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बहनों से वादा नहीं निभा सके मुन्नीलाल
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:00 PM IST
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संपूूर्णानंद दीक्षित
भटनी। रक्षाबंधन पर घर आने का वादा भाई ने बहनों से किया था। इसके लिए बहनों ने खास तैयारी की थी। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। रक्षाबंधन के दिन भाई की जगह उसकी लाश पहुंची और दोनों बहनों का भाई की कलाई में राखी बांधने का अरमान टूट गया।
भटनी खास खौरा टोला गांव की रुक्मणि और सुंद्रावती को राखी बांधने के लिए अपने भाई मुन्नीलाल के घर आने का इंतजार था। इसके लिए एक सप्ताह पूर्व भाई के पास फोन कर बहनों ने गुजारिश की थी। घर से कुछ ही माह पूर्व सूरत गए मुन्नीलाल के घर आने का कोई इरादा नहीं था। बावजूद घर आने के लिए बहनों को वचन दिया। बहनों के लिए मुन्नीलाल ने काफी खरीदारी भी की थी और घर पर बहनों ने खास तैयारी में जुटीं थीं। लेकिन सूरत के एक कपड़ा मिल में काम करते वक्त मशीन के चपेट में आने से मौत हो गई। इसकी खबर मिली तो बहनों को विश्वास नहीं हुआ। रक्षाबंधन पर पूरा गांव उल्लास में डूबा था। अचानक मुन्नीलाल का शव गांव में पहुंचते ही गांव में मातम छा गया। भाई की लाश से लिपटकर दोनों बहने दहाड़े मारने लगी। इससे माहौल गमगीन हो गया। भाई की कलाई पर बांधने के लिए खरीदी गई राखी हाथों में लिए बहनें खुद को कोस रही थी। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
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भटनी। रक्षाबंधन पर घर आने का वादा भाई ने बहनों से किया था। इसके लिए बहनों ने खास तैयारी की थी। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। रक्षाबंधन के दिन भाई की जगह उसकी लाश पहुंची और दोनों बहनों का भाई की कलाई में राखी बांधने का अरमान टूट गया।
भटनी खास खौरा टोला गांव की रुक्मणि और सुंद्रावती को राखी बांधने के लिए अपने भाई मुन्नीलाल के घर आने का इंतजार था। इसके लिए एक सप्ताह पूर्व भाई के पास फोन कर बहनों ने गुजारिश की थी। घर से कुछ ही माह पूर्व सूरत गए मुन्नीलाल के घर आने का कोई इरादा नहीं था। बावजूद घर आने के लिए बहनों को वचन दिया। बहनों के लिए मुन्नीलाल ने काफी खरीदारी भी की थी और घर पर बहनों ने खास तैयारी में जुटीं थीं। लेकिन सूरत के एक कपड़ा मिल में काम करते वक्त मशीन के चपेट में आने से मौत हो गई। इसकी खबर मिली तो बहनों को विश्वास नहीं हुआ। रक्षाबंधन पर पूरा गांव उल्लास में डूबा था। अचानक मुन्नीलाल का शव गांव में पहुंचते ही गांव में मातम छा गया। भाई की लाश से लिपटकर दोनों बहने दहाड़े मारने लगी। इससे माहौल गमगीन हो गया। भाई की कलाई पर बांधने के लिए खरीदी गई राखी हाथों में लिए बहनें खुद को कोस रही थी। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
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