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उग्रसेन सेतु पर भारी वाहनों का आवागमन बंद
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बरहज के कपरवार स्थित उग्रसेन सेतु पर बना होल,
- फोटो : अमर उजाला
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बरहज। रामजानकी मार्ग पर निर्मित उग्रसेन सेतु पर सोमवार की रात करीब एक मीटर में सुराख बन गया है। पश्चिमी छोर के एक पाए के पास भी पुल पहले से क्षतिग्रस्त है। अब बीच पुल पर सुराख बनने से विभाग हरकत में आ गया। प्रशासन और विभाग के आलाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिए। इस रास्ते से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दिया गया है। दो और चार पहिया वाहनों को धीमी गति से पुल पार करने की अनुमति है। आदर्श ग्राम कपरवार स्थित उग्रसेन पुल पर सोमवार की रात एक मीटर लंबा व चौड़ा सुराख बन गया। संयोग रहा कि पुल से गुजर रहे एक वाहन चालक की उस पर नजर पड़ गई। उसने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आवागमन बंद करा दिया। पुल के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। मंगलवार को एसडीएम विनीत सिंह, सेतु निगम परियोजना प्रबंधक एसपी सिंह, पीडब्लूडी एक्सईएन डीके चौधरी, सीपी सिंह, जेई मोहनलाल गुप्ता आदि ने हृदयशंकर सिंह, हनुमान गुप्त, अजय प्रताप सिंह, शिवजी सिंह के साथ पुल का जायजा लिया। विभाग ने क्षतिग्रस्त स्थल को बैरीकेडिंग कराकर भारी वाहनों पर रोक लगा दिया है। एसडीएम ने बताया कि जल्द कार्य शुुरू कराकर आवागमन सुचारु करा लिया जाएगा।
1986 में बना था उग्रसेन पुल
बरहज। आदर्श ग्राम कपरवार के संगम तट के पास राप्ती नदी पर निर्मित उग्रसेन सेतु देवरिया और गोरखपुर को जोड़ता है। अयोध्या से जनकपुर जाने वाले रामजानकी मार्ग पर स्थित होने के कारण रोजाना हजारों वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं। उग्रसेन पुल का निर्माण 80 के दशक में शुरू हुआ। 26 दिसंबर 1986 को पुल बनकर तैयार हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्रीपति मिश्र के हाथों पुल का लोकार्पण होना था, लेकिन उसी दिन आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे एमजे रामचंद्रन का निधन हो गया था। जिससे पुल का लोकार्पण अधर में लटक गया। पुल के रास्ते गोरखपुर, बनारस, जौनपुर, आजमगढ़, बलिया और बिहार आदि जगहों के लिए लोग सफर करते हैं। देवेश सिंह, दिनेश, शत्रुघ्न सिंह आदि का कहना है कि 32 वर्ष पुराने पुल के रास्ते क्षमता से अधिक वाहनों की आवाजाही से क्षतिग्रस्त हुआ है।
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1986 में बना था उग्रसेन पुल
बरहज। आदर्श ग्राम कपरवार के संगम तट के पास राप्ती नदी पर निर्मित उग्रसेन सेतु देवरिया और गोरखपुर को जोड़ता है। अयोध्या से जनकपुर जाने वाले रामजानकी मार्ग पर स्थित होने के कारण रोजाना हजारों वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं। उग्रसेन पुल का निर्माण 80 के दशक में शुरू हुआ। 26 दिसंबर 1986 को पुल बनकर तैयार हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्रीपति मिश्र के हाथों पुल का लोकार्पण होना था, लेकिन उसी दिन आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे एमजे रामचंद्रन का निधन हो गया था। जिससे पुल का लोकार्पण अधर में लटक गया। पुल के रास्ते गोरखपुर, बनारस, जौनपुर, आजमगढ़, बलिया और बिहार आदि जगहों के लिए लोग सफर करते हैं। देवेश सिंह, दिनेश, शत्रुघ्न सिंह आदि का कहना है कि 32 वर्ष पुराने पुल के रास्ते क्षमता से अधिक वाहनों की आवाजाही से क्षतिग्रस्त हुआ है।
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