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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में 54 पद रिक्त पढ़ाई और दवाई पर छाया संकट

Sat, 15 Nov 2025 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Sat, 15 Nov 2025 11:43 PM IST
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54 posts vacant in medical college, crisis looms over education and medicine
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्सा शिक्षकों के 54 पद रिक्त हैं। इससे पढ़ाई और दवाई पर संकट गहरा गया है। वहीं विभागों में मानक के अनुसार शिक्षक नहीं होने से पीजी कोर्सेस की मान्यता भी नहीं मिल पा रही है।
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मेडिकल कॉलेज में भौतिक संसाधनों के साथ साथ मानव संसाधन की भी भारी कमी है। काॅलेज में चिकित्सा शिक्षकों के 98 पद के सापेक्ष 54 पद रिक्त हैं। परिणास्वरूप पढ़ाई के साथ इलाज में भी कठिनाई आ रही है। काॅलेज में संचालित 22 विभागों में से 14 में प्रोफेसर नहीं हैं। वहीं एसोसिएट प्रोफेसर के 24 पद खाली हैं।
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साथ ही असिस्टेंट प्रोफेसर के 16 पद रिक्त हैं। इसमें हड्डी रोग विभाग, नेत्र रोग, स्त्री व प्रसूति रोग विभाग, एनेस्थिसियोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसीन, जनरल मेडिसीन, जनरल सर्जरी, बालरोग जैसे क्लीनिकल विभागों मेंं प्रोफेसर समेत अन्य चिकित्सा शिक्षकों की कमी का सीधा असर रोगियों के उपचार पर पड़ रहा है। सीनियर और अनुभवी चिकित्सकों की कमी से गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना मेडिकल काॅलेज की मजबूरी बन गई है।
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वहीं मरीजों की भारी भीड़ के बावजूद सीमित संख्या में ओपीडी का संचालन हो रहा है। इससे मरीजों की लंबी कतार तो लगती ही है, चिकित्सक चाहकर भी मरीज पर पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। मरीजों की संख्या का दबाव इसके पीछे बड़ी वजह रहती है।
चिकित्सा शिक्षकों की कमी से पीजी कोर्स शुरू करने में दिक्कत : मेडिकल काॅलेज में करीब दो वर्ष पूर्व चार विषयों बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी और एनॉटॉमी विषयों में पीजी कोर्स शुरू करने की योजना बनाई गई थी पर एनएमसी से केवल एनॉटॉमी विषय में पीजी कोर्स शुरू करने की मान्यता मिली।
वहीं क्लीनिक विषयों में प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर की कमी के चलते काॅलेज प्रशासन ने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया। अगर इन विषयों में मानक के अनुसार प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर तैनात होते तो अन्य संसाधनों की समीक्षा कर काॅलेज प्रशासन मेडिसीन, सर्जरी, नेत्र रोग विभाग, नाक कान गला रोग, हड्डी रोग, मानसिक रोग, पैथालॉजी, रेडियोलॉजी समेत अनेक महत्वपूर्ण विभागों में भी पीजी कोर्स शुरू करने का प्रयास कर सकता था।
इन विषयों में चिकित्सा शिक्षक होने से मेडिकल काॅलेज में आने वाले मरीजों को भी लाभ मिलता। खुद स्ट्रेचर खींचते हैं परिजन : मेडिकल काॅलेज में मरीजों का स्ट्रेचर और व्हीलचेयर परिजन खुद खींचते हैं।

चाहे इमरजेंसी हो या वार्ड हर जगह जरूरत पर परिजन ही मरीजोंं का स्ट्रेचर खींचते हैं। अगर मरीज के साथ कोई तीमारदार न हो तो उसकी परेशानी बढ़ जाती है। उसे दूसरे मरीजों के तीमारदारों से मदद मांगनी पड़ती है।
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