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Deoria News: पीपा पुल निर्माण में एक लाख के बांड पर 13 लाख का भुगतान
Tue, 14 Jan 2025 11:22 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 14 Jan 2025 11:22 PM IST
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देवरिया। जिले के बरहज में पीपा पुल निर्माण के नाम एक लाख के बांड पर 13.13 लाख रुपये का भुगतान होने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा उस समय हुआ जब ठेकेदार ने फिर से पीपा पुल के लिए टेंडर भरने के लिए अनुभव प्रमाणपत्र जमा किया।
अनुभव प्रमाण पत्र पर पीपा पुल निर्माण के नाम पर 13 लाख रुपये भुगतान देख सभी सन्न रह गए। आरोप है कि ठेकेदार से मोटी रकम लेकर लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से एक कर्मचारी ने एक लाख के बांड पर 13.13 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। यही नहीं उसने पांच साल का लाभ ठेकेदार को देने के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में भुगतान होना दिखाया है।
इस प्रकरण को उजागर करते भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष आशुतोष मिश्रा ने मुख्य सचिव को पत्र भेज इस पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। इधर विभाग के कर्मचारी का नाम सामने आने के बार अधिकारीगण उसे बचाने में जुटे हुए है।
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प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग देवरिया में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। वर्ष 2018 में बरहज में पीपा पुल के निर्माण पर ठेकेदार को एक लाख के बांड पर 13.13 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। सबसे खास बात यह रही कि पीपा पुल के लिए अनुबंध बनाया गया था, लेकिन भुगतान सड़क पर गिट्टी डालने के कार्य का हुआ था।
इसका खुलासा उस समय हुआ जब ठेकेदार ने फिर से टेंडर डालने के लिए अपना अनुभव प्रमाणपत्र जमा किया तो उस पर एक लाख की जगह 13.13 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया था। इसकी जानकारी होते ही भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष आशुतोष मिश्रा ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर साक्ष्य के आधार पर आरोप लगाया कि अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग देवरिया द्वारा निर्गत फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र एक लाख रुपये के सापेक्ष 13.13 लाख का भुगतान कर दिया गया है। यही नहीं मोटी रकम लेकर एक कर्मी ने वर्ष 2018 के कार्य को 2019-20 में दिखाया है, ताकि ठेकेदार को पांच साल का लाभ मिल सके। इधर शिकायत करने के बाद अधिशासी अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता कर्मचारी का बचाव करने में लग गए हैं। पूर्व की तरह इस प्रकरण को भी दबाने में लगे है।
मंडल अध्यक्ष ने कहा कि अभी कुछ दिन पूर्व एक मामले में भी कर्मचारी का नाम उछाला था। अधिकारीगण उसे बचाते हुए मामले को दबा दिया था। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार जाटव को फोन लगाने पर उन्होंने फोन नहीं उठाया। दुबारा फोन करने पर उनका फोन स्विच ऑफ हो गया था।
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अनुभव प्रमाण पत्र पर पीपा पुल निर्माण के नाम पर 13 लाख रुपये भुगतान देख सभी सन्न रह गए। आरोप है कि ठेकेदार से मोटी रकम लेकर लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से एक कर्मचारी ने एक लाख के बांड पर 13.13 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। यही नहीं उसने पांच साल का लाभ ठेकेदार को देने के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में भुगतान होना दिखाया है।
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इस प्रकरण को उजागर करते भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष आशुतोष मिश्रा ने मुख्य सचिव को पत्र भेज इस पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। इधर विभाग के कर्मचारी का नाम सामने आने के बार अधिकारीगण उसे बचाने में जुटे हुए है।
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प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग देवरिया में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। वर्ष 2018 में बरहज में पीपा पुल के निर्माण पर ठेकेदार को एक लाख के बांड पर 13.13 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। सबसे खास बात यह रही कि पीपा पुल के लिए अनुबंध बनाया गया था, लेकिन भुगतान सड़क पर गिट्टी डालने के कार्य का हुआ था।
इसका खुलासा उस समय हुआ जब ठेकेदार ने फिर से टेंडर डालने के लिए अपना अनुभव प्रमाणपत्र जमा किया तो उस पर एक लाख की जगह 13.13 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया था। इसकी जानकारी होते ही भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष आशुतोष मिश्रा ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर साक्ष्य के आधार पर आरोप लगाया कि अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग देवरिया द्वारा निर्गत फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र एक लाख रुपये के सापेक्ष 13.13 लाख का भुगतान कर दिया गया है। यही नहीं मोटी रकम लेकर एक कर्मी ने वर्ष 2018 के कार्य को 2019-20 में दिखाया है, ताकि ठेकेदार को पांच साल का लाभ मिल सके। इधर शिकायत करने के बाद अधिशासी अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता कर्मचारी का बचाव करने में लग गए हैं। पूर्व की तरह इस प्रकरण को भी दबाने में लगे है।
मंडल अध्यक्ष ने कहा कि अभी कुछ दिन पूर्व एक मामले में भी कर्मचारी का नाम उछाला था। अधिकारीगण उसे बचाते हुए मामले को दबा दिया था। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार जाटव को फोन लगाने पर उन्होंने फोन नहीं उठाया। दुबारा फोन करने पर उनका फोन स्विच ऑफ हो गया था।