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हर-हर भोले से गूंजेगी दूसरी काशी
Updated Sun, 09 Jul 2017 10:27 PM IST
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रुद्रपुर (देवरिया)। पौराणिक महत्व के दुग्धेश्वर नाथ मंदिर पर सावन में महाकाल के दर्शन को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। दूसरी काशी के रूप में विख्यात महादेव की नगरी रुद्रपुर हर-हर, बम-बम से गुंजायमान रहेगी। श्रद्धालुओं के ठहराव और जलाभिषेक को प्रशासन ने मंदिर पर सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया है। सावन मेले की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस सावन में पांच सोमवार पड़ने और मास का आरंभ सोमवार से होने का विशेष महत्व बताया जा रहा है।
पद्मपुराण की व्याख्या के अनुसार दुग्धेश्वरनाथ को महाकाल के सदृश्य माना जाता है। यहां शिवलिंग जमीन से 20 फिट नीचे गहराई में है। यह स्वयंभू लिंग है। भारत में सोमनाथ के अलावा सामान्य धरातल से इतनी गहराई में शायद कहीं शिवलिंग स्थापित नहीं है। पुराणों की व्याख्या के अनुसार रुद्रपुर को हंस तीर्थ स्थल कहा गया है। विशेष पौराणिक महत्व की महाकाल की धरती पर सावन, अधिकमास और शिवरात्रि में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस बार विशेष महत्व के सावन मास को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सावन भर यहां श्रद्धालु मोक्षदायिनी सरयू से जल लेकर कावड़ लेकर पहुंचते हैं। बरहज स्थित सरयू नदी से जल लेकर कावड़िया 21 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर दुग्धेश्वरनाथ का जलाभिषेक करते हैं। बरहज से रुद्रपुर के लिए कावड़ लेकर चलने वाले श्रद्धालु महेन स्थित महेंद्रानाथ का दर्शन-पूजन करते हैं। सावन में कावड़ियों की सुविधा के लिए नगर में पथ प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था नगर पंचायत की ओर से की गई है।
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विशेष फलदायी होगा यह सावन : पं. देवेंद्र मिश्र
सावन मास के महत्व के बावत पं. देवेंद्र मिश्र ने कहा कि यह श्रावण मास विशेष फलदाई होगा। सावन मास को शिव की पूजा का मास माना जाता है। इस बार मास का शुभारंभ सोमवार से हो रहा है। कई वर्ष बाद श्रावण मास में पांच सोमवार पड़ेंगे। पांचों सोमवार को व्रत रहने वाले भक्तों पर शिव की विशेष कृपा बरसेगी।
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पद्मपुराण की व्याख्या के अनुसार दुग्धेश्वरनाथ को महाकाल के सदृश्य माना जाता है। यहां शिवलिंग जमीन से 20 फिट नीचे गहराई में है। यह स्वयंभू लिंग है। भारत में सोमनाथ के अलावा सामान्य धरातल से इतनी गहराई में शायद कहीं शिवलिंग स्थापित नहीं है। पुराणों की व्याख्या के अनुसार रुद्रपुर को हंस तीर्थ स्थल कहा गया है। विशेष पौराणिक महत्व की महाकाल की धरती पर सावन, अधिकमास और शिवरात्रि में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस बार विशेष महत्व के सावन मास को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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सावन भर यहां श्रद्धालु मोक्षदायिनी सरयू से जल लेकर कावड़ लेकर पहुंचते हैं। बरहज स्थित सरयू नदी से जल लेकर कावड़िया 21 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर दुग्धेश्वरनाथ का जलाभिषेक करते हैं। बरहज से रुद्रपुर के लिए कावड़ लेकर चलने वाले श्रद्धालु महेन स्थित महेंद्रानाथ का दर्शन-पूजन करते हैं। सावन में कावड़ियों की सुविधा के लिए नगर में पथ प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था नगर पंचायत की ओर से की गई है।
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विशेष फलदायी होगा यह सावन : पं. देवेंद्र मिश्र
सावन मास के महत्व के बावत पं. देवेंद्र मिश्र ने कहा कि यह श्रावण मास विशेष फलदाई होगा। सावन मास को शिव की पूजा का मास माना जाता है। इस बार मास का शुभारंभ सोमवार से हो रहा है। कई वर्ष बाद श्रावण मास में पांच सोमवार पड़ेंगे। पांचों सोमवार को व्रत रहने वाले भक्तों पर शिव की विशेष कृपा बरसेगी।