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बहोरा दलपतपुर में नहीं थम रही तबाही
Updated Wed, 20 Sep 2017 10:59 PM IST
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रुद्रपुर। दोआबा के 52 गांवों में 22 दिनों तक कोहराम मचाने वाली नदियों का जलस्तर नीचे जाने के बाद भी कुछ गांवों में तबाही थमने का नाम नहीं ले रही। दोआबा के दो लाख लोगों को भूखमरी के कगार पर पहुंचा चुकी नदी अब तटवर्ती गांवों में कटान कर रही है। गोर्रा नदी के तट पर बसा बहोरा दलपतपुर गांव विभीषिका से उबर नहीं पा रहा हैं।
गांव का एक दशक से पीछा कर रही गोर्रा नदी दो दर्जन मकानों को लील चुकी है। इस समय नदी की तेज धारा में रामसनेही सिंह की मकान कट रहा है। आधा मकान और सहन को काट चुकी नदी अब पक्का मकान को जमींदोज करने पर तुली है। नदी की धारा उनके मकान पर सीधे ठोकर मार रही है। घर के लोग मकान खाली कर दूसरे के घर में शरण लिए हैं। इससे पहले इस गांव के रमेश मिश्र की तीन मकान कट कर नदी में समा गई। गांव की आधा से अधिक आबादी गांव छोड़कर दूसरे जगहों पर बस गई है। नदी और बंधे के बीच में बसे गांवों को बचाने के लिए प्रशासन के पास कोई योजना नहीं है। इस कारण गोर्रा नदी और बंधे के बीच बसे बहोरा दलपतपुर और नारायनपुर का अस्तित्व मिटने के कगार पर है। इन गांवों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि, बाग और मकानों को नदी अपने आगोश में ले चुकी है। साल दर साल गांव को छोटा कर रही नदी के कोप को रोकने का कोई प्रबंध नहीं होने से लोग दहशत में हैं। गांव के अश्विनी दूबे, रमेश मिश्र, रामसनेही सिंह, अवधेश मिश्र, अजित आदि ने शासन-प्रशासन से गांव को बचाने के लिए विशेष परियोजना बनाकर स्वीकृत कराने की मांग की।
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गांव का एक दशक से पीछा कर रही गोर्रा नदी दो दर्जन मकानों को लील चुकी है। इस समय नदी की तेज धारा में रामसनेही सिंह की मकान कट रहा है। आधा मकान और सहन को काट चुकी नदी अब पक्का मकान को जमींदोज करने पर तुली है। नदी की धारा उनके मकान पर सीधे ठोकर मार रही है। घर के लोग मकान खाली कर दूसरे के घर में शरण लिए हैं। इससे पहले इस गांव के रमेश मिश्र की तीन मकान कट कर नदी में समा गई। गांव की आधा से अधिक आबादी गांव छोड़कर दूसरे जगहों पर बस गई है। नदी और बंधे के बीच में बसे गांवों को बचाने के लिए प्रशासन के पास कोई योजना नहीं है। इस कारण गोर्रा नदी और बंधे के बीच बसे बहोरा दलपतपुर और नारायनपुर का अस्तित्व मिटने के कगार पर है। इन गांवों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि, बाग और मकानों को नदी अपने आगोश में ले चुकी है। साल दर साल गांव को छोटा कर रही नदी के कोप को रोकने का कोई प्रबंध नहीं होने से लोग दहशत में हैं। गांव के अश्विनी दूबे, रमेश मिश्र, रामसनेही सिंह, अवधेश मिश्र, अजित आदि ने शासन-प्रशासन से गांव को बचाने के लिए विशेष परियोजना बनाकर स्वीकृत कराने की मांग की।
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