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Deoria News: शहर में 70 यूनीपोल मिले अवैध, राजस्व निरीक्षकों को नोटिस
Thu, 22 Feb 2024 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 22 Feb 2024 12:16 AM IST
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कर्मचारियों की मिलीभगत से नगर पालिका को लग रहा चूना, जांच में हुआ खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नगर पालिका परिषद क्षेत्र में कर्मचारियों की मिलीभगत से कुछ लोग बिना अनुमति के जहां-तहां यूनिपोल लगाकर पालिका को लाखों की चपत लगा रहे हैं। सड़कों किनारे तमाम ऐसे यूनिपोल मिले हैं, जिनका कोई वारिस नहीं है।
कई ने यूनिपोल लगाने के दौरान कागजी प्रक्रिया पूरी की। लेकिन, समय अवधि बीतने के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया। इसका खुलासा कर निर्धारण अधिकारी की गोपनीय जांच में हुआ है। अवैध मिले 70 यूनिपोल को लेकर उन्होंने राजस्व निरीक्षकों से जवाब-तलब किया है।
शहर में विज्ञापन के कारोबार के लिए नगर पालिका के राजस्व विभाग में प्रार्थनापत्र देकर अनुमति लेनी होती है। इसके लिए बाकायदा बाइलाज बना है। अनुमति के बाद निर्धारित जगह पर यूनिपोल या होर्डिंग लगवाया जाता है। साथ ही 10 हजार रुपये सिक्योरिटी व 22,500 रुपये सालाना टैक्स के रूप में जमा करना होता है। यह अनुमति सिर्फ दो साल के लिए होती है। इसके बाद यूनिपोल स्वामी को 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क जमाकर अनुमति रिन्यूअल कराना होता है।
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कर निर्धारण अधिकारी की जांच में जो 70 के करीब अवैध यूनिपोल लगे हैं, उनसे सालाना आठ लाख रुपये का नुकसान सीधे उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा भी तमाम अवैध यूनिपोल और होर्डिंग शहर के विभिन्न सड़कों पर लगाए गए हैं। सभी की नंबरिंग कराई जाए तो राजस्व के नुकसान का आंकड़ा 10 लाख रुपये के पार जा सकता है।
इसमें कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो चार वैध तो चार अवैध यूनिपोल सड़कों पर लगाए हैं। विभागीय मिलीभगत से यह विज्ञापन बुक करते हैं। प्रत्येक यूनिपोल के दोनों साइड विज्ञापन का लगभग 15 हजार रुपये प्रति महीना शुल्क लिया जाता है। ऐसे में एक यूनिपोल से कमाई औसत 1.80 लाख रुपये सालाना होती है।
विकास के काम आता यह पैसा
नगर पालिका की ओर से विज्ञापन मद से हुए इस धनराशि का व्यय विकास कार्यों नाली, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति, साफ-सफाई पर किया जाता है। पालिका की आय में गृहकर, जलकर, दुकान किराया आदि के अलावा विज्ञापन मद का बड़ा योगदान है।
कोट
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 70 यूनिपोल अनधिकृत तरीके से फाउंडेशन तैयार कर, विज्ञापन लगाए गए हैं। ये नियम विरुद्ध हैं। मेरे समक्ष कोई पत्रावली प्रस्तुत नहीं की गई है। जो पुराने यूनिपोल लगे हैं, अधिकांश का समय पूरा हो चुका है। इस संबंध में राजस्व निरीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जल्द ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-शशिकला, कर निर्धारण अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नगर पालिका परिषद क्षेत्र में कर्मचारियों की मिलीभगत से कुछ लोग बिना अनुमति के जहां-तहां यूनिपोल लगाकर पालिका को लाखों की चपत लगा रहे हैं। सड़कों किनारे तमाम ऐसे यूनिपोल मिले हैं, जिनका कोई वारिस नहीं है।
कई ने यूनिपोल लगाने के दौरान कागजी प्रक्रिया पूरी की। लेकिन, समय अवधि बीतने के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया। इसका खुलासा कर निर्धारण अधिकारी की गोपनीय जांच में हुआ है। अवैध मिले 70 यूनिपोल को लेकर उन्होंने राजस्व निरीक्षकों से जवाब-तलब किया है।
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शहर में विज्ञापन के कारोबार के लिए नगर पालिका के राजस्व विभाग में प्रार्थनापत्र देकर अनुमति लेनी होती है। इसके लिए बाकायदा बाइलाज बना है। अनुमति के बाद निर्धारित जगह पर यूनिपोल या होर्डिंग लगवाया जाता है। साथ ही 10 हजार रुपये सिक्योरिटी व 22,500 रुपये सालाना टैक्स के रूप में जमा करना होता है। यह अनुमति सिर्फ दो साल के लिए होती है। इसके बाद यूनिपोल स्वामी को 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क जमाकर अनुमति रिन्यूअल कराना होता है।
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कर निर्धारण अधिकारी की जांच में जो 70 के करीब अवैध यूनिपोल लगे हैं, उनसे सालाना आठ लाख रुपये का नुकसान सीधे उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा भी तमाम अवैध यूनिपोल और होर्डिंग शहर के विभिन्न सड़कों पर लगाए गए हैं। सभी की नंबरिंग कराई जाए तो राजस्व के नुकसान का आंकड़ा 10 लाख रुपये के पार जा सकता है।
इसमें कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो चार वैध तो चार अवैध यूनिपोल सड़कों पर लगाए हैं। विभागीय मिलीभगत से यह विज्ञापन बुक करते हैं। प्रत्येक यूनिपोल के दोनों साइड विज्ञापन का लगभग 15 हजार रुपये प्रति महीना शुल्क लिया जाता है। ऐसे में एक यूनिपोल से कमाई औसत 1.80 लाख रुपये सालाना होती है।
विकास के काम आता यह पैसा
नगर पालिका की ओर से विज्ञापन मद से हुए इस धनराशि का व्यय विकास कार्यों नाली, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति, साफ-सफाई पर किया जाता है। पालिका की आय में गृहकर, जलकर, दुकान किराया आदि के अलावा विज्ञापन मद का बड़ा योगदान है।
कोट
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नगर पालिका क्षेत्र में लगभग 70 यूनिपोल अनधिकृत तरीके से फाउंडेशन तैयार कर, विज्ञापन लगाए गए हैं। ये नियम विरुद्ध हैं। मेरे समक्ष कोई पत्रावली प्रस्तुत नहीं की गई है। जो पुराने यूनिपोल लगे हैं, अधिकांश का समय पूरा हो चुका है। इस संबंध में राजस्व निरीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जल्द ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-शशिकला, कर निर्धारण अधिकारी