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मुफलिसी का कंबल ओढ़ काट रहे ठंड

Fri, 28 Dec 2018 10:39 PM IST
Harishankar Tiwari हरिशंकर तिवारी
Updated Fri, 28 Dec 2018 10:39 PM IST
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मुफलिसी का कंबल ओढ़ काट रहे ठंड
सदर रेलवे स्टेशन के आस-पास अलाव की कोई व्यवस्था होने से ठंड से ठिठुरते यात्री। - फोटो : अमर उजाला
देवरिया। सर्द हवाओं के साथ ठंड ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। गर्म कपड़ों से शरीर ढकने के बाद भी लोग ठंड से राहत नहीं पा रहे हैं। सुबह और शाम बुरा हाल है। रात में हाड़कंपाती ठंड के बावजूद राहत के इंतजाम नाकाफी हैं। अलाव जलाने की व्यवस्था सुस्त हैं तो कंबल वितरण में भी लापरवाही हावी है। दिसंबर बीतने को है, मगर प्रशासन अब तक माकूल इंतजाम कर पाने में नाकाम है। गरीब लोग पुराने कंबल से ठंड काटने को मजबूर है।
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पछुआ हवाओं के साथ ठंड ने जिले में दस्तक दे दिया है। आठ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही बर्फीली बयार लोगों को ठिठुरने को मजबूर कर रही है। आलम यह है कि स्वेटर, टोपी, जैकेट पहनने के बाद भी लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही। साधन संपन्न लोग तो हीटर, ब्लोअर की मदद से राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन सामान्य लोगों के लिए अलाव ही सहारा है। अलाव जलाने के मुकम्मल सरकारी इंतजाम नहीं होने से यह आस भी निराश कर रही है। लिहाजा सूर्यास्त होते ही लोग घरों में दुबकने में भलाई समझ रहे हैं। दूरदराज के गांव तो दूर शहरी क्षेत्र में भी अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है।
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दो दिनों में दो डिग्री लुढ़का तापमान
सर्द हवाओं के चलते पिछले दो दिनों में तापमान दो डिग्री तक लुढ़क गया है। 27 दिसंबर को अधिकतम तापमान 22 और न्यूनतम 8.4 डिग्री सेंटीग्रेड था। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेंटीग्रेड रिकॉर्ड किया गया। अधिकतम तापमान भी 21 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर नहीं चढ़ सका।
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75 किलो लकड़ी से ठंड भगा रही नगरपालिका
बीते साल ठंड में ढाई हजार क्विंटल लकड़ी जलाने का दावा करने वाली नगरपालिका इस साल रोजाना 75 किलो लकड़ी जलाकर शहरवासियों के ठंड भगा रही है। शहर में बनाए गए तीन रैन बसेरे में रोजाना 25-25 किलो लकड़ी जलवाकर महकमा कोरम पूर्ति की जा रही है। मोहल्लों में अलग से अलाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं। मालवीय रोड स्थित ओवरब्रिज के नीचे बनाए गए दो रैन बसेरे में रोजाना तीन दर्जन से अधिक मजदूर रात गुजार रहे हैं। टेंट हाउस से मंगाए हुए पुराने रजाई गद्दे बदले न जाने से दुर्गंध देने लगे हैं। इस कारण ज्यादातर लोग रैन बसेरा में सोने से ज्यादा बाहर अलाव तापकर रात गुजारना बेहतर समझ रहे हैं।


व्यवस्था पर सभासदों ने साधी चुप्पी
बोर्ड की बैठक में अलाव जलाने का हिसाब मांगने वाले सभासद अपने वार्डों में अलाव नहीं जलने पर खामोश हैं। इसका खामियाजा विभिन्न मोहल्लों में रह रहे गरीबों को भुगतना पड़ रहा है। पूरी रात ठंड झेलने के बाद शरीर गर्म करने के लिए उनके पास कोई आधुनिक संसाधन नहीं हैं। घर में इतनी लकड़ी नहीं की गैस खतम होने के बाद एक वक्त का खाना बना सकें। पालिका की ओर से अलाव की व्यवस्था नहीं होने के चलते उन्हें कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।



जैसे ठंड बढ़ रही है इंतजाम भी बढ़ाए जा रहे हैं। शहर के तीन स्थानों पर रैन बसेरा बनाकर अलाव जलवाया जा रहा है। जरूरतमंदों में कंबल वितरण किए जा रहे हैं। जरूरत के अनुसार मोहल्लों में भी अलाव की व्यवस्था की जाएगी।
- सीताराम गुप्त, एडीएम, प्रभारी ईओ नगरपालिका।
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