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निकासी सीमा तय होने से स्टांप वेंडर नाराज
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Fri, 26 Feb 2016 11:54 PM IST
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कोषागार से प्रति सप्ताह स्टांप निकासी सीमा तय होने से बाजार में स्टांप की कमी हो रही है। इसका विरोध करते हुए शुक्रवार को स्टांप वेंडरों ने हड़ताल कर दी और तहसील परिसर में धरना दिया। अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निकासी सीमा बढ़ाने की मांग की।
तहसील परिसर में शुक्रवार दोपहर स्टांप वेंडरों ने प्रदर्शन किया। स्टांप बिक्री बंद कर शहर में जुलूस निकाला और अपर जिलाधिकारी महेश चंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से वेंडरों ने बताया कि कोषागार से प्रत्येक वेंडर को एक सप्ताह में 15 हजार के स्टांप की सीमा तय कर दी गई है। जो अपर्याप्त है। इस लिमिट को 50 हजार तक किया जाना चाहिए। ज्ञापन देने के बाद वेंडरों ने तहसील परिसर में धरना दिया।
महेश शुक्ला व कृष्ण कुमार ने कहा कि दो वर्ष पहले निकासी की सीमा पचास हजार तक होने से वेंडरों को पर्याप्त कमीशन मिलता था। अब सीमा 15 हजार करने से एक दिन में ही स्टांप बिक जाता है। बाकी छह दिन तक वेंडर खाली बैठे रहते हैं। इसके अलावा शहर के पटेल तिराहा स्थित तहसील व कचहरी से स्टांप लेने कलेक्ट्रेट जाना पड़ता है। जिससे आवागमन में समय की बर्बादी होती है। धरने पर प्रेमचंद्र, जवाहर लाल, घनश्याम प्रसाद, कृपा शंकर, श्रीकांत श्रीवास्तव, रामपाल, महेंद्र कुमार, अश्वनी कुमार, दीपेश विश्वकर्मा, सरफराज हुसैन व रमाकांत आदि रहे।
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तहसील परिसर में शुक्रवार दोपहर स्टांप वेंडरों ने प्रदर्शन किया। स्टांप बिक्री बंद कर शहर में जुलूस निकाला और अपर जिलाधिकारी महेश चंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से वेंडरों ने बताया कि कोषागार से प्रत्येक वेंडर को एक सप्ताह में 15 हजार के स्टांप की सीमा तय कर दी गई है। जो अपर्याप्त है। इस लिमिट को 50 हजार तक किया जाना चाहिए। ज्ञापन देने के बाद वेंडरों ने तहसील परिसर में धरना दिया।
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महेश शुक्ला व कृष्ण कुमार ने कहा कि दो वर्ष पहले निकासी की सीमा पचास हजार तक होने से वेंडरों को पर्याप्त कमीशन मिलता था। अब सीमा 15 हजार करने से एक दिन में ही स्टांप बिक जाता है। बाकी छह दिन तक वेंडर खाली बैठे रहते हैं। इसके अलावा शहर के पटेल तिराहा स्थित तहसील व कचहरी से स्टांप लेने कलेक्ट्रेट जाना पड़ता है। जिससे आवागमन में समय की बर्बादी होती है। धरने पर प्रेमचंद्र, जवाहर लाल, घनश्याम प्रसाद, कृपा शंकर, श्रीकांत श्रीवास्तव, रामपाल, महेंद्र कुमार, अश्वनी कुमार, दीपेश विश्वकर्मा, सरफराज हुसैन व रमाकांत आदि रहे।
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