{"_id":"3400267003814d7600e380d9c5691144","slug":"work-will-be-restart-from-today-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज से फिर शुरू होगा काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज से फिर शुरू होगा काम
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट।
Updated Wed, 30 Sep 2015 11:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रंगदारी के लिए ढाई लाख के इनामी डकैत बबुली कोल का आतंक फिर बढ़ गया है। मानिकपुर के मऊ गुरदरी ग्राम पंचायत के बरदहा नाले पर बन रहे रपटे का काम बबुली द्वारा धमकी देकर रुकवाने के बाद एसपी ने ठेकेदार और मजदूरों को सुरक्षा का आश्वासन दिया है। इस पर ठेकेदार ने गुरुवार से पुन: काम शुरू करनेकी बात कही है।
बरदहा नाले पर क्षेत्र पंचायत के बीआरजीएफ फंड से रपटा निर्माण कराया जा रहा है। इससे एमपी की ओर से आनाजाना सुगम हो जाएगा। इसका ठेका ब्लाक प्रमुख श्याम बिहारी यादव और चुनकू त्रिपाठी लिए हैं। ब्लाक प्रमुख ने बताया कि चार दिन पहले चुनकू त्रिपाठी के मोबाइल पर फोन आया था।
संबंधित ने कहा कि वह बबुली कोल बोल रहा है। काम बंद कर कमीशन भिजवा तबहीं काम चालू होगा, नहीं तो लाशें बिछा दूंगा। ये बात फैलते ही मजदूरों ने काम करना बंद कर दिया। उन्होंने इसकी जानकारी एसओ मानिकपुर और एसपी केशव कुमार चौधरी को दी। एसपी केशव कुमार ने बताया कि एक ट्रक पीएसी निर्माणाधीन रपटे पर मजदूरों के पहुंचने और वापस जाने तक वहीं रहेगी। निर्माण कार्य बाधित नहीं होने दिया जाएगा।
विज्ञापन
लागत भी पूछी
ब्लाक प्रमुख ने बताया कि चुनकू त्रिपाठी के मोबाइल पर जब फोन आया तो रकम नहीं बताई। रपटा निर्माण की लागत जरूर पूछी। बबुली कोल ने ये भी कहा कि अगर तैं न बतइहे तो मैं जेई से पूछ लेइहौं। गौरतलब है कि रपटा निर्माण की लागत 61 लाख 70 हजार है और इसमें कुल 21 पिलर लगने हैं। इनमें आठ लग चुके हैं। निर्माण में अभी 15 से 20 दिन और लगेंगे।
पूर्व में भी की थी मारपीट
इस रपटे की रंगदारी के लिए बबुली कोल एक बार पहले भी ब्लाक प्रमुख को धमका चुका है। ब्लाक प्रमुख ने बताया कि लगभग डेढ़ महीने पहले बबुली कोल ने रंगदारी के लिए ही निर्माणस्थल पर पहुंचकर मजदूरों को जमकर मारापीटा था। मिक्सर मशीन तोड़ दी थी और लगभग पचास बोरी सीमेंट नाले में फेंक दी थी। करीब पचास हजार नुकसान हुआ था।
पाठा इलाके में ही घूम रहा गैंग
ग्रामीणों का कहना है कि बबुली और उसके गिरोह का आतंक इस समय पाठा इलाके में ही है। कोटा कदैला से मऊ गुरदरी और इटवा कुसुमही तक के गांवों में डकैत की गतिविधियां हैं। ग्रामीण भय की वजह से कुछ बताने को तैयार नहीं होते। कई बार वारदातें होने के बाद भी पुलिस को जानकारी नहीं हो पाती। गत दिनों मजदूरों को मारने-पीटने की घटना की जानकारी भी कई दिन बाद हुई थी।
विज्ञापन
बरदहा नाले पर क्षेत्र पंचायत के बीआरजीएफ फंड से रपटा निर्माण कराया जा रहा है। इससे एमपी की ओर से आनाजाना सुगम हो जाएगा। इसका ठेका ब्लाक प्रमुख श्याम बिहारी यादव और चुनकू त्रिपाठी लिए हैं। ब्लाक प्रमुख ने बताया कि चार दिन पहले चुनकू त्रिपाठी के मोबाइल पर फोन आया था।
विज्ञापन
संबंधित ने कहा कि वह बबुली कोल बोल रहा है। काम बंद कर कमीशन भिजवा तबहीं काम चालू होगा, नहीं तो लाशें बिछा दूंगा। ये बात फैलते ही मजदूरों ने काम करना बंद कर दिया। उन्होंने इसकी जानकारी एसओ मानिकपुर और एसपी केशव कुमार चौधरी को दी। एसपी केशव कुमार ने बताया कि एक ट्रक पीएसी निर्माणाधीन रपटे पर मजदूरों के पहुंचने और वापस जाने तक वहीं रहेगी। निर्माण कार्य बाधित नहीं होने दिया जाएगा।
विज्ञापन
लागत भी पूछी
ब्लाक प्रमुख ने बताया कि चुनकू त्रिपाठी के मोबाइल पर जब फोन आया तो रकम नहीं बताई। रपटा निर्माण की लागत जरूर पूछी। बबुली कोल ने ये भी कहा कि अगर तैं न बतइहे तो मैं जेई से पूछ लेइहौं। गौरतलब है कि रपटा निर्माण की लागत 61 लाख 70 हजार है और इसमें कुल 21 पिलर लगने हैं। इनमें आठ लग चुके हैं। निर्माण में अभी 15 से 20 दिन और लगेंगे।
पूर्व में भी की थी मारपीट
इस रपटे की रंगदारी के लिए बबुली कोल एक बार पहले भी ब्लाक प्रमुख को धमका चुका है। ब्लाक प्रमुख ने बताया कि लगभग डेढ़ महीने पहले बबुली कोल ने रंगदारी के लिए ही निर्माणस्थल पर पहुंचकर मजदूरों को जमकर मारापीटा था। मिक्सर मशीन तोड़ दी थी और लगभग पचास बोरी सीमेंट नाले में फेंक दी थी। करीब पचास हजार नुकसान हुआ था।
पाठा इलाके में ही घूम रहा गैंग
ग्रामीणों का कहना है कि बबुली और उसके गिरोह का आतंक इस समय पाठा इलाके में ही है। कोटा कदैला से मऊ गुरदरी और इटवा कुसुमही तक के गांवों में डकैत की गतिविधियां हैं। ग्रामीण भय की वजह से कुछ बताने को तैयार नहीं होते। कई बार वारदातें होने के बाद भी पुलिस को जानकारी नहीं हो पाती। गत दिनों मजदूरों को मारने-पीटने की घटना की जानकारी भी कई दिन बाद हुई थी।