कई उपवर्गों में बंटे वैश्य समाज की एकजुटता का माध्यम रहा, मगर इस सम्मेलन के बहाने चुनावी तराने भी साफ सुने गए। अपने उद्बोधनों में अतिथि वर्ष 2019 का चुनावी ताना-बाना बुनते नजर आए। मुख्य अतिथि ने तो बाकायदे मंच से ही वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट की भी अपील कर दी। उन्होंने अपने भाषण में मोदी को देश-विदेश का ताकतवर नेता बताया। उज्ज्वला, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों-मजलूमों का हितैषी ठहराया। प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति का दावा करते हुए भाजपा सरकार को व्यापारी हितैषी बताने से भी गुरेज नहीं की। कहा कि पीएम मोदी बिना थके-बिना रुके दुनिया में भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं, ऐसे में हमारा भी दायित्व है कि हम उनका गौरव बढ़ाएं। शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने भी यूपी में भयमुक्त माहौल बनाने की दलील देते हुए पीएम मोदी को पांच साल और देने की अपील की। महापौर सीताराम जायसवाल ने तो यहां तक कहा कि वह पार्टी नेतृत्व से देवरिया की सीट वैश्य समाज को देने की मांग करेंगे। सत्ताधारी दल से जुड़े इन बयानों के चलते मंच पर बैठे अन्य दलों से जुड़े नेता खुद को असहज महसूस करते दिखे। यही कारण रहा कि जब सरकार का गुणगान शुरू हुआ तो मंचासीन कई लोग धीरे-धीरे खिसकने लगे। कमोवेश यही हाल पंडाल में भी दिखा। विशिष्ट अतिथि के संबोधन से पूर्व ही लोग उठकर जाने लगे थे। इसे लेकर लोगों में चर्चाएं जोरों पर थी।
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आयोजक बोले: हुआ ऐतिहासिक सम्मेलन
वैश्य महासम्मेलन के संयोजक हरेंद्र जायसवाल ने सम्मेलन को ऐतिहासिक बताया। कहा कि देवरिया और कुशीनगर के अलावा बलिया, आजमगढ़, बिहार से भी लोगों ने बढ़-चढ़कर सम्मेलन में हिस्सा लिया। सारे मतभेद भुलाकर लोग एकजुट दिखे। जायसवाल, मद्धेशिया, साहू, रौनियार, अग्रवाल, बरनवाल सहित अन्य सभी उपवर्गों ने अपनी सहभागिता निभाई और साबित किया कि देवरिया में वैश्य समाज के लोग एकजुट हैं। सम्मेलन का विरोध कर रहे चंद लोगों को आईना भी दिखा दिया है।
दूसरा गुट बोला: खाली रहीं कुर्सियां, विरोध सफल
वैश्य महासम्मेलन को चंद लोगों की राजनीतिक और व्यापारिक स्वार्थ का आयोजन ठहराते हुए कई दिनों से इसका विरोध कर रहे गुट ने सम्मेलन को पूरी तरह विफल करार दिया। शिवकुमार गुप्ता, धनोज जायसवाल, अवधेश मद्धेशिया, अशोक मद्धेशिया, मोहन गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता आदि ने कहा कि आयोजकों ने 25 हजार की भीड़ उमड़ने का दावा किया था, जबकि ढाई हजार कुर्सियां भी नहीं भरीं। मुख्य अतिथि के संबोधन से पहले ही अधिकांश लोग चले गए। कांग्रेस नेता सदन अजय कुमार लल्लू, सपा नेता जयकिशन साहू जैसे नेता ने सम्मेलन से दूरी बनाई।