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देवसिया गांव की सुरक्षा भगवान भरोसे,अधर में लटका बजट
Updated Tue, 11 Jul 2017 10:47 PM IST
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नीलांबुज मिश्र
सलेमपुर। बाढ़ से सुरक्षा के लिए हुए नाकाफी इंतजाम कहीं तटवर्ती गांववालों पर भारी न पड़ जाए। देवसिया गांव की सुरक्षा भगवान भरोसे है। इसकी वजह शासन से 9.96 करोड़ रुपये नहीं मिलना बताया जा रहा है।
भागलपुर ब्लॉक के देवसिया गांव से कुछ ही दूरी पर घाघरा बहती है। नदी में जब पानी बढ़ता है तो देवसिया के पास कटान तेज हो जाती है। इस कारण प्रत्येक साल कई एकड़ भूमि भी नदी में समा जाती है। पिछले साल लखनऊ से बाढ़ विभाग की एक टीम ने सर्वे किया था। कटान से गांव को बचाने के लिए टीम ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया। इसकी लागत करीब 9.96 करोड़ आई। कटान रोकने के लिए 16 अदद बोल्डर कटर, बोल्डर लांचिग के अलावा जालीनुमा बोल्डर गांव के किनारे लगाना था। उसी वक्त विभाग ने धन स्वीकृति के लिए शासन को भेजा और शासन की ओर से नाबॉर्ड को भेजा गया। लेकिन अभी तक इस कार्य के लिए धन स्वीकृत नहीं हो सका। इस कारण गांववालों को इस साल भी कटान की चिंता सता रही है। इसके अलावा पिंडी और खरवरिया के पास करीब 500 मीटर बंधों के बीच गैप है। इसका निर्माण कराने और एक रेग्युलेटर लगाने के लिए 4.50 करोड़ का मांग शासन को भेजा गया है जो अधर में लटका है। इस बाबत बाढ़ खंड के एक्सईएन वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले साल ही सर्वे के बाद डिमांड बनाकर भेजा गया, धन स्वीकृत नहीं होने के कारण दोनों कार्य नहीं हुए।
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सलेमपुर। बाढ़ से सुरक्षा के लिए हुए नाकाफी इंतजाम कहीं तटवर्ती गांववालों पर भारी न पड़ जाए। देवसिया गांव की सुरक्षा भगवान भरोसे है। इसकी वजह शासन से 9.96 करोड़ रुपये नहीं मिलना बताया जा रहा है।
भागलपुर ब्लॉक के देवसिया गांव से कुछ ही दूरी पर घाघरा बहती है। नदी में जब पानी बढ़ता है तो देवसिया के पास कटान तेज हो जाती है। इस कारण प्रत्येक साल कई एकड़ भूमि भी नदी में समा जाती है। पिछले साल लखनऊ से बाढ़ विभाग की एक टीम ने सर्वे किया था। कटान से गांव को बचाने के लिए टीम ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया। इसकी लागत करीब 9.96 करोड़ आई। कटान रोकने के लिए 16 अदद बोल्डर कटर, बोल्डर लांचिग के अलावा जालीनुमा बोल्डर गांव के किनारे लगाना था। उसी वक्त विभाग ने धन स्वीकृति के लिए शासन को भेजा और शासन की ओर से नाबॉर्ड को भेजा गया। लेकिन अभी तक इस कार्य के लिए धन स्वीकृत नहीं हो सका। इस कारण गांववालों को इस साल भी कटान की चिंता सता रही है। इसके अलावा पिंडी और खरवरिया के पास करीब 500 मीटर बंधों के बीच गैप है। इसका निर्माण कराने और एक रेग्युलेटर लगाने के लिए 4.50 करोड़ का मांग शासन को भेजा गया है जो अधर में लटका है। इस बाबत बाढ़ खंड के एक्सईएन वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले साल ही सर्वे के बाद डिमांड बनाकर भेजा गया, धन स्वीकृत नहीं होने के कारण दोनों कार्य नहीं हुए।
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