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भूख से परेशान बच्चे बोले:माई रे खाना में देर बा भुजवे दे...
Updated Tue, 22 Aug 2017 10:32 PM IST
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नीलांबुज मिश्र
देवरिया। भूख की छटपटाहट के बीच अपनों के इंतजार में बाढ़ पीड़ितों का दिन कट रहा है। अव्यवस्था से जूझ रहे लोगों का बरहज तहसील प्रशासन मदद करना तो दूर हाल जानने तक नहीं पहुंचा। दोपहर तक भोजन नहीं मिला था। बच्चे आंखों में आंसू लिए ‘माई रे खाना में देर बा भुजवे दे...’ की गुहार लगा रहे हैं। मजबूर मां भोजन मिलने की तसल्ली देते हुए बच्चों को सीने से लगा कर सिस्टम को कोसने लगती है।
मऊ जिले के मधुबन तहसील के चक्की मुसाडोही गांव में एक सप्ताह पूर्व घाघरा का बांध टूटने से तबाही मच गई। गांव में करीब 3000 की आबादी है। चार दिन पहले किसी तरह गांव के करीब 300 लोग बरहज तहसील के तेलियाकला के एक कॉलेज में पहुंचे। अब भी गांव की महिलाएं पानी के बीच मचान और छतों पर रहने को मजबूर हैं। 24 से अधिक नाव गांववालों को निकालने के लिए लगाई गई हैं। दिन में करीब 500 लोग यहां रह रहे हैं। रात को 200 लोग घरों की निगरानी के लिए चले जा रहे हैं। चक्की मुसाडोही से नाव के जरिए आने में करीब तीन घंटे लग रहे हैं। दिन में 12 और रात को 11 बजे पीड़ितों को भोजन मिल रहा है। दिन में 11 बजे सुनीता बेटी अर्चना, आंचल, अनुष्का के साथ बैठी थी। भूख से बेटियां परेशान थीं। मां पक रहे भोजन की ओर अंगुली दिखाकर चुप करा रही थी। अन्य बच्चे भी सुबह से पानी ही पीकर थे। गांव की ओर से आती हुई नाव दिखी तो लोगों की नजर उधर टिक गई। नाव पास आई तो उनके पति और बेटे नहीं दिखे। उनका संदेश गांववाले बताए। बाढ़ पीड़ित रामपति, सुरेश, वृद्घिचंद, इंद्रावती, प्रभावती, सरस्वती का कहना है कि गांव में लंच पैकेट की व्यवस्था नहीं है। मधुबन तहसील के लेखपाल सुरेंद्र ने बताया कि आर्थिक मदद प्रशासन की ओर से नहीं मिली है। मौखिक रूप से भोजन बनवाने की बात कही गई है।
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देवरिया। भूख की छटपटाहट के बीच अपनों के इंतजार में बाढ़ पीड़ितों का दिन कट रहा है। अव्यवस्था से जूझ रहे लोगों का बरहज तहसील प्रशासन मदद करना तो दूर हाल जानने तक नहीं पहुंचा। दोपहर तक भोजन नहीं मिला था। बच्चे आंखों में आंसू लिए ‘माई रे खाना में देर बा भुजवे दे...’ की गुहार लगा रहे हैं। मजबूर मां भोजन मिलने की तसल्ली देते हुए बच्चों को सीने से लगा कर सिस्टम को कोसने लगती है।
मऊ जिले के मधुबन तहसील के चक्की मुसाडोही गांव में एक सप्ताह पूर्व घाघरा का बांध टूटने से तबाही मच गई। गांव में करीब 3000 की आबादी है। चार दिन पहले किसी तरह गांव के करीब 300 लोग बरहज तहसील के तेलियाकला के एक कॉलेज में पहुंचे। अब भी गांव की महिलाएं पानी के बीच मचान और छतों पर रहने को मजबूर हैं। 24 से अधिक नाव गांववालों को निकालने के लिए लगाई गई हैं। दिन में करीब 500 लोग यहां रह रहे हैं। रात को 200 लोग घरों की निगरानी के लिए चले जा रहे हैं। चक्की मुसाडोही से नाव के जरिए आने में करीब तीन घंटे लग रहे हैं। दिन में 12 और रात को 11 बजे पीड़ितों को भोजन मिल रहा है। दिन में 11 बजे सुनीता बेटी अर्चना, आंचल, अनुष्का के साथ बैठी थी। भूख से बेटियां परेशान थीं। मां पक रहे भोजन की ओर अंगुली दिखाकर चुप करा रही थी। अन्य बच्चे भी सुबह से पानी ही पीकर थे। गांव की ओर से आती हुई नाव दिखी तो लोगों की नजर उधर टिक गई। नाव पास आई तो उनके पति और बेटे नहीं दिखे। उनका संदेश गांववाले बताए। बाढ़ पीड़ित रामपति, सुरेश, वृद्घिचंद, इंद्रावती, प्रभावती, सरस्वती का कहना है कि गांव में लंच पैकेट की व्यवस्था नहीं है। मधुबन तहसील के लेखपाल सुरेंद्र ने बताया कि आर्थिक मदद प्रशासन की ओर से नहीं मिली है। मौखिक रूप से भोजन बनवाने की बात कही गई है।
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