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महिलाओं लहराया परचम 335 मे 131 महिला प्रधान
ब्यूरो अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Tue, 15 Dec 2015 11:10 PM IST
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किसी भी मुकाम में महिला शक्ति के बिना सफलता मुश्किल
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है। आधुनिक युग में प्रत्येक क्षेत्र में जब महिलाएं सफलता के झंडे गाड़
रहीं है। तो चुनाव में भला कैसे पीछे रह सकती हैं।
प्रधान पद के चुनाव में एक महिला प्रत्याशी ने पहली बार चुनाव लड़ा और पहली बार मतदान किया और पूरे बुंदेलखंड में सर्वाधिक मतों से विजयी हुई। इसके अलावा देश की आधाी आबादी ने आरक्षण की सीटों के अलावा भी अन्य सामान्य व आरक्षण की सीटों पर अपना जलवा बिखेरा।
जिले में 335 ग्राम पंचायत की सीटों में 85 महिलाओं के लिए आरक्षित थी। इससे भी आगे निकलकर 131 महिलाएं प्रधान बन गईं। देश में इन दिनों बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में प्रधान पद के लिए जीती महिलाएं भी गांव व समाज के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आईं। अब तक ग्रामीण महिलाओं को चुनाव अथवा घर के बाहर के कामों से दूर रखा जाता था।
इस बार के परिणाम ने सबकी आंखे खोल दी। जिले में प्रधान पद के लिए 85 सीटों का आरक्षण था। पुरूष वर्ग मजबूरी में इन सीटों से महिलाओं को लड़ा रहा था, लेकिन अब जो परिणाम सामने आया उसने इस भ्रम को खत्म कर दिया कि महिलाएं सिर्फ आरक्षण वाली सीट पर ही जीतेंगी।
आंकडे़ बताते हैं कि पुरूष व सभी वर्गो के लिए घोषित सीट पर भी महिलाओं ने हिम्मत कर नामांकन किया और सफलता के झंडे गाड़ दिए। कुल 335 प्रधानों के बीच अबकी 85 नहीं 131 महिलाएं प्रधान बन चुकी हैं।
मानिकपुर ब्लाक के भौंरी सीट पर स्नातक पास आरती मिश्रा पत्नी मनीष मिश्रा का पहली बार मतदाता सूची में नाम आया। इस बार पहली बार ही प्रधान पद के लिए नामांकन किया था।
कुल दो हजार 617 मत पाकर उन्होंने रिकार्ड बना दिया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को दो हजार 204 मतों के विशाल अंतर से हराया। इतनी बडी जीत बुंदेलखंड में रिकार्ड है। आरती के ससुर स्व. नर्वद मिश्रा व उनके पिता स्व.जानकीशरण इस गांव के लगभग 40 वर्षों तक प्रधान रह चुके हैं।
प्रधान पद के चुनाव में एक महिला प्रत्याशी ने पहली बार चुनाव लड़ा और पहली बार मतदान किया और पूरे बुंदेलखंड में सर्वाधिक मतों से विजयी हुई। इसके अलावा देश की आधाी आबादी ने आरक्षण की सीटों के अलावा भी अन्य सामान्य व आरक्षण की सीटों पर अपना जलवा बिखेरा।
जिले में 335 ग्राम पंचायत की सीटों में 85 महिलाओं के लिए आरक्षित थी। इससे भी आगे निकलकर 131 महिलाएं प्रधान बन गईं। देश में इन दिनों बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में प्रधान पद के लिए जीती महिलाएं भी गांव व समाज के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आईं। अब तक ग्रामीण महिलाओं को चुनाव अथवा घर के बाहर के कामों से दूर रखा जाता था।
इस बार के परिणाम ने सबकी आंखे खोल दी। जिले में प्रधान पद के लिए 85 सीटों का आरक्षण था। पुरूष वर्ग मजबूरी में इन सीटों से महिलाओं को लड़ा रहा था, लेकिन अब जो परिणाम सामने आया उसने इस भ्रम को खत्म कर दिया कि महिलाएं सिर्फ आरक्षण वाली सीट पर ही जीतेंगी।
आंकडे़ बताते हैं कि पुरूष व सभी वर्गो के लिए घोषित सीट पर भी महिलाओं ने हिम्मत कर नामांकन किया और सफलता के झंडे गाड़ दिए। कुल 335 प्रधानों के बीच अबकी 85 नहीं 131 महिलाएं प्रधान बन चुकी हैं।
मानिकपुर ब्लाक के भौंरी सीट पर स्नातक पास आरती मिश्रा पत्नी मनीष मिश्रा का पहली बार मतदाता सूची में नाम आया। इस बार पहली बार ही प्रधान पद के लिए नामांकन किया था।
कुल दो हजार 617 मत पाकर उन्होंने रिकार्ड बना दिया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को दो हजार 204 मतों के विशाल अंतर से हराया। इतनी बडी जीत बुंदेलखंड में रिकार्ड है। आरती के ससुर स्व. नर्वद मिश्रा व उनके पिता स्व.जानकीशरण इस गांव के लगभग 40 वर्षों तक प्रधान रह चुके हैं।