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एक शाम शहीदों के नाम
Updated Wed, 16 Aug 2017 11:55 PM IST
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देवरिया। ‘एक शाम शहीदों के नाम’ के आयोजन में धर्म गुरुओं ने देश की आजादी के लिए हिंदू-मुसलमानों के योगदान की सराहना की। कहा कि लंबे संघर्षों के बाद देेश को अंग्रेजों से छुटकारा मिला। इसके लिए सभी लोगों ने जद्दोजहद की। हिंदू-मुसलमान की एकता पर जोर दिया। नसीहत दी कि मिलकर रहें।
एक फाउंडेशन की ओर से बेलम्हा बाजार में मंगलवार की रात को आयोजित जलसा में मौलाना अहमद रजा मिस्बाही ने कहा कि आजादी की लड़ाई 1750 से शुरू हो गई थी। पटना के सादिकपुर मोहल्ला से उलेमाओं ने आजादी की आवाज बुलंद की। उलेमाओं को काले पानी की सजा दी। नेहरू ने पटना में पहुंचकर उलेमाओं की हौसला आफजाई की। अल्लामा फजले हक खैराबादी ने अंग्रेजों के खिलाफ जेहाद का फतवा दिया। कवि बादशाह तिवारी ने देश-प्रेम और बूचड़खाना के प्रतिबंध पर कविता पाठ किया। मौलाना मतीउर्रहमान कासमी ने कहा कि देश आजाद हो गया है, लेकिन कुछ ताकतें माहौल बिगाड़ रही हैं। मौलाना नियाज अहमद कासमी ने कहा कि वतन से मुहब्बत इस्लाम का हिस्सा है। इसको ठुकराने वाला इस्लाम से खारिज हो जाएगा। कारी सुहेल अहमद ने नात सुनाया। आयोजक मौलाना उबैदुल्लाह ने कहा कि आजादी का जश्न मनाते समय शहीदों की कुर्बानियों को याद रखें। इस दौरान मौलाना बदरूज्जमा, मौलाना कासिम, अब्दुल गनी नैयर, गणेश मिश्र, , शहाबुद्दीन सिद्दीकी, आरिफ सिद्दीकी पोलन, शकील सिद्दीकी, इमरान आदि रहे।
मदरसों में गूंजा देश की शान रहेगी बरकरार
देवरिया। देश के आजादी की सालगिरह अनुदानित, गैर अनुदानित मदरसों में जश्न मनाया गया। तालिब इल्मों ने देशभक्ति आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किया। बेहतर तालीम हासिल करने की अपील की। ताकि मुल्क की तरक्की में हिस्सेदारी निभा सके। मदरसा जामियतुल इस्लाम वल कुरआन मेंहाहरहंगपुर में मौलाना नियाज अहमद कासमी, एमएएच मदरसा दारूल उलूम लक्ष्मीपुर तरकुलवा में अल्ताफ हुसैन सिद्दीकी, अरबिया अंजुमन इस्लामिया में शकील सिद्दीकी, अरबिया अंजुमन रजा ए मुस्तफा बांस देवरिया में मौलाना अहमद रजा मिस्बाही, जामिया अरबिया मेराजुल उलुम देवरिया बुद्धू खान में मौलाना अब्दुल रहीम बरकाती, नरायनपुर मदरसा में वजीर सिद्दीकी, मदरसा सइदुन्निसा महुआबारी में सैदुन्निसा ने झंडारोहण किया।
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एक फाउंडेशन की ओर से बेलम्हा बाजार में मंगलवार की रात को आयोजित जलसा में मौलाना अहमद रजा मिस्बाही ने कहा कि आजादी की लड़ाई 1750 से शुरू हो गई थी। पटना के सादिकपुर मोहल्ला से उलेमाओं ने आजादी की आवाज बुलंद की। उलेमाओं को काले पानी की सजा दी। नेहरू ने पटना में पहुंचकर उलेमाओं की हौसला आफजाई की। अल्लामा फजले हक खैराबादी ने अंग्रेजों के खिलाफ जेहाद का फतवा दिया। कवि बादशाह तिवारी ने देश-प्रेम और बूचड़खाना के प्रतिबंध पर कविता पाठ किया। मौलाना मतीउर्रहमान कासमी ने कहा कि देश आजाद हो गया है, लेकिन कुछ ताकतें माहौल बिगाड़ रही हैं। मौलाना नियाज अहमद कासमी ने कहा कि वतन से मुहब्बत इस्लाम का हिस्सा है। इसको ठुकराने वाला इस्लाम से खारिज हो जाएगा। कारी सुहेल अहमद ने नात सुनाया। आयोजक मौलाना उबैदुल्लाह ने कहा कि आजादी का जश्न मनाते समय शहीदों की कुर्बानियों को याद रखें। इस दौरान मौलाना बदरूज्जमा, मौलाना कासिम, अब्दुल गनी नैयर, गणेश मिश्र, , शहाबुद्दीन सिद्दीकी, आरिफ सिद्दीकी पोलन, शकील सिद्दीकी, इमरान आदि रहे।
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मदरसों में गूंजा देश की शान रहेगी बरकरार
देवरिया। देश के आजादी की सालगिरह अनुदानित, गैर अनुदानित मदरसों में जश्न मनाया गया। तालिब इल्मों ने देशभक्ति आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किया। बेहतर तालीम हासिल करने की अपील की। ताकि मुल्क की तरक्की में हिस्सेदारी निभा सके। मदरसा जामियतुल इस्लाम वल कुरआन मेंहाहरहंगपुर में मौलाना नियाज अहमद कासमी, एमएएच मदरसा दारूल उलूम लक्ष्मीपुर तरकुलवा में अल्ताफ हुसैन सिद्दीकी, अरबिया अंजुमन इस्लामिया में शकील सिद्दीकी, अरबिया अंजुमन रजा ए मुस्तफा बांस देवरिया में मौलाना अहमद रजा मिस्बाही, जामिया अरबिया मेराजुल उलुम देवरिया बुद्धू खान में मौलाना अब्दुल रहीम बरकाती, नरायनपुर मदरसा में वजीर सिद्दीकी, मदरसा सइदुन्निसा महुआबारी में सैदुन्निसा ने झंडारोहण किया।
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