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स्वच्छ, स्वस्थ, सुंदर शहर की राह पर बढ़ा देवरिया
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बाबू मोहन सिंह जिला अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। छह मार्च 2007 को जब लोकप्रिय समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ ने देवरिया में कदम रखा तो सामने चुनौतियों का पहाड़ था। जन आकांक्षाओं का भारी बोझ भी। मगर सच कहने के इसके जोश को पाठकों ने इतना प्यार दिया कि आज ‘अमर उजाला’ जन-जन की आवाज बन गया है। चाहे नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज के नामकरण का मुद्दा रहा हो या फिर जाम, अतिक्रमण, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवा में व्याप्त खामियों को दूर कराने का, ‘अमर उजाला’ ने बीते वर्ष भी जनता की बात को न सिर्फ शासन-प्रशासन के सामने बेबाकी से रखा, बल्कि उसका समाधान भी कराया।
बेशक देवरिया शहर अभी स्मार्ट भले न हुआ हो, लेकिन यह उस पथ पर आगे जरूर बढ़ा है। स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर शहर की जो कल्पना यहां के लोग अरसे से देखते आ रहे हैं, उसकी रूपरेखा बनने लगी है। तंग गलियों और सिकुड़ी सड़कों पर रेंगते शहर को फोरलेन ने रफ्तार दी है तो मेडिकल कॉलेज ने इसे नई पहचान। देवरिया विकास प्राधिकरण का गठन, सीमा विस्तार, नेशनल हाईवे, बाईपास, रिंग रोड, पॉवर प्लांट, नए औद्योगिक क्षेत्र सहित विकास से जुड़ी कई अन्य बड़ी परियोजनाएं पाइप लाइन में हैं। इनका कागजी खाका खिंच गया है। सुखद और सुनहरे भविष्य के लिए यह परियोजनाएं बड़ी सौगात साबित होंगी। हालांकि विकसित देवरिया की इस राह में कुछ रोड़े भी हैं, जिसकी टीस हर आम आदमी के मन में है। सड़कों पर अतिक्रमण, बदहाल पार्किंग और बेतहाशा जाम की समस्या का आज तक कोई समाधान नहीं ढूंढा जा सका है। इसके पीछे कारण चाहे जो हो, मगर आम जनता इसे सिर्फ शासन-प्रशासन की इच्छाशक्ति में कमी को ही दोषी मानती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अगर इन छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान ढूंढ लिया जाए तो सुविधा और सुकून के मामले में गोरखपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे महानगर के बराबर होंगे।
फोरलेन निर्माण से मिली सहूलियत
महज एक साल पहले देवरिया आए लोग फिर यहां कदम रखें तो यकीनन इस शहर को पहचान नहीं सकेंगे। फोरलेन ने शहर की सूरत को संवारा है तो रफ्तार भी दी है। चौड़ी सड़कें और रात में किनारों पर एलईडी लाइट की जगमगाती दूधिया रोशनी के बीच गुजरते वाहनों के काफिले को देखकर लगता है मानो किसी महानगर में हों। कई बारगी तो लोग दिन में भी पुराने शहर के अनुसार पता ढूंढने में गच्चा खा जाते हैं। हालांकि अभी इस ओर कई अन्य काम शेष हैं।
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साफ-सफाई का बदला तरीका
स्वच्छ भारत मिशन का असर भी यहां दिख रहा है। अब रात्रिकालीन सफाई होने लगी है। लंबे समय से अधर में लटकी डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना 11 फरवरी से परवान चढ़ गई। 15 वार्डों में कूड़ा कलेक्शन का काम शुरू हो चुका है। वैसे अभी यह व्यवस्था शुरुआती चरण में है, जिससे बाधाएं भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी बाधा तो कूड़ा निस्तारण की है। घरों से एकत्रित कूड़ा का डंप करने का अब तक विकल्प नहीं ढूंढा जा सका है, जिससे मुश्किलें बनी हुई हैं।
स्टेशन पर एस्केलेटर का शिलान्यास
सदर रेलवे स्टेशन पर वर्षों से बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट के ठहराव की मांग इस साल पूरी हो गई। इससे दिल्ली जाने वाले यात्रियों को राहत मिली है। छह महीने के लिए अस्थायी तौर पर ठहराव शुरू हुआ है। स्टेशन पर एकमात्र फुट ओवरब्रिज था। इससे यात्रियों को प्लेटफार्म नंबर एक से दो और तीन पर जाने में कठिनाई होती थी। स्टेशन के पश्चिम छोर पर पिछले दिनों एस्केलेटर का शिलान्यास पूर्व कैबिनेट मंत्री ने किया। इसके बनने से यात्रियों को सुविधा होगी।
बेसहारा पशुओं से मुक्ति
शहर की बड़ी समस्या बेसहारा और छुट्टा पशुओं की रही है। जहां-तहां खड़े होकर पशु यातायात व्यवस्था में बाधक बनते रहे हैं तो हादसों का कारण भी। इसके समाधान के लिए अस्थायी पशु आश्रय स्थल की शुरुआत हुई है। रामगुलाम टोला पूर्वी में कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत कांजी हाऊस/पशु सेल्टर होम का निर्माण अंतिम दौर में है। शासन से निर्माण पूरा कराने के लिए दो करोड़ 40 लाख की धनराशि स्वीकृत है।
अस्पताल में बढ़ीं सुविधाएं
इस साल जिले को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली तो सीटी स्कैन, कायाकल्प योजना में जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का सुंदरीकरण किया गया। इमरजेंसी और महिला अस्पताल ओपीडी के लिए नया भवन मिला। रक्त जांच की सुविधाएं बढ़ीं और जेई/एईएस के लिए दस बेड अतिरिक्त बढ़ाए गए। रजिस्ट्रेशन पर्ची और दवा वितरण की सुविधा अस्पताल कैंपस से बाहर की गई। अत्याधुनिक पोस्टमार्टम हाउस का निर्माण कराया गया। महिला अस्पताल में कंगारू मदर केयर और पीआईसीयू की सुविधा बढ़ी।
यह टीस भी बरकरार
शहर से रोजाना निकलने वाले करीब 75 टन कूड़ा निस्तारण के लिए नगर पालिका अब तक डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं कर पाया है। शहर का कूड़ा ओवरब्रिज के नीचे गिराया जाता है। समय के साथ शहर में सुविधाएं बढ़ीं तो बसावट भी तेज हुई। इन सबके बीच पार्किंग की व्यवस्था न होने से लोगों की परेशानी बनी हुई है। शहर आने वाले लोग वाहन सड़क पर खड़ा कर अपना काम निपटाते हैं।
मेडिकल कॉलेज को दिलाया देवरहा बाबा का नाम
अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए ‘अमर उजाला’ ने जनता का प्रतिनिधित्व किया तो सरकारी अमले की लापरवाही को भी बेबाकी से उजागर किया। मेडिकल कॉलेज के नामकरण को लेकर जब स्थानीय सियासत गर्म थी और अपने-अपने पक्ष के नेेताओं के नाम को वरीयता देने की दलीलें दी जा रही थी, तब ‘अमर उजाला’ ने ही सबसे पहले सिद्धपुरुष देवरहा बाबा का नाम प्रस्तावित किया था, जो जनता की आवाज बनी। इस पर 26 दिसंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुहर भी लगा दी।
बालिका गृहकांड की जांच को दी सही दिशा
पांच अगस्त की रात मां विंध्यवासिनी महिला सेवा संस्थान की ओर से संचालित बालिका गृह पर छापामार कर पुलिस ने 23 किशोरियों को बचाकर सेक्स रैकेट का पर्दाफाश करने का दावा किया था। महीनों तक यह मामला देश की सुर्खियों में रहा। देवभूमि के रूप में चर्चित देवरिया की साख पर धब्बा लगाने वाले इस मामले की जब ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की तो पुलिस की कहानी ही उल्टी निकली। पूरे मामले में सीधे तौर पर पुलिस की लापरवाही सामने आई। सबसे पहले ‘अमर उजाला’ ने ही इसकी सच्चाई से जनता को रूबरू कराया। बाद में अन्य अखबारों और शासन-प्रशासन के लोगों ने भी उसे स्वीकारते हुए जांच को उसी दिशा पर आगे बढ़ाया। नतीजा तत्कालीन डीआईजी, एसपी, कोतवाल, चौकी प्रभारी समेत कइयों पर कार्रवाई हुई।
सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहा अखबार
खबरों के अलावा सामाजिक कार्यों के प्रति रुझान होना ‘अमर उजाला’ की विशेषता को दर्शा रहा है। महिला जागरूकता, नारी सशक्तिकरण, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर आधी आबादी को मुख्यधारा में लाने का ‘अमर उजाला’ का प्रयास सराहनीय है।
-शिवशरणप्पा जीएन, सीडीओ
‘अमर उजाला’ जैसा तेवर कहीं और नहीं
‘अमर उजाला’ का जो तेवर शुरू में था वह आज भी बरकरार है। अखबार के सच लिखने का सलीका तमाम लोगों को प्रभावित करता है। ‘अमर उजाला’ हमेशा ज्वलंत मुद्दे उठाता है। अन्य सामाजिक कार्य भी लोगों के लिए प्रेरणादायक हैं।
- बसंत लाल श्रीवास्तव, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष
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बेशक देवरिया शहर अभी स्मार्ट भले न हुआ हो, लेकिन यह उस पथ पर आगे जरूर बढ़ा है। स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर शहर की जो कल्पना यहां के लोग अरसे से देखते आ रहे हैं, उसकी रूपरेखा बनने लगी है। तंग गलियों और सिकुड़ी सड़कों पर रेंगते शहर को फोरलेन ने रफ्तार दी है तो मेडिकल कॉलेज ने इसे नई पहचान। देवरिया विकास प्राधिकरण का गठन, सीमा विस्तार, नेशनल हाईवे, बाईपास, रिंग रोड, पॉवर प्लांट, नए औद्योगिक क्षेत्र सहित विकास से जुड़ी कई अन्य बड़ी परियोजनाएं पाइप लाइन में हैं। इनका कागजी खाका खिंच गया है। सुखद और सुनहरे भविष्य के लिए यह परियोजनाएं बड़ी सौगात साबित होंगी। हालांकि विकसित देवरिया की इस राह में कुछ रोड़े भी हैं, जिसकी टीस हर आम आदमी के मन में है। सड़कों पर अतिक्रमण, बदहाल पार्किंग और बेतहाशा जाम की समस्या का आज तक कोई समाधान नहीं ढूंढा जा सका है। इसके पीछे कारण चाहे जो हो, मगर आम जनता इसे सिर्फ शासन-प्रशासन की इच्छाशक्ति में कमी को ही दोषी मानती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अगर इन छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान ढूंढ लिया जाए तो सुविधा और सुकून के मामले में गोरखपुर, लखनऊ और वाराणसी जैसे महानगर के बराबर होंगे।
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महज एक साल पहले देवरिया आए लोग फिर यहां कदम रखें तो यकीनन इस शहर को पहचान नहीं सकेंगे। फोरलेन ने शहर की सूरत को संवारा है तो रफ्तार भी दी है। चौड़ी सड़कें और रात में किनारों पर एलईडी लाइट की जगमगाती दूधिया रोशनी के बीच गुजरते वाहनों के काफिले को देखकर लगता है मानो किसी महानगर में हों। कई बारगी तो लोग दिन में भी पुराने शहर के अनुसार पता ढूंढने में गच्चा खा जाते हैं। हालांकि अभी इस ओर कई अन्य काम शेष हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन का असर भी यहां दिख रहा है। अब रात्रिकालीन सफाई होने लगी है। लंबे समय से अधर में लटकी डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना 11 फरवरी से परवान चढ़ गई। 15 वार्डों में कूड़ा कलेक्शन का काम शुरू हो चुका है। वैसे अभी यह व्यवस्था शुरुआती चरण में है, जिससे बाधाएं भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी बाधा तो कूड़ा निस्तारण की है। घरों से एकत्रित कूड़ा का डंप करने का अब तक विकल्प नहीं ढूंढा जा सका है, जिससे मुश्किलें बनी हुई हैं।
स्टेशन पर एस्केलेटर का शिलान्यास
सदर रेलवे स्टेशन पर वर्षों से बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट के ठहराव की मांग इस साल पूरी हो गई। इससे दिल्ली जाने वाले यात्रियों को राहत मिली है। छह महीने के लिए अस्थायी तौर पर ठहराव शुरू हुआ है। स्टेशन पर एकमात्र फुट ओवरब्रिज था। इससे यात्रियों को प्लेटफार्म नंबर एक से दो और तीन पर जाने में कठिनाई होती थी। स्टेशन के पश्चिम छोर पर पिछले दिनों एस्केलेटर का शिलान्यास पूर्व कैबिनेट मंत्री ने किया। इसके बनने से यात्रियों को सुविधा होगी।
बेसहारा पशुओं से मुक्ति
शहर की बड़ी समस्या बेसहारा और छुट्टा पशुओं की रही है। जहां-तहां खड़े होकर पशु यातायात व्यवस्था में बाधक बनते रहे हैं तो हादसों का कारण भी। इसके समाधान के लिए अस्थायी पशु आश्रय स्थल की शुरुआत हुई है। रामगुलाम टोला पूर्वी में कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत कांजी हाऊस/पशु सेल्टर होम का निर्माण अंतिम दौर में है। शासन से निर्माण पूरा कराने के लिए दो करोड़ 40 लाख की धनराशि स्वीकृत है।
अस्पताल में बढ़ीं सुविधाएं
इस साल जिले को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली तो सीटी स्कैन, कायाकल्प योजना में जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का सुंदरीकरण किया गया। इमरजेंसी और महिला अस्पताल ओपीडी के लिए नया भवन मिला। रक्त जांच की सुविधाएं बढ़ीं और जेई/एईएस के लिए दस बेड अतिरिक्त बढ़ाए गए। रजिस्ट्रेशन पर्ची और दवा वितरण की सुविधा अस्पताल कैंपस से बाहर की गई। अत्याधुनिक पोस्टमार्टम हाउस का निर्माण कराया गया। महिला अस्पताल में कंगारू मदर केयर और पीआईसीयू की सुविधा बढ़ी।
यह टीस भी बरकरार
शहर से रोजाना निकलने वाले करीब 75 टन कूड़ा निस्तारण के लिए नगर पालिका अब तक डंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं कर पाया है। शहर का कूड़ा ओवरब्रिज के नीचे गिराया जाता है। समय के साथ शहर में सुविधाएं बढ़ीं तो बसावट भी तेज हुई। इन सबके बीच पार्किंग की व्यवस्था न होने से लोगों की परेशानी बनी हुई है। शहर आने वाले लोग वाहन सड़क पर खड़ा कर अपना काम निपटाते हैं।
मेडिकल कॉलेज को दिलाया देवरहा बाबा का नाम
अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए ‘अमर उजाला’ ने जनता का प्रतिनिधित्व किया तो सरकारी अमले की लापरवाही को भी बेबाकी से उजागर किया। मेडिकल कॉलेज के नामकरण को लेकर जब स्थानीय सियासत गर्म थी और अपने-अपने पक्ष के नेेताओं के नाम को वरीयता देने की दलीलें दी जा रही थी, तब ‘अमर उजाला’ ने ही सबसे पहले सिद्धपुरुष देवरहा बाबा का नाम प्रस्तावित किया था, जो जनता की आवाज बनी। इस पर 26 दिसंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुहर भी लगा दी।
बालिका गृहकांड की जांच को दी सही दिशा
पांच अगस्त की रात मां विंध्यवासिनी महिला सेवा संस्थान की ओर से संचालित बालिका गृह पर छापामार कर पुलिस ने 23 किशोरियों को बचाकर सेक्स रैकेट का पर्दाफाश करने का दावा किया था। महीनों तक यह मामला देश की सुर्खियों में रहा। देवभूमि के रूप में चर्चित देवरिया की साख पर धब्बा लगाने वाले इस मामले की जब ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की तो पुलिस की कहानी ही उल्टी निकली। पूरे मामले में सीधे तौर पर पुलिस की लापरवाही सामने आई। सबसे पहले ‘अमर उजाला’ ने ही इसकी सच्चाई से जनता को रूबरू कराया। बाद में अन्य अखबारों और शासन-प्रशासन के लोगों ने भी उसे स्वीकारते हुए जांच को उसी दिशा पर आगे बढ़ाया। नतीजा तत्कालीन डीआईजी, एसपी, कोतवाल, चौकी प्रभारी समेत कइयों पर कार्रवाई हुई।
सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहा अखबार
खबरों के अलावा सामाजिक कार्यों के प्रति रुझान होना ‘अमर उजाला’ की विशेषता को दर्शा रहा है। महिला जागरूकता, नारी सशक्तिकरण, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर आधी आबादी को मुख्यधारा में लाने का ‘अमर उजाला’ का प्रयास सराहनीय है।
-शिवशरणप्पा जीएन, सीडीओ
‘अमर उजाला’ जैसा तेवर कहीं और नहीं
‘अमर उजाला’ का जो तेवर शुरू में था वह आज भी बरकरार है। अखबार के सच लिखने का सलीका तमाम लोगों को प्रभावित करता है। ‘अमर उजाला’ हमेशा ज्वलंत मुद्दे उठाता है। अन्य सामाजिक कार्य भी लोगों के लिए प्रेरणादायक हैं।
- बसंत लाल श्रीवास्तव, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष