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वास्तु शास्त्र मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा

Sun, 05 May 2019 11:19 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 05 May 2019 11:19 PM IST
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वास्तु शास्त्र मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा
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वास्तु शास्त्र मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा
संस्कृत महाविद्यालय बैकुंठपुर में चल रही कार्यशाला का 11वां दिन
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। मद्रास संस्कृत महाविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश्वर मिश्र ने कहा कि वास्तुशास्त्र ज्योतिष शास्त्र के ही अंग के रूप में हमारे सामने उपस्थित होता है। वास्तु हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत प्रत्येक प्राणी इस शास्त्र से अभिभूत रहता है। प्रत्येक मनुष्य की इच्छा होती है कि एक अच्छे निवास योग्य भवन का निर्माण करें। इसमें वास्तु के अनुसार यदि भवन, गृहवाटिका, उद्यान आदि का निर्माण कराया जाए तो मनीषी केवल अपने जीवन में ही सुख प्राप्त नहीं करता, बल्कि उसके वंश की पीढ़ी भी सुखी रहती है। वह रविवार को श्री बैकुंठनाथ पवहारी संस्कृत महाविद्यालय बैकुंठपुर में ऋषि भारद्वाज ज्योतिषानुसंधान व जनकल्याण केंद्र की ओर से आयोजित 15 दिवसीय ज्योतिष-वास्तु-कर्मकांड विषयक कार्यशाला में ज्योतिष-वास्तु और कर्मकांड हमारे लिए उपयोगी कैसे? विषय पर अपने विचार रख रहे थे।

उन्होंने कहा कि धन, ऐश्वर्य, सौख्य, यश, प्रतिष्ठा, आरोग्यता सभी की प्राप्ति अच्छे वास्तु से भवन का निर्माण कर प्राप्त किया जा सकता है। वास्तुविद् को मानव कल्याणकारी भावना से युक्त होकर मनुष्य के लिए हितकारी गृहपिंड का निर्माण हिताहित वस्तुओं-पदार्थों से युक्त कर आवास करने का संकेत अवश्य करना चाहिए। काशी से आए आचार्य डॉ. निर्भय पांडेय ने कहा कि ज्योतिष आदिकाल से ही हमारे मानवोचित व्यवहार का पथ प्रदर्शक रहा है। सामान्य ज्योतिष के विचार से भद्रा हमारे उत्तर भारत में अकल्याणकारी दृष्टि से देखा जाता है। भद्रा में कोई भी कार्य करना शास्त्रोचित नहीं होता। भद्रा स्वर्गलोक और पाताललोक के लिए शुभकारी होती है, जबकि मृत्युलोक की भद्रा अकल्याणकारी होती है। इसी तरह से चंद्रमा का बिना विचार किए किसी कार्य को नहीं करना चाहिए। मनुष्य सर्विध कर्म प्रतिदिन आनेवाले अभिजीत मुहूर्त में कर सकता है। अभिजीत मुहूर्त प्रतिदिन साढ़े 10 बजे दिन से लेकर 11 बजे के आसपास तक आता है। यह सर्वविध उपकारी मुहूर्त होता है। अध्यक्षता डॉ. रामकेश्वर तिवारी, आभार प्राचार्य डॉ. योगेश चतुर्वेदी व संचालन डॉ. अजय शुक्ल ने किया। इस दौरान डॉ. मधुसूदन मणि त्रिपाठी, डॉ. कमलेश मिश्र, वकील सिंह, रामसुमेर पांडेय, सुभाष चंद्र उपाध्याय, डॉ. बुद्धिसागर पांडेय, व्यास मिश्र, शिवम मणि त्रिपाठी, मनीष मिश्र, विमलेंदु पांडेय, विवेक उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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