{"_id":"5988a49c4f1c1bb01a8b4650","slug":"151502127260-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरेआम बिजली की चोरी, जिम्मेदार बेखबर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरेआम बिजली की चोरी, जिम्मेदार बेखबर
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाटपाररानी। तहसील क्षेत्र में दूरसंचार सेवाओं की उपलब्धता के लिए विभिन्न दूरसंचार कंपनियों के टॉवर लगे हैं। अधिकांश ने विद्युत आपूर्ति के लिए कनेक्शन ले रखे हैं। इसके बावजूद किसी भी टॉवर परिसर में मीटर बॉक्स नहीं लगा है।
टॉवरों के कनेक्शन व्यावसायिक कनेक्शन के अंतर्गत आते हैं। इसके लिए विद्युत विभाग बाकायदा मीटर लगाता है। तहसील क्षेत्र में करीब तीन दर्जन से अधिक दूरसंचार कंपनियों के टॉवर लगे हैं। लोगों का आरोप है कि विद्युत विभाग की मिलीभगत से बिजली विभाग को चूना लगाया जा रहा है। जगदीशपुर निवासी पंकज सिंह कुशवाहा, लोहारीबारी के सुनील यादव कहते हैं कि सरकार की मंशा ठीक है पर स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। बिजली चोरी नहीं रुक पाने से उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। विद्युत वितरण खंड अधिकारी गणेश मिश्रा बताते हैं कि नियमित मीटर जांच का कोई प्रावधान नहीं है। चोरी की सूचना पर कार्रवाई की जाती है। व्यावसायिक उपभोक्ता की चोरी पकड़े जाने पर दस हजार रुपये प्रति किलोवाट की दर से शमन शुल्क वसूलने का नियम है। अगर बकाये में कनेक्शन काटे जाने पर उपभोक्ता जोड़ लेता है तो भी जुर्माने का नियम है। टॉवरों की संख्या और उसके मीटर की जांच के सवाल पर एसडीओ संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
विज्ञापन
टॉवरों के कनेक्शन व्यावसायिक कनेक्शन के अंतर्गत आते हैं। इसके लिए विद्युत विभाग बाकायदा मीटर लगाता है। तहसील क्षेत्र में करीब तीन दर्जन से अधिक दूरसंचार कंपनियों के टॉवर लगे हैं। लोगों का आरोप है कि विद्युत विभाग की मिलीभगत से बिजली विभाग को चूना लगाया जा रहा है। जगदीशपुर निवासी पंकज सिंह कुशवाहा, लोहारीबारी के सुनील यादव कहते हैं कि सरकार की मंशा ठीक है पर स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। बिजली चोरी नहीं रुक पाने से उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। विद्युत वितरण खंड अधिकारी गणेश मिश्रा बताते हैं कि नियमित मीटर जांच का कोई प्रावधान नहीं है। चोरी की सूचना पर कार्रवाई की जाती है। व्यावसायिक उपभोक्ता की चोरी पकड़े जाने पर दस हजार रुपये प्रति किलोवाट की दर से शमन शुल्क वसूलने का नियम है। अगर बकाये में कनेक्शन काटे जाने पर उपभोक्ता जोड़ लेता है तो भी जुर्माने का नियम है। टॉवरों की संख्या और उसके मीटर की जांच के सवाल पर एसडीओ संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
विज्ञापन