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एआईवी से हुई की सात पक्षियों की मौत, रिपोर्ट से प्रशासन अलर्ट
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एआईवी से हुई की सात पक्षियों की मौत, रिपोर्ट से प्रशासन अलर्ट
देवरिया/बरहज। जिले में सात पक्षियों की मौत एआईवी से होने की पुष्टि के बाद महकमा अलर्ट है। रविवार को पशुपालन विभाग की टीम ने भीड़भाड़ वाले इलाकों में खुले चिकेन शॉप को बंद कराया। बर्ड फ्लू से एहतियात बरतने के बारे में लाउडस्पीकर से प्रचार-प्रसार किया गया।
पैना मार्ग स्थित पुराना बरहज स्थित शंकर दास की कुटी के निकट एक बागीचे में करीब 10 दिन पहले पांच पक्षी मृत मिले थे। पशु विभाग ने पक्षियों का सैंपल जांच के लिए भेजा था। इनमें तीन कौओं की रिपोर्ट शनिवार को पॉजिटिव आई। आठ दिन पहले भटनी ब्लाक के खजूरी करौता में मृत मिले बगुला और 18 जनवरी को रामपुर कारखाना ब्लाक के केेसरपुर गांव में युकेलिप्टस के बागीचे में मिले तीन कौओं की मौत एआईवी से होने की पुष्टि हुई है।
रविवार को बरहज नगर में पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुशवाहा ने टीम के साथ उद्घोषक यंत्र के जरिए लोगों को जागरूक किया। स्वास्थ्य कर्मी पक्षियों के संपर्क में आने से बचने सहित अन्य एहतियात बरतने के निर्देश दिए। पैना मार्ग, तहसील, नगरपालिका, लवरछी बाईपास आदि जगहों पर ध्वनि प्रचारक यंत्र से अपील की गई। दर्जनों चिकन शॉप को बंद करने का निर्देश दिया गया। पोल्ट्री फार्म मालिकों को साफ-सफाई, बिना मॉस्क बाड़े में प्रवेश न करने आदि की हिदायत दी गई। पशु चिकित्सा प्रभारी ने पक्षियों के मृत पाए जाने पर सभी से सीयूजी नंबर 9415807942 पर सूचना देने की अपील की।
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कुक्कुट पालकों के लिए बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय
क्या करें:
नवंबर से मार्च तक पक्षियों पर विशेष सतर्कता बरतें।
बीमार पक्षियों को स्वस्थ पक्षियों से अलग रखें।
बर्ड फ्लू से पक्षी के मरने की आशंका होने पर पोस्टमार्टम न करें।
पक्षियों की अत्यधिक मृत्यु होने पर पशु चिकित्साधिकारी को सूचित करें।
कुक्कुट व कुक्कुट उत्पाद 70 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर 30 मिनट तक पकाकर खाने से बर्ड फ्लू नहीं होता।
बर्ड फ्लू संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने पर चिकित्सक की सलाह पर टेमी फ्लू दवा खाएं।
किसी प्रकार की मदद के लिए कंट्रोल रूम के दूरभाष संख्या 05568- 2741991, 2741992 एवं टोल फ्री नंबर 1800-180-5141 पर बात करें।
कुक्कुट पक्षियों के पालने के स्थान पर या आसपास जैव सुरक्षा, साफ-सफाई, डिस्इंफेक्शन सुनिश्चित करें।
पक्षियों को हैंडिल करने के बाद हाथों को डिटरजेंट/ एंटीसेप्टिक सोल्यूशन से अच्छी तरह धोएं।
क्या न करें
मृत या संक्रमित पक्षी के पास न जाएं।
कच्चे कुक्कुट या कुक्कुट उत्पाद का प्रयोग न करें।
कुक्कुट फर्म की दूरी आपस में कम से कम पांच सौ मीटर रखें।
मृत पक्षियों को खुले में न फेकें।
कुक्कुट फर्म के पास झाड़ी न उगने दें।
बाहरी एवं जंगली पक्षियों को फार्म पर न आने दें।
जहां संक्रमण हुआ हो उस स्थान के भ्रमण से बचें।
कुक्कुटों को जल मुर्गी तथा बतखों के साथ न पालें।
संक्रमित पक्षियों के बीट, लार, आंसू के संपर्क में न आएं।
बर्ड फ्लू और एआईवी में है भिन्नता
पहाड़पुर देवरिया के पोल्ट्री विशेषज्ञ डॉ. जेके चौहान ने बताया कि जिले में सात पक्षियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू नहीं है। मृत मिले कौआ और बगुलों में ‘एच-5 एन-8’ स्टेन मिले हैं। इसे एआईवी (एवियन इंफ्लुएंजा वायरस) कहा जाता है। यह पक्षी से मनुष्य में ट्रांसफर नहीं होता है। बर्ड फ्लू का स्टेन ‘एच-5 एन-वन’ होता है, जिसे पक्षियों से आदमी में आने की आशंका रहती है। इसलिए इससे ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।
जिले में बर्ड फ्लू से बचाव के एहतियात बरते जा रहे हैं। जो सात पक्षी एआईवी पॉजिटिव मिले हैं, वे बाहरी थे। जिले के किसी कुक्कुट फार्म में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। -विकास साठे, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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देवरिया/बरहज। जिले में सात पक्षियों की मौत एआईवी से होने की पुष्टि के बाद महकमा अलर्ट है। रविवार को पशुपालन विभाग की टीम ने भीड़भाड़ वाले इलाकों में खुले चिकेन शॉप को बंद कराया। बर्ड फ्लू से एहतियात बरतने के बारे में लाउडस्पीकर से प्रचार-प्रसार किया गया।
पैना मार्ग स्थित पुराना बरहज स्थित शंकर दास की कुटी के निकट एक बागीचे में करीब 10 दिन पहले पांच पक्षी मृत मिले थे। पशु विभाग ने पक्षियों का सैंपल जांच के लिए भेजा था। इनमें तीन कौओं की रिपोर्ट शनिवार को पॉजिटिव आई। आठ दिन पहले भटनी ब्लाक के खजूरी करौता में मृत मिले बगुला और 18 जनवरी को रामपुर कारखाना ब्लाक के केेसरपुर गांव में युकेलिप्टस के बागीचे में मिले तीन कौओं की मौत एआईवी से होने की पुष्टि हुई है।
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रविवार को बरहज नगर में पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुशवाहा ने टीम के साथ उद्घोषक यंत्र के जरिए लोगों को जागरूक किया। स्वास्थ्य कर्मी पक्षियों के संपर्क में आने से बचने सहित अन्य एहतियात बरतने के निर्देश दिए। पैना मार्ग, तहसील, नगरपालिका, लवरछी बाईपास आदि जगहों पर ध्वनि प्रचारक यंत्र से अपील की गई। दर्जनों चिकन शॉप को बंद करने का निर्देश दिया गया। पोल्ट्री फार्म मालिकों को साफ-सफाई, बिना मॉस्क बाड़े में प्रवेश न करने आदि की हिदायत दी गई। पशु चिकित्सा प्रभारी ने पक्षियों के मृत पाए जाने पर सभी से सीयूजी नंबर 9415807942 पर सूचना देने की अपील की।
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कुक्कुट पालकों के लिए बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय
क्या करें:
नवंबर से मार्च तक पक्षियों पर विशेष सतर्कता बरतें।
बीमार पक्षियों को स्वस्थ पक्षियों से अलग रखें।
बर्ड फ्लू से पक्षी के मरने की आशंका होने पर पोस्टमार्टम न करें।
पक्षियों की अत्यधिक मृत्यु होने पर पशु चिकित्साधिकारी को सूचित करें।
कुक्कुट व कुक्कुट उत्पाद 70 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर 30 मिनट तक पकाकर खाने से बर्ड फ्लू नहीं होता।
बर्ड फ्लू संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने पर चिकित्सक की सलाह पर टेमी फ्लू दवा खाएं।
किसी प्रकार की मदद के लिए कंट्रोल रूम के दूरभाष संख्या 05568- 2741991, 2741992 एवं टोल फ्री नंबर 1800-180-5141 पर बात करें।
कुक्कुट पक्षियों के पालने के स्थान पर या आसपास जैव सुरक्षा, साफ-सफाई, डिस्इंफेक्शन सुनिश्चित करें।
पक्षियों को हैंडिल करने के बाद हाथों को डिटरजेंट/ एंटीसेप्टिक सोल्यूशन से अच्छी तरह धोएं।
क्या न करें
मृत या संक्रमित पक्षी के पास न जाएं।
कच्चे कुक्कुट या कुक्कुट उत्पाद का प्रयोग न करें।
कुक्कुट फर्म की दूरी आपस में कम से कम पांच सौ मीटर रखें।
मृत पक्षियों को खुले में न फेकें।
कुक्कुट फर्म के पास झाड़ी न उगने दें।
बाहरी एवं जंगली पक्षियों को फार्म पर न आने दें।
जहां संक्रमण हुआ हो उस स्थान के भ्रमण से बचें।
कुक्कुटों को जल मुर्गी तथा बतखों के साथ न पालें।
संक्रमित पक्षियों के बीट, लार, आंसू के संपर्क में न आएं।
बर्ड फ्लू और एआईवी में है भिन्नता
पहाड़पुर देवरिया के पोल्ट्री विशेषज्ञ डॉ. जेके चौहान ने बताया कि जिले में सात पक्षियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू नहीं है। मृत मिले कौआ और बगुलों में ‘एच-5 एन-8’ स्टेन मिले हैं। इसे एआईवी (एवियन इंफ्लुएंजा वायरस) कहा जाता है। यह पक्षी से मनुष्य में ट्रांसफर नहीं होता है। बर्ड फ्लू का स्टेन ‘एच-5 एन-वन’ होता है, जिसे पक्षियों से आदमी में आने की आशंका रहती है। इसलिए इससे ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।
जिले में बर्ड फ्लू से बचाव के एहतियात बरते जा रहे हैं। जो सात पक्षी एआईवी पॉजिटिव मिले हैं, वे बाहरी थे। जिले के किसी कुक्कुट फार्म में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। -विकास साठे, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी